गाड़ी में हॉर्न के बाद सबसे अधिक उपयोग होने वाले कलपुर्जों में ब्रेक शामिल हैं। भारतीय मार्गों पर लगातार मिलने वाले ट्रैफिक सिग्नल, गहरे गड्ढे, बिना निशान वाले स्पीड ब्रेकर और असमतल सड़कें चालकों को बार-बार ब्रेक पैडल दबाने पर मजबूर करती हैं। निरंतर ब्रेक के इस्तेमाल से पैड्स पर अत्यधिक दबाव बनता है और उनका घर्षण पदार्थ धीरे-धीरे खत्म होने लगता है। बहुत से गाड़ी मालिक ब्रेक सिस्टम की अनदेखी कर बैठते हैं, जबकि यह वाहन नियंत्रण और सुरक्षित सफर दोनों के लिहाज से सबसे अनिवार्य हिस्सा है।
जब ब्रेक पैड्स जरूरत से ज्यादा घिस जाते हैं, तो वाहन को थामने की कुल क्षमता घट जाती है, जो किसी भी आपात स्थिति में गंभीर खतरे की वजह बन सकती है। यदि चालक अपनी ड्राइविंग आदतों में कुछ जरूरी बदलाव लाएं, तो ब्रेक पैड्स की कार्यक्षमता और उम्र को काफी हद तक बढ़ाया जा सकता है। पांच अहम तरीकों पर अमल करके आप अनावश्यक मेंटेनेंस खर्च से बच सकते हैं और गाड़ी को सुरक्षित रख सकते हैं।
अंतिम क्षणों में तेज ब्रेक लगाने से बचें
वाहन को जहां रोकना हो, उससे काफी पहले से ही ब्रेक लगाना शुरू कर देना चाहिए। आखिरी पलों में अचानक बहुत तेज दबाव के साथ ब्रेक दबाना हार्ड ब्रेकिंग कहलाता है। ऐसा करने पर पहियों और पैड्स के बीच बहुत अधिक घर्षण के साथ भारी मात्रा में गर्मी पैदा होती है, जिससे उनका मटीरियल असामान्य रूप से तेजी से घिसता है। इसके विपरीत, पहले से स्थिति भांपकर हल्के दबाव के साथ धीरे-धीरे रुकने से सिस्टम पर बेवजह का तनाव नहीं पड़ता। यह नियमित आदत पैड्स को सुरक्षित रखने के साथ-साथ गाड़ी को भी बिना झटके के स्थिरता देती है।
अत्यधिक रफ्तार पर नियंत्रण रखें
सड़क पर बहुत तेज गति से गाड़ी दौड़ाना रोमांचक जरूर लग सकता है, लेकिन यह ब्रेकिंग कंपोनेंट्स के लिए अत्यंत नुकसानदेह साबित होता है। उच्च गति पर दौड़ रहे वाहन को रोकने के लिए ब्रेक पैड्स को भारी मात्रा में काइनेटिक एनर्जी सोखनी पड़ती है। एक अध्ययन के मुताबिक, 85 किमी/घंटा की तुलना में 105 किमी/घंटा की रफ्तार से वाहन को पूरी तरह रोकने में 33 प्रतिशत अधिक एनर्जी खर्च होती है। अत्यधिक ऊर्जा की खपत का सीधा असर पैड्स के तेजी से घिसने और ईंधन के अधिक खर्च के रूप में सामने आता है, इसलिए नियंत्रित गति में चलना ही समझदारी है।
ब्रेक और एक्सीलरेटर को एक साथ दबाने की भूल न करें
गाड़ी चलाते वक्त ब्रेक पैडल और एक्सीलरेटर को एक ही समय पर दबाना बेहद हानिकारक आदत मानी जाती है। इससे इंजन पर बेवजह लोड बढ़ता है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ जाती है और ब्रेक पैड्स पर भी अत्यधिक खिंचाव पड़ता है। इस गलती के चलते पैड्स सामान्य स्थिति के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज रफ्तार से खत्म होते हैं। हमेशा ब्रेक लगाते वक्त एक्सीलरेटर पैडल से पैर पूरी तरह हटा लें। इस अनुशासन से पैड्स घिसने से बचेंगे और गाड़ी का माइलेज भी बेहतर बना रहेगा।
भीड़भाड़ में इंजन ब्रेकिंग का सही इस्तेमाल करें
धीमी रफ्तार वाले ट्रैफिक में या धीरे-धीरे गाड़ी रोकने के लिए इंजन ब्रेकिंग की तकनीक अपनाना बहुत कारगर होता है। इसके लिए एक्सीलरेटर और क्लच दोनों से पैर हटा लें और आवश्यकता पड़ने पर गियर को निचले स्तर पर शिफ्ट करें। यह प्रक्रिया सीधे ब्रेक पैडल दबाने की तुलना में गति को थोड़ा धीमा कम करती है, इसलिए आगे चल रहे वाहन से पर्याप्त फासला बनाए रखना जरूरी है। हालांकि, इस तरीके से पैड्स पर पड़ने वाला भौतिक दबाव बेहद कम हो जाता है, जिससे उनकी उम्र लंबी होती है। शहरी ट्रैफिक के दौरान यह तकनीक सबसे ज्यादा असरदार साबित होती है।
गाड़ी में अनावश्यक वजन लादने से बचें
कार में फालतू सामान या भारी एक्सेसरीज रखने से कुल भार में बेवजह इजाफा होता है। अतिरिक्त वजन के कारण गाड़ी का मोमेंटम बढ़ जाता है, जिसके परिणामस्वरूप वाहन की गति रोकने के लिए ब्रेक्स को बहुत ज्यादा ताकत और ऊर्जा लगानी पड़ती है। भारी वजन के कारण पैड्स जल्दी खत्म होते हैं और इंजन के माइलेज पर भी विपरीत असर पड़ता है। बूट स्पेस में केवल वही सामान रखें जिसकी वास्तविक जरूरत हो। वाहन का वजन हल्का रखने से ब्रेकिंग सिस्टम तनावमुक्त रहता है और पैड्स लंबे समय तक काम करते रहते हैं।





















