अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर बना हुआ है, जहां लगातार चढ़ती अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड पीली धातु की चमक को फीका कर रही है। परंपरागत रूप से मुद्रास्फीति के खिलाफ सुरक्षा कवच माना जाने वाला सोना मौजूदा दौर में अमेरिकी आर्थिक संकेतकों और केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के नीतिगत संकेतों के बीच संघर्ष करता दिखाई दे रहा है। हालांकि अमेरिका में हालिया उपभोक्ता और उत्पादक मूल्य सूचकांकों के आंकड़े अनुमान से कहीं अधिक गर्म आए हैं, लेकिन बॉन्ड बाजार से मिलने वाली प्रतिस्पर्धा ने बुलियन बाजार में तेज बढ़त की उम्मीदों को सीमित कर दिया है।
मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने बढ़ाई बाजार की चिंता
अमेरिकी अर्थव्यवस्था से सामने आए ताजा आंकड़ों ने वित्तीय गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सितंबर महीने के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) सालाना आधार पर 3.7 प्रतिशत दर्ज किया गया। यह आंकड़ा बाजार विश्लेषकों द्वारा लगाए गए 3.6 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ा अधिक रहा और अगस्त महीने की 3.4 प्रतिशत की दर से भी तेज बढ़त दर्शाता है। महंगाई में आई इस वृद्धि ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मूल्य वृद्धि का दबाव अभी पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है।
इसके साथ ही थोक स्तर पर मूल्य वृद्धि को मापने वाला उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) भी काफी अप्रत्याशित साबित हुआ। बाजार ने इसके 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था, परंतु वास्तविक आंकड़ा छलांग लगाकर 6.3 प्रतिशत सालाना स्तर पर पहुंच गया। थोक महंगाई की यह अचानक आई उछाल संकेत देती है कि कंपनियों के लिए उत्पादन लागत बढ़ रही है, जिसे आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं पर डाला जा सकता है। इन गर्म आंकड़ों के बावजूद सर्राफा बाजार में उस तरह की आक्रामक खरीदारी देखने को नहीं मिली, जिसकी आमतौर पर ऊंची महंगाई के दौर में उम्मीद की जाती है।
फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों पर दांव
ब्याज दरों के मोर्चे पर वित्तीय बाजारों का रुख काफी रोचक मोड़ ले चुका है। प्राइम टर्मिनल के आंकड़ों के अनुसार, मुद्रा बाजारों में आगामी अक्टूबर बैठक के दौरान ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की संभावना काफी घट गई है और यह अब केवल 16 प्रतिशत आंकी जा रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि नीति निर्माता मौद्रिक सख्ती के पिछले कदमों के असर का आकलन करने के लिए कुछ समय लेना चाह सकते हैं।
दूसरी ओर, दिसंबर महीने की बैठक के लिए परिदृश्य पूरी तरह भिन्न नजर आ रहा है। बाजार प्रतिभागी साल के अंतिम महीने में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की 89 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहे हैं। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने हालिया वक्तव्यों में ब्याज दरों के भविष्य के रास्ते पर कोई स्पष्ट मार्गदर्शन देने से परहेज किया, जिससे सट्टेबाजों की आक्रामकता थोड़ी ठंडी पड़ी है। हालांकि उन्होंने इस बात को दृढ़ता से स्वीकार किया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था बुनियादी तौर पर मजबूत बनी हुई है और वे मूल्य स्थिरता बहाल करने के अपने वादे पर अडिग हैं।
मजबूत औद्योगिक उत्पादन और डॉलर का रुख
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाने वाले अन्य आंकड़ों में औद्योगिक उत्पादन शामिल रहा। सितंबर महीने में औद्योगिक उत्पादन में माह-दर-माह आधार पर 0.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह प्रदर्शन 0.4 प्रतिशत के अनुमानित विस्तार से बेहतर रहा और अगस्त के 0.1 प्रतिशत की मामूली वृद्धि के मुकाबले उल्लेखनीय सुधार पेश करता है। विनिर्माण और उत्पादन गतिविधियों में यह तेजी यह संकेत देती है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था ब्याज दरों के ऊंचे स्तर के बावजूद मंदी के दबाव से सुरक्षित दूरी बनाए हुए है।
मुद्रा बाजार पर नजर डालें तो दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की चाल को मापने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.10 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 101.87 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। डॉलर में आई इस हल्की कमजोरी ने सोने को निचले स्तरों पर कुछ राहत जरूर पहुंचाई, लेकिन अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड से मिलने वाले ऊंचे रिटर्न के कारण निवेशक बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों की तुलना में सरकारी ऋण पत्रों की तरफ अधिक आकर्षित हो रहे हैं।
विदेशी मुद्रा और अन्य वित्तीय बाजारों की हलचल
फेडरल रिजर्व के अस्पष्ट रुख का प्रभाव अन्य विदेशी मुद्रा जोड़ों पर भी साफ देखा गया। एशियाई व्यापार सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में तेजी लौटी और यह 0.6950 के स्तर की ओर अग्रसर हुआ। डॉलर पर बने तात्कालिक बिकवाली के दबाव ने इस जोड़ी को बढ़त हासिल करने का मौका दिया। वहीं अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) पर भी बिकवाली का दबाव बढ़ा और यह जोड़ी फिसलकर 158.00 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गई।
