वाहन चालकों को ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी विभिन्न सेवाओं के लिए अब सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर काटने या हफ्तों तक आवेदन की स्थिति का इंतजार करने से जल्द मुक्ति मिल सकती है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और नागरिक केंद्रित बनाने के उद्देश्य से मोटर वाहन नियमों में संशोधन का एक नया मसौदा जारी किया है। इस मसौदे का मुख्य लक्ष्य अनावश्यक शुल्क को खत्म करना, कागजी कार्रवाई के बोझ को घटाना और तय समयसीमा के भीतर आवेदनों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करना है।
मंत्रालय ने इन प्रस्तावित बदलावों को सार्वजनिक करते हुए आम नागरिकों, परिवहन विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से तीस दिनों की अवधि में अपनी प्रतिक्रिया, सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने का आग्रह किया है। यह अवधि पूरी होने और प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद इन नियमों को अंतिम रूप देकर देशभर में लागू किया जाएगा। अगर यह मसौदा अपने मौजूदा स्वरूप में कानून बनता है, तो देश के करोड़ों वाहन चालकों को लाइसेंस रिन्यू कराने, विवरण अपडेट करने और नए परमिट हासिल करने में अभूतपूर्व सहूलियत मिलने वाली है।
पता और संपर्क विवरण बदलने पर अब नहीं देनी होगी कोई फीस
नए प्रस्तावों में आम लोगों के वित्तीय बोझ को कम करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। अब तक ड्राइविंग लाइसेंस में आवासीय पता, मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी जैसी मूलभूत जानकारियां बदलने के लिए आवेदकों को निर्धारित सरकारी शुल्क का भुगतान करना पड़ता था। नए मसौदे के तहत इन सभी व्यक्तिगत विवरणों को अपडेट कराने पर लगने वाले शुल्क को पूरी तरह समाप्त करने का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा, जो नागरिक आधार कार्ड के माध्यम से ऑनलाइन बायोमेट्रिक अथवा ओटीपी प्रमाणीकरण का उपयोग करके फेसलेस सेवाओं का लाभ उठाएंगे, उन्हें भी यह सुविधा पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराने की योजना है। नौकरी बदलने, नए शहर में स्थानांतरित होने या मकान बदलने वाले लाखों कामकाजी लोगों और छात्रों को इससे सीधा लाभ मिलेगा, क्योंकि उन्हें अपने रिकॉर्ड अद्यतन कराने के लिए बार-बार अतिरिक्त खर्च नहीं उठाना पड़ेगा।
निपटारे के लिए कड़ी समयसीमा और स्वतः मंजूरी का प्रावधान
अक्सर ड्राइविंग लाइसेंस में मामूली संशोधन के लिए भी आवेदकों को क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और महीनों तक फाइलों के आगे बढ़ने का इंतजार करना पड़ता है। इस व्यवस्था को पूरी तरह बदलने के लिए सरकार ने सख्त समयसीमा तय करने का प्रस्ताव रखा है। मसौदे के अनुसार, नाम में संशोधन अथवा अन्य विवरणों को दुरुस्त कराने वाले आवेदनों पर संबंधित अधिकारियों को अधिकतम पंद्रह दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लेना अनिवार्य होगा।
वहीं पते में बदलाव के मामलों में व्यवस्था को और अधिक जवाबदेह बनाते हुए 'डीम्ड अप्रूवल' यानी स्वतः मंजूरी का नियम शामिल किया गया है। यदि किसी नागरिक द्वारा पते में बदलाव का आवेदन देने के बाद तीस दिनों तक परिवहन विभाग उस पर कोई फैसला नहीं लेता है या उसे लंबित रखता है, तो तय अवधि समाप्त होते ही उस आवेदन को स्वतः स्वीकृत मान लिया जाएगा। इसके साथ ही, यदि कोई चालक अपने लाइसेंस से किसी विशिष्ट वाहन श्रेणी को हटवाना चाहता है, तो इस प्रक्रिया को मात्र सात दिनों के भीतर स्वतः निष्पादित करने की व्यवस्था सुझाई गई है।
बिजली और रसोई गैस के बिल भी माने जाएंगे पते का वैध प्रमाण
किराए के मकानों में रहने वाले या एक शहर से दूसरे शहर जाने वाले लोगों के लिए अक्सर स्थानीय आवासीय प्रमाण जुटाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। इस जमीनी समस्या को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने पते के प्रमाण से जुड़े दस्तावेजों के दायरे को व्यापक बनाने का निर्णय लिया है। नए नियमों के अंतर्गत अब बिजली का बिल और घरेलू एलपीजी गैस का बिल भी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आधिकारिक पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त यह तय की गई है कि प्रस्तुत किया जाने वाला बिजली या गैस बिल आवेदन की तारीख से तीन महीने से अधिक पुराना नहीं होना चाहिए। इस छूट से उन प्रवासी श्रमिकों, युवा पेशेवरों और छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनके पास नए निवास स्थान पर वोटर कार्ड या पासपोर्ट जैसे स्थायी दस्तावेज तुरंत उपलब्ध नहीं होते हैं। हालांकि, इन दस्तावेजों की जांच और अंतिम स्वीकार्यता की विस्तृत शर्तें अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होंगी।
सारथी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था होगी और भी आसान
परिवहन सेवाओं के केंद्रीयकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म सारथी पोर्टल को उपयोगकर्ताओं के लिए अधिक सहज और तेज बनाने की तैयारी भी इस मसौदे का हिस्सा है। नए सिस्टम में ऑटो-फिल यानी जानकारी अपने आप भरने की तकनीक को शामिल किया जाएगा। इससे जब भी कोई नागरिक किसी नई सेवा के लिए लॉगिन करेगा, तो उसकी बुनियादी जानकारियां आधार या पूर्व रिकॉर्ड से स्वतः दर्ज हो जाएंगी और उसे हर बार एक ही ब्योरा दोबारा टाइप नहीं करना पड़ेगा।
इसके अतिरिक्त, प्रक्रियागत जटिलताओं को कम करने के लिए एक अलग 'फॉर्म 2ए' पेश करने की रूपरेखा तैयार की गई है। इस एकल फॉर्म का उपयोग ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण, डुप्लीकेट लाइसेंस जारी कराने और लाइसेंस में नई वाहन श्रेणी जोड़ने जैसे सभी प्रमुख कार्यों के लिए एक साथ किया जा सकेगा, जिससे अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग प्रपत्र भरने का झंझट समाप्त हो जाएगा।
सड़क सुरक्षा और जनहित में इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तथा अंगदान का विकल्प
सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने लाइसेंस आवेदन प्रक्रिया में दो नए सामाजिक और सुरक्षात्मक प्रावधान भी जोड़े हैं। अब प्रत्येक आवेदक को फॉर्म भरते समय अपने एक आपातकालीन संपर्क व्यक्ति का विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि किसी भी अप्रिय सड़क दुर्घटना या आपात स्थिति में पुलिस और चिकित्सा कर्मी तुरंत घायल व्यक्ति के परिजनों से संपर्क स्थापित कर सकेंगे।
इसके साथ ही, आवेदन पत्र में अंगदान का एक स्वैच्छिक विकल्प भी शामिल किया जा रहा है। यदि कोई नागरिक अपनी मर्जी से अंगदान करने का संकल्प लेना चाहता है, तो वह आवेदन के दौरान ही अपनी सहमति दर्ज करा सकेगा। यह जानकारी उसके ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड पर भी अंकित की जाएगी, जिससे देश में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के जीवन की रक्षा में मदद मिल सकेगी।



















