मानसून के मौसम में होने वाली तेज बारिश और सड़कों पर जलभराव कार मालिकों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। जब गाड़ियां पानी से भरे रास्तों और कीचड़ से होकर गुजरती हैं, तो उनका निचला हिस्सा सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। कार के अंडरबॉडी यानी निचले हिस्से में कीचड़ और नमी लंबे समय तक फंसी रह जाती है। अगर समय पर इसकी सफाई और देखभाल न की जाए, तो धातु वाले हिस्सों पर जंग लगने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। विशेष रूप से वे हिस्से जहां पानी का निकास आसानी से नहीं हो पाता, वहां रस्टिंग बहुत तेजी से फैलती है। इस गंभीर समस्या से गाड़ियों को सुरक्षित रखने के लिए पलामू क्षेत्र के ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट अभिषेक तिवारी ने कई महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सुझाव साझा किए हैं। उनका कहना है कि बारिश के दिनों में सही समय पर ली गई सावधानी और नियमित रखरखाव कार की लाइफ को बढ़ा सकता है।
कार की निचली बॉडी को जंग से सुरक्षित रखने के लिए अंडरबॉडी कोटिंग
अभिषेक तिवारी के अनुसार, मानसून के दौरान कार के निचले हिस्से को सुरक्षित रखने का सबसे कारगर तरीका अंडरबॉडी कोटिंग है। यह कोटिंग गाड़ी की मेटल बॉडी पर एक बेहद मजबूत सुरक्षात्मक परत बना देती है। इस लेयर के कारण पानी, नमी, कीचड़ और सड़क पर फैले रसायनों का सीधा संपर्क कार की मेटल प्लेट्स से नहीं हो पाता। जो लोग बरसात के दिनों में रोजाना गाड़ी से सफर करते हैं या फिर अक्सर ऐसे इलाकों से गुजरते हैं जहां जलभराव और भारी कीचड़ की स्थिति बनी रहती है, उनके लिए यह प्रक्रिया बहुत उपयोगी साबित होती है। अंडरबॉडी कोटिंग को किसी भी अधिकृत सर्विस सेंटर या कार डीटेलिंग सेंटर पर जाकर कराया जा सकता है। हालांकि, एक्सपर्ट यह सलाह भी देते हैं कि कोटिंग कराने का फैसला लेने से पहले अपनी कार की वर्तमान स्थिति, उसके उपयोग की आवृत्ति और जरूरतों के अनुसार किसी विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य कर लेना चाहिए।
साइलेंसर और मेटल पार्ट्स पर नमी के असर को रोकना
बरसात का पानी और कीचड़ केवल कार की बाहरी पेंट वाली सतह को ही नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि गाड़ी के निचले भाग में लगे साइलेंसर और अन्य धातु के कलपुर्जों को भी गहराई से प्रभावित करते हैं। लगातार पानी के संपर्क में रहने के कारण साइलेंसर में समय से पहले जंग लगने और छेद होने का खतरा बना रहता है। इस जोखिम को टालने के लिए एक्सपर्ट साइलेंसर कोटिंग कराने की सिफारिश करते हैं। यह कोटिंग साइलेंसर को अत्यधिक तापमान और नमी दोनों के असर से बचाती है। साइलेंसर कोटिंग पर होने वाला खर्च वाहन के मेक और मॉडल के साथ-साथ इस्तेमाल की जाने वाली कोटिंग प्रक्रिया और सामग्री के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसके अतिरिक्त, इंजन के आसपास मौजूद अन्य धातु वाले हिस्सों की भी नियमित रूप से जांच कराते रहना जरूरी है। किसी भी प्रकार की केमिकल या रबर कोटिंग कराने से पहले यह जरूर पक्का कर लें कि वह कोटिंग उस विशेष पार्ट के लिए पूरी तरह सुरक्षित और उपयुक्त है या नहीं।
कार धोने का सही तरीका और पेंट की सुरक्षा के लिए सेरामिक कोटिंग
