आज 17 अक्टूबर 2026 को शनिवार का दिन है और इस समय शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है। आज नवरात्रि का सातवां दिन है, जिसमें विशेष रूप से मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है। पंचांग के गणित के अनुसार, आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। धार्मिक पंचांग में इस तिथि का खास महत्व है क्योंकि सप्तमी तिथि 18 अक्टूबर की सुबह तक प्रभावी रहेगी। ऐसे में मां कालरात्रि की साधना और अनुष्ठान करने वाले भक्त सुबह से ही अपनी तैयारियों में जुट जाते हैं। इसके साथ ही शनिवार का दिन होने के कारण न्याय के देवता शनिदेव की आराधना का भी विशेष संयोग बना हुआ है।
तिथि और नक्षत्र की स्थिति
आज शनिवार को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का संयोग है। पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर आरंभ हो चुकी है, जो कि अगले दिन यानी 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। नक्षत्रों की बात करें तो आज सुबह 9 बजकर 47 मिनट तक मूल नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र की शुरुआत हो जाएगी। इन नक्षत्र परिवर्तनों और तिथियों के मेल के बीच पूरे दिन धार्मिक अनुष्ठान और व्रत-पर्व से जुड़े कार्य संपन्न किए जाएंगे।
राहुकाल और अशुभ समय
दिनभर के कार्यों को तय करते समय अशुभ समय का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। आज राहुकाल सुबह 9 बजकर 14 मिनट से शुरू होकर सुबह 10 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल की इस अवधि में किसी भी तरह के नए या शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है ताकि कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।
शुभ मुहूर्त और अभिजित समय
दिन के शुभ कार्यों के लिए पंचांग में कुछ खास मुहूर्त बताए गए हैं। आज अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा दोपहर में अभिजित मुहूर्त का एक अन्य समय 01:14 पी एम से 01:57 पी एम तक भी रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन चुनिंदा समयावधियों में बिना किसी संकोच के सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं, जो सफलता और सकारात्मक फल प्रदान करते हैं।
मां कालरात्रि की पूजा और विधान
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना का विधान है। हालांकि मां का स्वरूप थोड़ा उग्र प्रतीत होता है, लेकिन उनके भक्त उन्हें हमेशा अपने कल्याण और रक्षा करने वाली देवी के रूप में मानते हैं। ऐसी गहरी मान्यता है कि मां कालरात्रि की सच्ची श्रद्धा से पूजा करने पर मन का सारा डर दूर हो जाता है और जीवन के हर मुश्किल समय में आगे बढ़ने की हिम्मत मिलती है। आज के दिन की शुरुआत सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर मां की पूजा के साथ करें। मां को ताजे फूल अर्पित करें, घी का दीपक जलाकर विधि-विधान से आरती करें और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार उन्हें भोग लगाएं। इस पावन दिन कई भक्त मां को विशेष रूप से गुड़ का भोग भी अर्पित करते हैं। पूजा संपन्न होने के बाद पूरे परिवार के लिए सुख-शांति और समृद्धि की मंगल कामना की जाती है।
शनिवार और शनिदेव की आराधना
आज शनिवार का दिन होने के कारण शनिदेव की पूजा का भी विशेष महत्व है। शनिवार के इस पावन अवसर पर जरूरतमंद और असहाय लोगों की सहायता करना तथा अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।
दिनभर के अन्य प्रमुख मुहूर्त
आज के पंचांग में कई अन्य विशेष मुहूर्तों का भी समावेश है। गोधूलि मुहूर्त शाम 06:57 पी एम से 07:24 पी एम तक रहेगा। सायाह्न सन्ध्या की अवधि शाम 06:57 पी एम से रात 08:17 पी एम तक निर्धारित है। अमृत काल की शुरुआत 18 अक्टूबर की सुबह 03:54 ए एम से होगी और यह सुबह 05:42 ए एम तक रहेगी। निशिता मुहूर्त 18 अक्टूबर की रात 01:10 ए एम से शुरू होकर 02:03 ए एम तक चलेगा। गुलिक काल सुबह 08:14 ए एम से 09:34 ए एम तथा 08:57 ए एम से 09:40 ए एम तक रहेगा। इसके अलावा भद्रा काल 18 अक्टूबर को सुबह 04:57 ए एम से शुरू होकर सुबह 08:15 ए एम तक रहेगा।
















