भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इन दिनों स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल यानी एसयूवी की जबरदस्त धूम मची हुई है, जिसके चलते यह कयास लगाए जाने लगे थे कि देश में हैचबैक और छोटी गाड़ियों का सफर अब थमने वाला है। लेकिन देश की दिग्गज कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आर सी भार्गव ने इस धारणा को सिरे से खारिज कर दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के वित्तीय परिणामों को सार्वजनिक करते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि भारत को केवल एसयूवी का बाजार मान लेना एक भूल होगी। कर प्रणाली में हुए बदलावों के बाद इस सेगमेंट में लौटी बहार इस बात का पुख्ता सबूत है कि एंट्री-लेवल और छोटी गाड़ियों के खरीदार आज भी बहुत बड़ी संख्या में मौजूद हैं।
छोटी कारों की बिक्री में जोरदार उछाल और विश्लेषकों के दावे
आर सी भार्गव ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान ही कंपनी ने करीब 3.98 लाख छोटी कारों की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया है। पिछले दो-तीन वर्षों से तमाम ऑटो विश्लेषक यह भविष्यवाणी करने में जुटे थे कि आधुनिक और मस्कुलर फीचर्स वाली महंगी गाड़ियों के सामने छोटी कारों का टिक पाना मुश्किल होगा और हर उपभोक्ता केवल एसयूवी की तरफ ही भागेगा। हालांकि, देश के निम्न मध्यम वर्ग के खरीदारों ने अपनी निरंतर मांग से इन सभी कयासों को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है।
जुलाई से सितंबर तिमाही के आंकड़े और भविष्य का विजन
जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के दौरान मारुति की छोटी गाड़ियों की बिक्री में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 35.9 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि इसी समय अंतराल में एसयूवी सेगमेंट ने 68.2 प्रतिशत की रफ्तार से वृद्धि दर्ज की, लेकिन छोटी कारों की वॉल्यूम ग्रोथ यह साफ कर देती है कि यह सेगमेंट अपनी पकड़ खोने वाला नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था के आकार में विस्तार और लोगों की बदलती जीवनशैली के बावजूद भार्गव को छोटी गाड़ियों के भविष्य पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भी, जब भारत एक विकसित राष्ट्र की श्रेणी में आ जाएगा, देश में छोटी कारों का एक विशाल और सुदृढ़ बाजार कायम रहेगा।
जीएसटी सुधारों का असर और उत्पादन के मोर्चे पर चुनौतियां
आर सी भार्गव के मुताबिक सितंबर 2025 में लागू किए गए जीएसटी सुधारों ने ऑटोमोबाइल सेक्टर को एक नई ऊर्जा प्रदान की है। मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कुल 6.97 लाख यूनिट्स की रिकॉर्ड बिक्री हासिल की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 26.5 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा पहली छमाही का कुल वॉल्यूम 27.9 प्रतिशत की बढ़त के साथ 13.79 लाख यूनिट्स पर पहुंच गया है। गाड़ियों की मांग इतनी अधिक है कि कारखानों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के बाद भी डीलरशिप स्तर पर गाड़ियों की आपूर्ति कम पड़ रही है। सितंबर महीने के आखिर तक करीब 2 लाख गाड़ियों की बुकिंग पेंडिंग थी और डीलरों के पास केवल 17 दिनों का ही स्टॉक शेष बचा था।
ग्रामीण बाजारों का विस्तार और वित्तीय प्रदर्शन
कंपनी के शीर्ष अधिकारियों का यह भी कहना है कि कारों की मांग अब केवल बड़े महानगरों तक ही सीमित नहीं रह गई है, बल्कि देश के ग्रामीण इलाकों में आर्थिक विकास की गति शहरी क्षेत्रों से भी कुछ कदम आगे चल रही है। देश के दूरदराज के कोनों तक अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए मारुति सुजुकी अपने अरेना और नेक्सा रिटेल नेटवर्क का लगातार विस्तार कर रही है, जिसके चलते कंपनी के कुल सर्विस टचपॉइंट्स की संख्या 5,000 के आंकड़े को पार कर चुकी है।
दूसरी तरफ, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मारुति की शुद्ध बिक्री 26.1 प्रतिशत बढ़कर ₹50,615.5 करोड़ पर पहुंच गई, जबकि कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 26.9 प्रतिशत घटकर ₹2,414.9 करोड़ दर्ज किया गया। मुनाफे में आई इस गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, विदेशी मुद्रा विनिमय में होने वाला नुकसान और मार्क-टू-मार्केट घाटा मुख्य वजह रहे। इसके बावजूद कंपनी को पूरा विश्वास है कि वह वित्त वर्ष 2026-27 में पिछले साल के 4.44 लाख वाहनों के कुल निर्यात आंकड़े को पीछे छोड़ देगी, क्योंकि मारुति वर्तमान में भारत से लगभग 120 देशों को अपनी कारों का निर्यात करती है।



















