ज्योतिष शास्त्र और हिन्दू पंचांग के मुताबिक शनि देव ने मीन राशि में प्रवेश किया है, जिसके चलते मेष, मीन और कुंभ राशि के जातकों पर साढ़ेसाती का दौर शुरू हो गया है। इसके साथ ही सिंह और धनु राशि के जातकों पर शनि की ढैय्या भी चल रही है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक यह असर अगले करीब 5 महीने तक बना रह सकता है, ऐसे में इन पांचों राशियों के जातकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
साढ़ेसाती और ढैय्या का मतलब क्या होता है
ज्योतिष शास्त्र में शनि देव के गोचर को बेहद अहम माना जाता है। जब शनि किसी जातक की जन्म कुंडली में चंद्रमा से बारहवें, पहले और दूसरे घर से होकर गुजरता है तो उस दौर को साढ़ेसाती कहा जाता है, जो करीब साढ़े सात साल तक चलती है। वहीं शनि जब चंद्रमा से चौथे और आठवें घर से गुजरता है तो उसे ढैय्या कहा जाता है। शनि के मीन राशि में मौजूदा गोचर से मेष, मीन और कुंभ राशि के जातक साढ़ेसाती के दायरे में आ गए हैं, जबकि सिंह और धनु राशि के जातकों पर ढैय्या का प्रभाव बना हुआ है।
साढ़ेसाती और ढैय्या में किन मुश्किलों का करना पड़ सकता है सामना
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक साढ़ेसाती और ढैय्या के इस दौर में रोजमर्रा के कामकाज में अड़चनें आ सकती हैं और मन में नकारात्मक विचार हावी हो सकते हैं। घर के भीतर आपसी नोकझोंक और तनाव का माहौल बन सकता है, वहीं आर्थिक मोर्चे पर भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। इस दौरान संपत्ति खरीदने या शेयर बाजार में पैसा लगाने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि बना बनाया काम भी बीच में बिगड़ सकता है। पैसों को लेकर परेशानी खड़ी हो सकती है और जातक राजनीति से जुड़े विवादों में भी उलझ सकते हैं। जीवन में कई तरह की चुनौतियां सामने आ सकती हैं, इसलिए इस दौर में खुद पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालने की सलाह दी जाती है।
शनि देव को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय
साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए शनि देव के मंत्र ॐ शं शनैश्चराय नमः का नियमित जाप करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा काली उड़द की दाल का दान करना भी शुभ माना गया है। शनिवार के दिन शाम के वक्त सरसों के तेल में काला तिल मिलाकर शनि मंदिर में दीपक जलाना चाहिए। जरूरतमंद लोगों की मदद करने को भी शनि देव को प्रसन्न करने का जरिया बताया गया है। हर शनिवार पीपल के पेड़ और शमी के पेड़ में जल चढ़ाना और काली चीजों का दान करना भी लाभकारी माना जाता है। इसके साथ ही रोजाना हनुमान चालीसा, शनि चालीसा और शिव चालीसा का पाठ करने से भी शनि देव प्रसन्न होते हैं, ऐसा ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है।
ज्योतिष के मुताबिक साढ़ेसाती और ढैय्या का दौर हर जातक के लिए एक जैसा नहीं होता, फिर भी सतर्कता और धैर्य के साथ इस समय को पार किया जा सकता है। ऊपर बताए गए उपायों को श्रद्धा भाव से अपनाने पर शनि देव के प्रकोप से राहत मिलने की मान्यता है।













