मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड ने जापानी येन के मुकाबले अपनी बढ़त का सिलसिला जारी रखा है, जिससे यह विनिमय दर तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई है। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में दोनों देशों के केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों के बीच बढ़ता अंतर पाउंड स्टर्लिंग को लगातार सहारा दे रहा है। बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा साल के अंत तक नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें मजबूत हो रही हैं, जिससे जापानी येन के मुकाबले स्टर्लिंग की स्थिति को अतिरिक्त मजबूती मिली है। इसके बावजूद, ऊपरी स्तरों पर तकनीकी संकेतकों और मूविंग एवरेज का एक कड़ा दायरा बना हुआ है, जो इस तेजी की रफ्तार को सीमित कर सकता है। दैनिक विनिमय दर में ब्रिटिश पाउंड 210.58 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया, जो पिछले सत्र के 209.88 के बंद स्तर से 0.33 प्रतिशत अधिक है। 52 हफ्तों के दौरान इस जोड़ी ने 199.09 के निचले स्तर से लेकर 219.52 के उच्च स्तर तक का दायरा तय किया है।
नीतिगत दरों का अंतर और केंद्रीय बैंकों का रुख
इस विनिमय दर में हालिया मजबूती की सबसे बड़ी वजह दोनों देशों की मौद्रिक नीतियों में मौजूद विशाल अंतर है। वर्तमान में बैंक ऑफ इंग्लैंड की आधिकारिक बैंक दर 3.75 प्रतिशत पर बनी हुई है, जबकि बैंक ऑफ जापान की नीतिगत ब्याज दर 1.25 प्रतिशत पर स्थित है। इस प्रकार दोनों प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच ब्याज दरों का फासला 250 आधार अंक यानी 2.50 प्रतिशत पर बना हुआ है। बाजार सहभागियों का मानना है कि ब्रिटेन में मुद्रास्फीति के दबावों को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में उधार लागत में और इजाफा कर सकता है। जब तक यह ब्याज दर अंतर व्यापक बना रहता है, तब तक येन जैसी कम प्रतिफल वाली मुद्राओं से पूंजी निकलकर पाउंड जैसी उच्च प्रतिफल वाली संपत्तियों की ओर बढ़ती रहेगी।
दूसरी ओर, जापानी येन की कमजोरी केवल पाउंड तक सीमित नहीं है। वैश्विक मुद्रा बाजार के रुझानों को दर्शाने वाले आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख मुद्राओं में येन का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा है और न्यूजीलैंड डॉलर के मुकाबले यह सबसे अधिक फिसला है। प्रमुख मुद्राओं के तुलनात्मक प्रदर्शन में येन अन्य प्रतिस्पर्धियों के सामने भी संघर्ष करता दिखाई दिया है। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में भिन्नता की वजह से मुद्रा विनिमय बाजार में कैरी ट्रेड जैसी रणनीतियों को प्रोत्साहन मिल रहा है, जिसका सीधा असर येन की धारणा पर पड़ रहा है।
जापान की ऐतिहासिक मौद्रिक नीति और मुद्रा का अवमूल्यन
बैंक ऑफ जापान देश का केंद्रीय बैंक है, जिसकी प्राथमिक जिम्मेदारी बैंक नोट जारी करना तथा मुद्रा एवं मौद्रिक नियंत्रण के माध्यम से मूल्य स्थिरता बनाए रखना है। बैंक ने इसके लिए लगभग 2 प्रतिशत का मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारित किया है। जापान के आर्थिक इतिहास पर नजर डालें तो देश ने 2013 में एक अभूतपूर्व अत्यधिक ढीली मौद्रिक नीति की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य दशकों से जारी कम मुद्रास्फीति और आर्थिक सुस्ती के माहौल को समाप्त करना तथा विकास को गति देना था। इस रणनीति के केंद्र में मात्रात्मक और गुणात्मक मौद्रिक सुगमता थी, जिसके तहत केंद्रीय बैंक तरलता प्रदान करने के लिए नोट छापकर सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड जैसी परिसंपत्तियों की व्यापक खरीद करता था।
साल 2016 में केंद्रीय बैंक ने अपनी इस प्रोत्साहन रणनीति को और आक्रामक बना दिया। बैंक ऑफ जापान ने सबसे पहले नकारात्मक ब्याज दर व्यवस्था लागू की और इसके बाद 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड के यील्ड को सीधे तौर पर नियंत्रित करने की रूपरेखा तैयार की, जिसे यील्ड कर्व कंट्रोल कहा गया। इस भारी मौद्रिक प्रोत्साहन का सीधा असर मुद्रा पर पड़ा और येन अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले लगातार कमजोर होता चला गया। वर्ष 2022 और 2023 के दौरान यह स्थिति और विकट हो गई, क्योंकि अमेरिका और यूरोप सहित दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने दशकों की सबसे भीषण महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की, जबकि बैंक ऑफ जापान अपनी अत्यंत ढीली नीति पर अडिग रहा। इस नीतिगत विचलन ने ब्याज दर के अंतर को चरम पर पहुंचा दिया, जिससे येन ऐतिहासिक गिरावट की चपेट में आ गया।
मार्च 2024 में बैंक ऑफ जापान ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ब्याज दरों में वृद्धि की और अपनी अल्ट्रा लूज मौद्रिक नीति को आधिकारिक तौर पर समाप्त करने की शुरुआत की। जापान में आयातित ऊर्जा लागतों में उछाल और मुद्रा के कमजोर होने से घरेलू महंगाई 2 प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य को पार कर गई थी। इसके साथ ही जापानी कंपनियों में वेतन वृद्धि की गति तेज हुई, जिसने मुद्रास्फीति को टिकाऊ स्तर पर बनाए रखने में मदद की। हालांकि मार्च 2024 के नीतिगत बदलाव के बावजूद वैश्विक स्तर पर दरों का अंतर अभी भी इतना चौड़ा है कि जापानी मुद्रा पर बिकवाली का दबाव पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका है।