पारंपरिक संपत्तियों से परे, डिजिटल संपत्ति बाजार भी वृहद आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। अक्टूबर के महीने में क्रिप्टोकरेंसी बाजार दबाव में देखा गया है। दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल मुद्रा बिटकॉइन (BTC) इस सप्ताह गिरकर 80,000 डॉलर के स्तर से नीचे चली गई थी, हालांकि बाद में इसमें आंशिक सुधार देखा गया और यह 82,000 डॉलर के आसपास संभलने में कामयाब रही। संस्थागत मांग में आई सुस्ती और नकदी की तंगी ने जोखिम भरी संपत्तियों की रफ्तार धीमी कर दी है।
सोने का ऐतिहासिक महत्व और वैश्विक केंद्रीय बैंकों का रुख
मानव सभ्यता के पूरे इतिहास में सोने ने मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में एक अद्वितीय भूमिका निभाई है। आभूषणों के निर्माण और इसकी दृश्य सुंदरता के अतिरिक्त, आधुनिक वित्तीय प्रणाली में इसे संकट के समय सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता है। जब भी भू-राजनीतिक तनाव गहराता है या वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता पैदा होती है, निवेशक सुरक्षित संपत्ति की तलाश में सोने की ओर रुख करते हैं। चूंकि यह किसी विशेष सरकार या केंद्रीय बैंक की देनदारी नहीं है, इसलिए मुद्राओं के अवमूल्यन और मुद्रास्फीति के समय यह संपत्ति के संरक्षण का उत्कृष्ट साधन बनता है।
वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े संरक्षक और खरीदार माने जाते हैं। अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं की साख को बनाए रखने और विदेशी मुद्रा भंडारों में विविधता लाने के लिए वे नियमित रूप से स्वर्ण भंडार का विस्तार करते हैं। किसी भी देश के पास सोने का बड़ा भंडार उसकी वित्तीय संप्रभुता और साख का बड़ा प्रमाण माना जाता है। विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों ने वर्ष 2022 में अपने भंडारों में कुल 1,136 टन सोना जोड़ा था, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। यह इतिहास में किसी एक वर्ष में की गई सोने की सबसे बड़ी आधिकारिक खरीद दर्ज की गई थी। वर्तमान समय में भी चीन, भारत और तुर्किये जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडारों को आक्रामक रूप से बढ़ाने में जुटे हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर के साथ विपरीत संबंध
सोने के मूल्य का निर्धारण बड़े पैमाने पर अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी बॉन्ड की चाल से तय होता है। सामान्य तौर पर जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग और कीमतों में इजाफा होता है। इसके विपरीत, जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है या सरकारी प्रतिभूतियों पर मिलने वाला ब्याज बढ़ता है, तो सोने जैसी गैर-उपज वाली संपत्ति को नुकसान उठाना पड़ता है।
सोने का संबंध जोखिम भरी संपत्तियों जैसे कि शेयर बाजार से भी विपरीत दिशा में चलता है। जब वैश्विक शेयर बाजारों में चौतरफा तेजी होती है, तो निवेशक अधिक मुनाफे के लिए इक्विटी की तरफ बढ़ते हैं, जिससे सोने की मांग घटती है। दूसरी तरफ, जब मंदी की आशंकाएं या शेयर बाजारों में भारी बिकवाली का माहौल बनता है, तो निवेशक पूंजी बचाने के लिए सोने में शरण लेते हैं। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का लेनदेन अमेरिकी डॉलर (XAU/USD) में होता है, इसलिए विदेशी विनिमय दर में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव सीधे तौर पर इसकी स्थानीय और वैश्विक कीमतों को प्रभावित करता है।
तकनीकी विश्लेषण और महत्वपूर्ण मूल्य स्तर
मौजूदा तकनीकी संरचना के आधार पर सोने के भाव 4,188 डॉलर प्रति औंस के आसपास गतिशील हैं, जबकि इसका पिछला बंद भाव 4,170 डॉलर प्रति औंस पर दर्ज हुआ था। दैनिक चार्ट पर 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 44 के स्तर पर बना हुआ है, जो बाजार में मंदी के रुझान की ओर इशारा करता है। हालांकि चार्ट पर दिखाई दे रहा हल्का सकारात्मक विचलन आने वाले सत्रों में मूल्य सुधार का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) संकेतक -55.13 पर है जो अपने सिग्नल -58.74 से ऊपर 3.61 का सकारात्मक हिस्टोग्राम बना रहा है।
तकनीकी स्तरों के दृष्टिकोण से, सोने के लिए पहला तात्कालिक पिवट बिंदु 4,192 डॉलर पर स्थित है। यदि खरीदार इस स्तर के ऊपर नियंत्रण बनाने में सफल होते हैं, तो पहला बड़ा प्रतिरोध 4,200 डॉलर और उसके बाद R1 4,217 डॉलर पर देखने को मिलेगा। इसके ऊपर 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) 4,242 डॉलर और R2 स्तर 4,245 डॉलर पर स्थित है। इस सीमा को पार करने के बाद 50-दिवसीय SMA 4,331 डॉलर और दीर्घकालिक स्तर 4,500 डॉलर पर नजर आएगी।
यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है और कीमतें नीचे फिसलती हैं, तो सोने को पहला समर्थन 4,164 डॉलर (S1) और उसके बाद 4,139 डॉलर (S2) पर मिल सकता है। 4,100 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर टूटने पर 14 अक्टूबर का निचला स्तर 4,073 डॉलर सक्रिय हो जाएगा। इसके नीचे 29 जुलाई के चक्र का निचला स्तर 3,996 डॉलर, 17 जुलाई का निचला स्तर 3,959 डॉलर और 52-सप्ताह के न्यूनतम स्तर के करीब 3,941 डॉलर का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन के रूप में कार्य करेगा। 83.75 डॉलर का 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज (ATR) दैनिक अस्थिरता को दर्शाता है, जिसे स्टॉप-लॉस निर्धारित करते समय ध्यान में रखना अनिवार्य है।


















