वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की चाल काफी हद तक सपाट बनी हुई है, क्योंकि फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष वॉर्श ने मौद्रिक नीति को लेकर भविष्य के लिए कोई ठोस मार्गदर्शन नहीं दिया। नीतिगत दरों पर फेड प्रमुख की चुप्पी के बाद वित्तीय बाजारों में यह धारणा और पुख्ता हो गई है कि अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बेहद कम है। इसके अलावा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के विस्तार को लेकर उनके नजरिए ने भी अर्थशास्त्रियों और निवेशकों का ध्यान खींचा है, जहां उन्होंने इसे आपूर्ति पक्ष में सुधार लाने से पहले एक मुद्रास्फीति बढ़ाने वाले मांग झटके के रूप में देखा है।
नीतिगत दरों पर फेडरल रिजर्व का रुख और बाजार की प्रतिक्रिया
एमयूएफजी के विश्लेषक डेरेक हाफपेनी के अनुसार, फेड अध्यक्ष वॉर्श की टिप्पणियों के बाद अमेरिकी मुद्रा में कोई खास फेरबदल नहीं देखा गया। मौद्रिक नीति को लेकर वॉर्श ने केवल इतना दोहराया कि केंद्रीय बैंक पूरी तरह से अपने मुद्रास्फीति के लक्ष्य को हासिल करने पर केंद्रित रहेगा। आगामी नीतिगत कदमों पर उनकी ओर से कोई सीधा बयान न आने को निवेशकों ने एक संकेत की तरह लिया है। बाजार प्रतिभागी इसे इस बात की पुष्टि मान रहे हैं कि अक्टूबर में दरें बढ़ने की संभावना अब नाममात्र ही रह गई है।
भविष्य के फैसलों पर पहले से कोई राय जाहिर न करने को लेकर वॉर्श ने तर्क दिया कि वह बैठकों से पहले कोई पूर्व निर्णय नहीं लेते हैं। उनके इस बयान से स्पष्ट हुआ कि केंद्रीय बैंक आने वाले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर ही कोई कदम उठाएगा। हालांकि, इस अनिर्णय की स्थिति ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कर्व में अतिरिक्त मजबूती ला दी है, जिसके चलते आने वाले दिनों में डॉलर में किसी बड़ी तेजी की संभावना सीमित नजर आ रही है। बाजार 2027 की संभावित ब्याज दर वृद्धि को लेकर भी संशय की स्थिति में है, जिससे जी10 मुद्राओं और बॉन्ड बाजारों में अस्थिरता का दायरा बढ़ गया है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अर्थव्यवस्था पर मुद्रास्फीति का दबाव
फेड प्रमुख ने अपनी चर्चा में तकनीक, विशेष रूप से एआई के आर्थिक प्रभावों पर विस्तार से बात की। वॉर्श का मानना है कि यह नई तकनीक आने वाले समय में आर्थिक मोर्चे पर शुरुआत में मांग का एक बड़ा झटका साबित होगी, जिसके बाद ही यह आपूर्ति पक्ष को मजबूती दे पाएगी। मांग के इस अचानक उछाल के कारण निकट भविष्य में मुद्रास्फीति के जोखिम बढ़ सकते हैं। जब तक उत्पादकता में सुधार का असर वास्तविक उत्पादन में दिखाई नहीं देता, तब तक भारी निवेश और संसाधनों की खपत कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बनाए रखेगी।
इसके साथ ही वॉर्श ने चेतावनी दी कि एआई मौद्रिक नीति के संचालन के तौर-तरीकों को बुनियादी रूप से बदल देगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि समय के साथ फेडरल रिजर्व सहित अन्य प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंकों के नीतिगत प्रतिक्रिया तंत्र में अधिक अनिश्चितता पैदा होगी। आर्थिक मॉडलों में तकनीक के त्वरित प्रभाव को मापना पारंपरिक तरीकों की तुलना में काफी कठिन हो सकता है, जिससे दरों के निर्धारण में केंद्रीय बैंकों की चुनौतियां और अधिक जटिल हो जाएंगी।
विदेशी मुद्रा बाजार में प्रमुख जोड़ियों की हलचल
डॉलर पर दबाव का असर दुनिया भर के मुद्रा बाजारों में साफ दिखाई दिया। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में अच्छी खरीदारी देखी गई और यह जोड़ी उछलकर 0.6950 के स्तर की ओर बढ़ गई। फेड प्रमुख की ओर से सख्त रुख न दिखाए जाने के कारण निवेशकों ने अमेरिकी डॉलर की बिकवाली जारी रखी, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को मजबूती मिली।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले डॉलर (USD/JPY) नए बिकवाली दबाव में आ गया। शुक्रवार को एशियाई सत्र में यह जोड़ी 158.00 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गई। ब्याज दरों को और कड़ा करने के रास्ते पर फेड अध्यक्ष के अनिर्णायक रुख ने डॉलर पर दबाव डाला, जिसके चलते विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने डॉलर से किनारा करते हुए सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करना शुरू कर दिया।
सोने की चमक और क्रिप्टोकरेंसी में सुधार
कमजोर डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई नरमी का सबसे बड़ा फायदा कीमती धातुओं को मिला है। सोना लगातार दूसरे दिन बढ़त बनाते हुए लगभग 4,180 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। बाजार में सक्रिय तेजड़ियों की नजर अब 4,230 डॉलर के स्तर पर टिकी है, जो अक्टूबर के कारोबारी दायरे का ऊपरी छोर माना जा रहा है। इस सप्ताह फेडरल रिजर्व के विभिन्न अधिकारियों द्वारा दिए गए नरम बयानों ने भी सोने को अतिरिक्त सहारा दिया है और ग्रीनबैक के लिए सट्टेबाजी समर्थन को कमजोर कर दिया है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार की बात करें तो अक्टूबर महीने में अब तक इस पर दबाव देखा गया है। दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल मुद्रा बिटकॉइन (BTC) सप्ताह के शुरुआती दिनों में 80,000 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गई थी। हालांकि, शुक्रवार को इसमें सुधार हुआ और यह संभलकर लगभग 82,000 डॉलर के आसपास आ गई। व्यापक आर्थिक प्रतिकूलताओं और बाजार में घटती मांग के बावजूद बिटकॉइन ने निचले स्तरों से वापसी करने की कोशिश की है।
शेयर बाजार में सुस्ती और वैश्विक आर्थिक कारक
अमेरिकी शेयर बाजारों में भी इस दौरान संघर्ष की स्थिति बनी रही। जोखिम से बचने की निवेशकों की भावना के चलते सरकारी बॉन्डों में निवेश बढ़ा, जिससे इक्विटी बाजारों से नकदी बाहर निकली। तकनीकी क्षेत्र में जारी कमजोरी के बीच निवेशकों की निगाहें कंपनियों के तिमाही नतीजों और मध्यावधि चुनावों पर टिकी हुई हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूनाइटेड किंगडम से आने वाले रोजगार और मुद्रास्फीति के आंकड़े बैंक ऑफ इंग्लैंड की ब्याज दरों में वृद्धि से जुड़े दांव को चुनौती दे सकते हैं। यदि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में मंदी के संकेत और गहरे होते हैं, तो वैश्विक केंद्रीय बैंकों के सामने दरों को संतुलित रखने की एक नई चुनौती खड़ी हो जाएगी। इस तरह विभिन्न देशों के आर्थिक संकेतक और मुद्रास्फीति के आंकड़े आने वाले हफ्तों में वित्तीय बाजारों की दिशा तय करेंगे।


