तकनीकी संकेतक और मूविंग एवरेज की बाधाएं
दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालने से पता चलता है कि पाउंड और येन की जोड़ी में तेजी का प्रयास तो हो रहा है, लेकिन महत्वपूर्ण बाधाएं सामने खड़ी हैं। तकनीकी मोर्चे पर 211.66 से 213.54 के बीच मूविंग एवरेज का एक मजबूत संकुल बना हुआ है, जो मूल्य को ऊपर जाने से रोक रहा है। लघु अवधि के प्रतिरोध स्तरों में 50 दिवसीय साधारण मूविंग एवरेज 211.66 पर स्थित है, जिसके ठीक ऊपर 50.0 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर 211.75 पर मौजूद है। यदि यह जोड़ी इन स्तरों को पार करती है, तो अगला बड़ा आपूर्ति क्षेत्र 61.8 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट 212.90 पर आएगा। इसके अतिरिक्त 200 दिवसीय साधारण मूविंग एवरेज 213.01 और 100 दिवसीय साधारण मूविंग एवरेज 213.54 पर स्थित हैं। इन सभी स्तरों के ऊपर 78.6 प्रतिशत फिबोनाची स्तर 214.54 पर एक मजबूत छत का काम कर रहा है।
नीचे की ओर, प्राथमिक सहारा 38.2 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर पर 210.61 के करीब देखा जा रहा है। इसके नीचे गिरावट आने पर 23.6 प्रतिशत फिबोनाची स्तर 209.19 पर मजबूत मांग मिलने की उम्मीद है, जबकि प्रमुख ढांचागत निचला स्तर 206.89 के आसपास बना हुआ है। जब तक मूल्य इस मध्यम और दीर्घकालिक मूविंग एवरेज के समूह के नीचे बना रहता है, तब तक हर उछाल पर बिकवाली हावी होने की संभावना बनी रहेगी।
वर्तमान वास्तविक तकनीकी संकेतकों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि 14 अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 54 पर टिका हुआ है, जो न तो अत्यधिक खरीद और न ही अत्यधिक बिक्री की स्थिति दर्शाता है, बल्कि एक संतुलित तेजी का संकेत देता है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस शून्य रेखा से ऊपर आ चुका है और इसका हिस्टोग्राम 0.33 पर धनात्मक है, जो संकेत देता है कि तेजी का संवेग सुधर रहा है। हालांकि, 14 अवधि का एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स 20 के आसपास बना हुआ है, जो दर्शाता है कि मौजूदा रुझान में गति की कमी है और बाजार एक सीमित दायरे में फंसा हुआ है। घातीय मूविंग एवरेज के संदर्भ में 20 दिवसीय ईएमए 209.64, 50 दिवसीय ईएमए 211.03 और 200 दिवसीय ईएमए 211.41 पर स्थित है। 50 दिवसीय ईएमए का 200 दिवसीय ईएमए से नीचे होना एक दीर्घकालिक मंदी क्रॉसओवर की पुष्टि करता है। बॉलिंगर बैंड्स 207.94 से 210.67 के दायरे में फैले हैं और मूल्य इस बैंड के भीतर कारोबार कर रहा है। दैनिक उतार चढ़ाव मापने वाला 14 अवधि का एवरेज ट्रू रेंज 1.51 पर है, जिसे स्टॉप लॉस बफर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। वर्तमान सत्र के पिवट बिंदु 210.34, प्रथम प्रतिरोध 211.21, द्वितीय प्रतिरोध 211.83 तथा प्रथम समर्थन 209.71 और द्वितीय समर्थन 208.84 पर स्थित हैं।
वैश्विक बाजारों और अन्य परिसंपत्तियों की स्थिति
वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की चाल भी अन्य जोड़ियों को प्रभावित कर रही है। शुक्रवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सुधरकर 0.6950 के स्तर की ओर बढ़ा। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वॉर्श की टिप्पणियों ने अमेरिकी मुद्रा पर बिकवाली का दबाव बढ़ा दिया। वॉर्श ने स्पष्ट किया कि वह भविष्य के ब्याज दर मार्ग पर कोई विशिष्ट संकेत दिए बिना मूल्य स्थिरता प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इस अनिश्चितता के कारण डॉलर में कमजोरी आई और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को बढ़त मिली।
इसी तरह अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी भी शुक्रवार को नए सिरे से बिकवाली के दबाव में आई और एशियाई सत्र के दौरान 158.00 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गई। फेड चेयरमैन के भविष्य में मौद्रिक सख्ती के मार्ग पर कोई ठोस प्रतिबद्धता न जताने वाले बयानों ने डॉलर पर दबाव बनाए रखा। कीमती धातुओं के बाजार में सोने की कीमत 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे सीमित दायरे में घटती बढ़ती रही। अमेरिकी डॉलर में हल्की नरमी और ट्रेजरी यील्ड्स में आई मामूली रिकवरी के बीच सोने की चाल अनिश्चित बनी रही।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में अक्टूबर महीने के दौरान दबाव का माहौल बना रहा। बिटकॉइन सप्ताह की शुरुआत में 80,000 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गया था, हालांकि शुक्रवार तक इसमें रिकवरी देखी गई और यह संभलकर 82,000 डॉलर के आसपास पहुंच गया। व्यापक आर्थिक अनिश्चितताओं और मांग में आई कमी के चलते क्रिप्टो बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है।


