बरसात के दिनों में गाड़ी की बॉडी पर जमा धूल-मिट्टी जब बारिश की बूंदों से मिलती है, तो गंदगी पूरी सतह पर फैल जाती है। ऐसे समय में यदि कार को सीधे सूखे कपड़े से पोंछ दिया जाए, तो कपड़े में फंसे धूल और बालू के कण पेंट पर बारीक स्क्रैच बना देते हैं। इससे बचने के लिए सबसे पहले पूरी कार पर साफ पानी डालकर कीचड़ और धूल को बहा देना चाहिए। जब गंदगी हट जाए, उसके बाद ही माइक्रोफाइबर कपड़े की मदद से हल्के हाथों से गाड़ी को साफ करना चाहिए। गाड़ी के ओरिजिनल पेंट को पानी के दाग, धूल और बारिश के एसिडिक असर से बचाकर रखने के लिए सेरामिक कोटिंग एक बेहतरीन विकल्प है। सेरामिक कोटिंग कार के पेंट पर एक पारदर्शी और सख्त सुरक्षा परत तैयार करती है, जिससे पानी सतह पर रुकने के बजाय तुरंत नीचे फिसल जाता है। इसकी लागत कार के आकार, इस्तेमाल की गई कोटिंग की क्वालिटी और सर्विस सेंटर के हिसाब से तय होती है। इसलिए सेरामिक कोटिंग कराने से पहले उसकी वारंटी, रखरखाव की शर्तों और वास्तविक फायदों की जानकारी किसी एक्सपर्ट से जरूर ले लें।
टायर, व्हील और ब्रेक असेंबली का रखरखाव
मानसून में गाड़ी के टायरों के आसपास सबसे ज्यादा मिट्टी, कीचड़ और पानी जमा होता है। टायरों के पास स्थित ब्रेक डिस्क और अन्य मेटल कंपोनेंट्स में नमी के कारण हल्की सतही जंग दिखना बेहद आम बात है। यदि इस गंदगी को साफ न किया जाए, तो यह ब्रेक सिस्टम की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है। कार मालिकों को चाहिए कि वे टायरों, व्हील आर्च और ब्रेक के आसपास जमा गंदगी को नियमित रूप से पानी के प्रेशर से साफ करवाएं। यदि ब्रेक डिस्क पर जंग बहुत ज्यादा नजर आ रही हो, ब्रेक दबाने पर असामान्य आवाज आ रही हो या ब्रेकिंग रिस्पॉन्स में बदलाव महसूस हो, तो खुद से सफाई करने की कोशिश न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी कुशल मैकेनिक या सर्विस सेंटर पर जाकर जांच करानी चाहिए।
सुरक्षित ड्राइविंग के लिए विंडशील्ड और वाइपर ब्लेड की देखभाल
मुसलाधार बारिश के दौरान सुरक्षित ड्राइविंग करने के लिए विंडशील्ड का एकदम साफ होना सबसे जरूरी कारक है। खराब विजिबिलिटी के कारण बरसात में दुर्घटनाओं का जोखिम काफी बढ़ जाता है। अगर वाइपर चलाने के बाद भी शीशे पर पानी की पतली परत रह जाती है, धुंधली लकीरें बनती हैं या वाइपर आवाज करता है, तो इसका स्पष्ट मतलब है कि वाइपर ब्लेड घिस चुके हैं या खराब हो गए हैं। ऐसे स्थिति में बिना देरी किए वाइपर ब्लेड्स को नया बदलवा लेना चाहिए। इसके अलावा, कार के विंडशील्ड वॉशर फ्लुइड टैंक को हमेशा भरकर रखें और नियमित रूप से उसका इस्तेमाल करें ताकि शीशे पर जमा कीचड़ और तेल की परत आसानी से साफ हो सके। बारिश के मौसम में साफ शीशा चालक को स्पष्ट दृश्यता प्रदान करता है और हादसों की संभावना को कम करता है।
मानसून में कार की लंबी उम्र के लिए ध्यान देने योग्य बातें
बरसात के मौसम में वाहन का रखरखाव केवल उसकी चमक-दमक बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गाड़ी की बॉडी और उसके आंतरिक कलपुर्जों की उम्र बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी कदम है। यदि कार को नियमित रूप से धोया जाए, अंडरबॉडी की समय-समय पर जांच कराई जाए, जरूरत के मुताबिक कोटिंग्स का इस्तेमाल किया जाए और ब्रेक तथा वाइपर्स की उचित देखभाल की जाए, तो मानसून से जुड़ी अधिकतर समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है। विशेष रूप से जब भी आप अपनी गाड़ी को पानी से भरे या कीचड़ वाले रास्तों पर चलाकर लाएं, तो उसके निचले हिस्से की प्रेशर वॉश से सफाई जरूर कराएं ताकि वहां नमी और गंदगी लंबे समय तक जमा न रह सके।



















