ज्योतिषीय गणना के मुताबिक ग्रहों की स्थिति में बदलाव से विभिन्न राशियों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। हाल ही में 17 अगस्त को सूर्य ग्रह ने अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश किया है। इसके साथ ही सूर्य ने मघा नक्षत्र में भी गोचर किया है। सिंह राशि में पहले से ही पाप ग्रह केतु विराजमान हैं, जबकि मघा नक्षत्र के स्वामी ग्रह भी केतु ही हैं। इस प्रकार सूर्य देव इस समय पूरी तरह से केतु के प्रभाव क्षेत्र में आ गए हैं। ज्योतिष शास्त्र के विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्य और केतु का यह संयोग कुछ राशियों के लिए मानसिक, आर्थिक और शारीरिक तनाव लेकर आ सकता है। विशेष रूप से 3 राशियों के जातकों को इस अवधि के दौरान हर कदम सोच-समझकर उठाने की सलाह दी गई है।
सूर्य पर केतु का प्रभाव और महत्वपूर्ण तिथियां
ग्रहों के इस विशेष गोचर के दौरान समय की सीमा को समझना अत्यंत आवश्यक है। सूर्य देव 31 अगस्त तक मघा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। इसके बाद वे नक्षत्र परिवर्तन करेंगे, लेकिन सिंह राशि में उनकी उपस्थिति 17 सितंबर तक बनी रहेगी। 17 सितंबर को सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में गोचर करेंगे। इसका सीधा अर्थ यह है कि 17 अगस्त से शुरू हुआ केतु का यह प्रभाव 17 सितंबर तक विभिन्न रूपों में बना रहेगा। इस पूरे एक महीने की अवधि में करियर, धन संपदा, पारिवारिक संबंधों और सेहत से जुड़े मामलों में कुछ जातकों को विशेष रूप से सतर्क रहना होगा।
वृश्चिक राशि: कार्यस्थल पर संयम और निवेश में सतर्कता की जरूरत
वृश्चिक राशि वाले जातकों के लिए सूर्य का मघा नक्षत्र में प्रवेश पेशेवर जीवन में उतार-चढ़ाव की स्थिति पैदा कर सकता है। इस दौरान कार्यक्षेत्र में आपको धैर्य और संयम बनाए रखने की सख्त जरूरत होगी। अपने वरिष्ठ अधिकारियों या बॉस के साथ किसी भी बहस अथवा वैचारिक मतभेद से बचना ही समझदारी होगी। आवेश या गुस्से में आकर लिया गया कोई भी फैसला आपके करियर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह समय जोखिम लेने का नहीं है। यदि आप किसी नए प्रोजेक्ट, व्यापार या संपत्ति में धन लगाने की योजना बना रहे हैं, तो सबसे पहले उस योजना की पूरी तरह से जांच-पड़ताल कर लें। बिना किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह और संपूर्ण जानकारी के बिना बड़ी रकम निवेश करने से बचें, अन्यथा आपका पैसा लंबे समय के लिए फंस सकता है।
मकर राशि: यात्रा में सावधानी, कानूनी दस्तावेज और बजट का रखें ध्यान
मकर राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर अष्टम भाव से संबंधित माना जा रहा है। ज्योतिष में अष्टम भाव को अचानक आने वाली बाधाओं और गुप्त समस्याओं का कारक माना जाता है। इस अवधि में वाहन चलाते समय या किसी भी प्रकार की यात्रा के दौरान अत्यधिक सावधान रहने की आवश्यकता है। जरा सी लापरवाही भी दुर्घटना या परेशानी का कारण बन सकती है।
इसके अतिरिक्त, यदि आपका कोई काम कोर्ट-कचहरी, कानूनी प्रक्रियाओं या सरकारी कागजातों से जुड़ा हुआ है, तो उसमें किसी भी तरह की ढिलाई न बरतें। सभी जरूरी फाइलों और दस्तावेजों की गहनता से जांच करने के बाद ही आगे बढ़ें। अचानक सामने आने वाले अप्रत्याशित खर्चे आपके मासिक बजट को बिगाड़ सकते हैं। इसलिए अपने पैसों के प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें और इस समय अवधि में किसी भी व्यक्ति को पैसा उधार देने से साफ बचें।
कुंभ राशि: दांपत्य जीवन, व्यापारिक साझेदारी और सेहत पर दें ध्यान
कुंभ राशि के जातकों के लिए सूर्य देव का यह गोचर सप्तम भाव को प्रभावित कर रहा है। ज्योतिष शास्त्र में सप्तम भाव का संबंध वैवाहिक जीवन, जीवनसाथी और व्यावसायिक साझेदारी से होता है। इस दौरान जीवनसाथी के साथ अहम के टकराव या विचारों में भिन्नता के कारण रिश्तों में खिंचाव आ सकता है। छोटी-छोटी बातों को तूल देने के बजाय बातचीत के माध्यम से स्थिति को संभालने का प्रयास करें।
व्यापार करने वाले जातकों को अपने बिजनेस पार्टनर के साथ पारदर्शिता रखनी होगी। किसी भी प्रकार की गलतफहमी को तुरंत चर्चा करके सुलझाएं और कोई भी बड़ा व्यावसायिक निर्णय जल्दबाजी में न लें। सेहत के मामले में भी यह समय सतर्क रहने का है। स्वयं के साथ-साथ अपने जीवनसाथी के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखें। विशेष रूप से पेट से जुड़ी समस्याओं और हड्डियों में दर्द जैसी तकलीफों को अनदेखा न करें और समय पर चिकित्सीय सलाह लें।


















