धार्मिक परंपरा में गुरुवार का दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रीहरि विष्णु के साथ केले के वृक्ष का विधिपूर्वक पूजन करने से जीवन में अनुकूल और शुभ फल प्राप्त होते हैं। जन्मकुंडली में देवगुरु बृहस्पति की स्थिति को सुदृढ़ बनाने के लिए श्रद्धालु गुरुवार का व्रत रखते हैं तथा भगवान विष्णु की वंदना करते हुए केले के पेड़ की परिक्रमा और अर्चन करते हैं। इसके अतिरिक्त शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप देवी स्कंदमाता के पूजन का विशेष विधान बन रहा है, जिससे भक्तों को सुख, शांति और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
तिथि, नक्षत्र और ग्रह संचरण का विवरण
पंचांगीय गणना के अनुसार 15 अक्टूबर, गुरुवार को राष्ट्रीय शक संवत् 23 आश्विन (सौर) 1948 है। पंजाब पंचांग के संदर्भ में यह 29 आश्विन मास प्रविष्टे 2083 है, जबकि इस्लामिक हिजरी कैलेंडर के अनुसार 03 जमादि उल्लावल 1448 दर्ज है। विक्रमी संवत् के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि रात्रि 03:26 बजे तक प्रभावी रहेगी, जिसके उपरांत षष्ठी तिथि आरंभ होगी। नक्षत्रों की स्थिति देखें तो ज्येष्ठा नक्षत्र संपूर्ण दिन और रात विद्यमान रहेगा। योगों के क्रम में सौभाग्य योग रात्रि 09:15 बजे तक रहेगा, जिसके बाद शोभन योग की शुरुआत होगी। चंद्र देव संपूर्ण दिन और रात वृश्चिक राशि में संचरण करेंगे। इस अवधि में सूर्य देव दक्षिणायन और दक्षिण गोल में स्थित रहेंगे तथा शरद ऋतु का प्रभाव बना रहेगा।
विशेष धार्मिक पर्व एवं व्रत अनुष्ठान
इस तिथि पर उपांग ललिता व्रत और ललिता पंचमी का पावन संयोग बन रहा है। भक्तजन इस अवसर पर मां ललिता और देवी स्कंदमाता की विशेष आराधना करते हैं। पंचांग के अनुसार दिन भर गण्डमूल विचार का भी ध्यान रखना आवश्यक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचमी तिथि पर देवी के ममतामयी स्वरूप का ध्यान करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और परिवार में सुख समृद्धि का विस्तार होता है।
दैनिक शुभ मुहूर्त और अमृत काल
किसी भी मांगलिक कार्य, अनुष्ठान या नए उपक्रम के आरंभ के लिए शुभ मुहूर्तों का चयन अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 04:42 बजे से सुबह 05:32 बजे तक रहेगा, जो ध्यान और ईश्वर आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ समय है। दिन का सर्वाधिक प्रशस्त अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक मान्य रहेगा। इसके पश्चात अमृत काल का योग रात 08:59 बजे से रात 10:46 बजे तक रहेगा। मध्यरात्रि में साधना और मंत्र जाप के लिए निशिता मुहूर्त रात 11:42 बजे से देर रात 12:32 बजे तक प्रभावी रहेगा।
दिन के शुभ चौघड़िया मुहूर्त
दैनिक जीवन में यात्रा, व्यापारिक लेन देन और गृह कार्यों के लिए चौघड़िया मुहूर्त महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रातःकाल शुभ उत्तम चौघड़िया सुबह 06:22 बजे से सुबह 07:48 बजे तक रहेगा। इसके बाद चर सामान्य चौघड़िया सुबह 10:40 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक बना रहेगा। लाभ उन्नति चौघड़िया का समय दोपहर 12:07 बजे से दोपहर 01:33 बजे तक निर्धारित है। दिन का सर्वोत्तम समय माना जाने वाला अमृत सर्वोत्तम चौघड़िया दोपहर 01:33 बजे से दोपहर 02:59 बजे तक रहेगा, जिसमें शुभ कार्यों को गति दी जा सकती है।
अशुभ समय: राहुकाल, यमगण्ड और दुर्मुहूर्त
ज्योतिष शास्त्र में किसी भी नए और महत्वपूर्ण कार्य को अशुभ कालखंड में टालने का परामर्श दिया जाता है। दिन का यमगण्ड काल सुबह 06:22 बजे से सुबह 07:48 बजे तक रहेगा। दुर्मुहूर्त की स्थिति सुबह 10:12 बजे से सुबह 10:58 बजे तक रहेगी। राहुकालम का समय दोपहर 01:30 बजे से अपराह्न 03:00 बजे तक रहेगा (जबकि चौघड़िया सारणी अनुसार राहुकाल दोपहर 01:33 बजे से दोपहर 02:59 बजे तक दर्ज है)। इसके अतिरिक्त शाम के समय गुलिक काल शाम 05:52 बजे से शाम 06:17 बजे तक प्रभावी रहेगा। इन अवधियों के दौरान महत्वपूर्ण अनुबंध, यात्रा प्रस्थान और नवीन अनुष्ठान करने से बचने की सलाह दी जाती है।





















