ज्योतिष में शनि को सबसे धीमी चाल वाला ग्रह माना जाता है और एक राशि में करीब ढाई साल बिताने के दौरान वह कई बार वक्री यानी उल्टी चाल में चलने लगते हैं। वक्री अवस्था में शनि पिछली राशि में लौट भी सकते हैं, इसी वजह से बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि उनकी साढ़ेसाती खत्म हो गई, जबकि हकीकत में कुछ महीनों बाद उसका असर फिर लौट आता है। इसलिए सिर्फ यह देखना काफी नहीं कि शनि ने राशि बदली है या नहीं, बल्कि यह जानना भी उतना ही जरूरी है कि वे दोबारा उसी राशि में वापस आएंगे या आगे बढ़ते रहेंगे। इस वक्त शनि की साढ़ेसाती कुंभ, मीन और मेष तीन राशियों पर असर डाल रही है, और तीनों की स्थिति अलग-अलग पड़ाव पर है।
वक्री होने का मतलब यह नहीं है कि शनि सच में पीछे की ओर चलने लगते हैं, बल्कि पृथ्वी से देखने पर उनकी चाल उल्टी दिशा में जाती दिखाई देती है। इसी वक्री गति के चलते शनि कई बार अपनी मौजूदा राशि से निकलकर पिछली राशि में लौट आते हैं, और कुछ समय बाद फिर उसी राशि में दोबारा प्रवेश करते हैं। साढ़ेसाती को आमतौर पर तीन चरणों में बांटा जाता है, पहला चरण चंद्र राशि से पिछली राशि में, दूसरा चरण खुद चंद्र राशि में और तीसरा चरण चंद्र राशि से अगली राशि में माना जाता है। शनि की यही बार-बार आगे-पीछे होने वाली चाल है, जो साढ़ेसाती की तारीखों को उलझा देती है।
कुंभ राशि: तीसरा चरण चल रहा है, पर राहत के बाद भी सफर पूरा नहीं
कुंभ राशि पर अभी साढ़ेसाती का तीसरा और आखिरी चरण चल रहा है। जब शनि पहली बार मेष राशि में दाखिल होंगे, तब कुंभ राशि वालों को इस साढ़ेसाती से राहत मिल जाएगी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। इसके बाद शनि वक्री होकर वापस मीन राशि में लौटेंगे, फिर भी वे कुंभ राशि में दोबारा प्रवेश नहीं करेंगे। यही वजह है कि इस पूरे गोचर चक्र में कुंभ राशि वालों पर साढ़ेसाती दोबारा नहीं लगेगी। एक बार राहत मिलने के बाद, शनि के वक्री होकर मीन में लौटने का असर कुंभ राशि वालों पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि उनकी सीमा अब पीछे छूट चुकी होगी।
इस चक्र के खत्म होने के बाद कुंभ राशि वालों को अगली साढ़ेसाती के लिए लंबा इंतजार करना होगा, करीब 29 साल। शनि जब अगली बार मकर राशि में प्रवेश करेंगे, तभी कुंभ राशि के लिए नई साढ़ेसाती शुरू होगी। मौजूदा ग्रह-गणना के हिसाब से यह पड़ाव करीब 2054-2055 के आसपास आने की उम्मीद है।
मीन राशि: 2027 से 2029 के बीच कई बार बदलेगा चरण
मीन राशि पर अभी साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है, और अगले कुछ साल इस राशि के लिए उतार-चढ़ाव भरे रहने वाले हैं। 3 जून 2027 को शनि मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इससे साढ़ेसाती खत्म नहीं होगी, बल्कि इसका तीसरा चरण शुरू हो जाएगा। इसके कुछ महीने बाद ही, 20 अक्टूबर 2027 को शनि वक्री होकर फिर मीन राशि में लौट आएंगे, जिससे दोबारा दूसरा चरण शुरू हो जाएगा। फिर 23 फरवरी 2028 को शनि एक बार फिर मेष राशि में प्रवेश करेंगे और तीसरा चरण दोबारा शुरू होगा।
इस आवाजाही का अंत 8 अगस्त 2029 को होगा, जब शनि वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ मीन राशि वालों की साढ़ेसाती पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। इसके बाद शनि वक्री होकर मेष राशि में जरूर लौटेंगे, लेकिन मीन राशि में वापस नहीं आएंगे, इसलिए इस चक्र में मीन राशि वालों पर साढ़ेसाती दोबारा नहीं लगेगी।
संक्षेप में मीन राशि के लिए दो तारीखें याद रखनी जरूरी हैं। 20 अक्टूबर 2027 को शनि वक्री होकर मीन राशि में वापस आएंगे और दूसरा चरण फिर शुरू होगा, जबकि 8 अगस्त 2029 को शनि वृषभ राशि में प्रवेश करते ही साढ़ेसाती की समाप्ति हो जाएगी।
मीन राशि वालों की अगली साढ़ेसाती तब शुरू होगी जब शनि दोबारा कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। मौजूदा गोचर चक्र के हिसाब से यह मौका करीब 2057-2058 के आसपास आने का अनुमान है।
मेष राशि: सबसे लंबा और सबसे पेचीदा गोचर सिलसिला
मेष राशि वालों की साढ़ेसाती 29 मार्च 2025 को शनि के मीन राशि में प्रवेश के साथ ही शुरू हो चुकी है, और अभी इसका पहला चरण चल रहा है। 3 जून 2027 को शनि मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके साथ दूसरा चरण शुरू होगा। लेकिन इसके तुरंत बाद, 20 अक्टूबर 2027 को शनि वक्री होकर फिर मीन राशि में लौट आएंगे, जिससे एक बार फिर पहला चरण शुरू हो जाएगा।
23 फरवरी 2028 को शनि दोबारा मेष राशि में प्रवेश करेंगे और दूसरा चरण फिर लौट आएगा। इसके बाद 8 अगस्त 2029 को शनि वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके साथ तीसरा चरण शुरू होगा। लेकिन यह सिलसिला यहीं नहीं थमता, 5 अक्टूबर 2029 को शनि एक बार फिर वक्री होकर मेष राशि में लौट आएंगे, और इससे दोबारा दूसरा चरण शुरू हो जाएगा। इसके बाद 17 अप्रैल 2030 को शनि फिर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे और तीसरा चरण एक बार फिर शुरू होगा।
मेष राशि वालों की साढ़ेसाती तभी पूरी तरह खत्म मानी जाएगी जब शनि मिथुन राशि में स्थायी रूप से प्रवेश कर लेंगे, क्योंकि उसके बाद शनि दोबारा वृषभ राशि में नहीं लौटेंगे।
मेष राशि के लिए भी दो तारीखें खास तौर पर याद रखने लायक हैं। 20 अक्टूबर 2027 को शनि वक्री होकर मीन राशि में लौटेंगे और पहला चरण फिर शुरू होगा, जबकि 5 अक्टूबर 2029 को शनि वक्री होकर मेष राशि में वापस आएंगे और दूसरा चरण दोबारा शुरू हो जाएगा। साढ़ेसाती की पूरी समाप्ति शनि के मिथुन राशि में स्थायी प्रवेश के बाद ही मानी जाएगी।
मेष राशि वालों की अगली साढ़ेसाती तब शुरू होगी जब शनि दोबारा मीन राशि में प्रवेश करेंगे। मौजूदा गोचर चक्र के अनुसार यह पड़ाव करीब 2060-2061 के आसपास आने का अनुमान है।
आखिर बार-बार क्यों बदलता रहता है साढ़ेसाती का चरण
साढ़ेसाती हमेशा चंद्र राशि से ठीक एक राशि पहले शुरू होती है। चंद्र राशि में इसका दूसरा चरण चलता है, और चंद्र राशि से एक राशि आगे बढ़ने पर तीसरा चरण माना जाता है। जब शनि वक्री होकर पिछली राशि में लौटते हैं, तो साढ़ेसाती का चरण भी उसी हिसाब से बदल जाता है, यानी जो तीसरा चरण चल रहा था वह फिर दूसरे चरण में या दूसरा चरण फिर पहले चरण में बदल सकता है।
यही वजह है कि ज्योतिष में शनि के स्थायी गोचर यानी बिना वक्री हुए आगे बढ़ते रहने की स्थिति को कहीं ज्यादा अहम माना जाता है। साढ़ेसाती की असली शुरुआत और असली समाप्ति का फैसला उसी स्थायी गोचर के आधार पर होता है, न कि किसी अस्थायी राशि परिवर्तन के आधार पर। इसीलिए कुंभ, मीन और मेष राशि वालों को अपनी साढ़ेसाती का सही हिसाब रखने के लिए ऊपर दी गई तारीखों और चरणों को ध्यान में रखना जरूरी है।


















