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अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर यौन हिंसा को ढाल बनाना बंद करें, कानूनी विशेषज्ञ मेरी ऐन फ्रैंक्स की दो टूकपड़ताल
22 अक्तू॰ 2026, 7:40 am (18 मिनट पहले)· 0

अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर यौन हिंसा को ढाल बनाना बंद करें, कानूनी विशेषज्ञ मेरी ऐन फ्रैंक्स की दो टूक

जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर मेरी ऐन फ्रैंक्स ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी मामले और सोशल मीडिया पर महिलाओं की पहचान उजागर करने की प्रवृत्ति के बीच यह स्पष्ट किया है कि यौन उत्पीड़न दरअसल पीड़ितों की आवाज दबाने का सबसे बड़ा जरिया है।

डिजिटल दुनिया में जब भी महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा या शोषण की घटनाएं सामने आती हैं, इंटरनेट का एक बड़ा वर्ग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ लेकर अपराधियों का बचाव करने उतर पड़ता है। अमेरिका के कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में 2024 के दौरान घटित एक भयावह सामूहिक दुष्कर्म के मामले ने इस विकृत मानसिकता को फिर से उजागर कर दिया है। इस मामले में काई फाई फ्रेटरनिटी के सात सदस्यों पर एक पूर्व छात्रा से यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। हाल के दिनों में इंटरनेट पर कई दक्षिणपंथी अकाउंट्स और ट्रोल हैंडल्स ने पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने की मुहिम शुरू कर दी। जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी लॉ स्कूल की प्रोफेसर और साइबर सिविल राइट्स इनिशिएटिव यानी सीसीआरआई की अध्यक्ष मेरी ऐन फ्रैंक्स के अनुसार, सोशल मीडिया पर महिलाओं को निशाना बनाने का यह कोई नया तरीका नहीं है बल्कि एक बहुत पुराना पैटर्न है।

प्रोफेसर फ्रैंक्स दशकों से डिजिटल उत्पीड़न और गैर-सहमति से बनाई गई तस्वीरों या वीडियो के प्रसार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। माइकल ट्रेसी जैसे स्वतंत्र टिप्पणीकारों ने संविधान के प्रथम संशोधन का हवाला देकर यह दावा किया कि पीड़िता की निजी जानकारियां उजागर करना कानूनी तौर पर अभिव्यक्ति की आजादी के दायरे में आता है। इस तरह के तर्कों को सिरे से खारिज करते हुए फ्रैंक्स बताती हैं कि जब समाज बोलने की आजादी की एक अमूर्त धारणा को अंधभक्ति की तरह पूजने लगता है, तब इंसानी सुरक्षा और शारीरिक गरिमा को दरकिनार कर दिया जाता है। यौन उत्पीड़न कोई अलग-थलग अपराध नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है क्योंकि यह पीड़ितों को हमेशा के लिए चुप करा देता है।

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शब्दावली का बदलाव और सहमति का बुनियादी सिद्धांत

साइबर स्पेस में महिलाओं के शोषण को पारिभाषित करने के लिए पहले 'रिवेंज पोर्न' जैसे शब्दों का आम तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि फ्रैंक्स का मानना है कि ऐसे शब्द असल समस्या को गलत दिशा में मोड़ देते हैं। 'रिवेंज' यानी बदला शब्द यह संकेत देता है कि शायद पीड़िता ने कुछ गलत किया था जिसका बदला लिया जा रहा है, जबकि पोर्नोग्राफी शब्द सहमति से बनी सामग्री की ओर इशारा करता है। यही कारण है कि कानूनी और सामाजिक मंचों पर अब इमेज आधारित यौन शोषण या गैर-सहमति वाली पोर्नोग्राफी जैसे सटीक शब्दों का उपयोग किया जा रहा है ताकि किसी भी स्तर पर पीड़िता को दोषी ठहराने की गुंजाइश न रहे।

सीसीआरआई के अनुसार, यौन आचरण या अभिव्यक्ति में किसी भी स्तर पर सहमति का अभाव गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसमें शारीरिक कृत्य के लिए सहमति न होना, किसी कृत्य को रिकॉर्ड करने की सहमति न होना, रिकॉर्डिंग को दूसरों के बीच साझा करने की अनुमति न होना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए डीपफेक बनाकर किसी की छवि को विकृत करना शामिल हैं। कई बार ये सारे अपराध एक साथ किए जाते हैं, जहां दुष्कर्म को रिकॉर्ड कर बिना सहमति के इंटरनेट पर फैला दिया जाता है।

कॉर्नेल यूनिवर्सिटी मामला और चैट ग्रुप्स की गंदी हकीकत

कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की पीड़िता द्वारा दायर मुकदमे के अनुसार, 2024 में फ्रेटरनिटी हाउस के अंदर सात सदस्यों ने सात घंटों तक उसके साथ बर्बरता की थी। इस पूरे प्रकरण में डिजिटल माध्यमों की भूमिका बेहद डरावनी रही। रात की शुरुआत में ही एक आरोपी ने पीड़िता की आपत्तिजनक तस्वीर फ्रेटरनिटी के स्नैपचैट ग्रुप में डाल दी और संदेश लिखा कि वह ऊपर के कमरे में उपलब्ध है। इसके बाद अन्य छात्र कमरे में दाखिल हुए और अपराध को अंजाम दिया।

यह घटना दर्शाती है कि कैसे तकनीक का उपयोग करके एक इंसान को केवल देह या वस्तु तक सीमित कर दिया गया। किसी साथी को रोकने के बजाय उस आपत्तिजनक पोस्ट को पुरुषों के आपसी जुड़ाव और सामाजिक अनुमोदन का माध्यम बना लिया गया। स्नैपचैट जैसे मंचों की गायब हो जाने वाली सामग्री की प्रकृति ने युवाओं के मन में यह भ्रम पैदा कर दिया है कि उनके कृत्य का कोई रिकॉर्ड नहीं रहेगा, जिससे अपराध की यह विकृति और बढ़ जाती है।

विशेषाधिकार प्राप्त संस्थानों की पुरुषवादी मानसिकता का इतिहास

अभिजात्य परिसरों में इस तरह की घटनाएं अप्रत्याशित नहीं हैं। फ्रैंक्स बताती हैं कि जब समाज में हर तरह की सहूलियत पा चुके युवाओं को उच्च शिक्षण संस्थानों में यह एहसास होता है कि वे कोई असाधारण या श्रेष्ठ व्यक्ति नहीं हैं, तो वे अपनी कुंठा महिलाओं को अपमानित करके निकालते हैं। खेल टीमों और फ्रेटरनिटीज में यह प्रवृत्ति सबसे ज्यादा पनपती है, जहां पुरुषों का आपसी भाईचारा महिलाओं को नीचा दिखाने पर टिका होता है। अमेरिकी कांग्रेस, अदालतों और शीर्ष प्रशासनिक पदों पर पहुंचे कई लोग इन्हीं फ्रेटरनिटीज से निकले हैं, जो इनके गहरे प्रभाव को दर्शाता है।

कॉर्नेल में महिलाओं के प्रति घृणा का इतिहास पुराना रहा है। वर्ष 1995 में इंटरनेट के शुरुआती दौर में कॉर्नेल के चार छात्रों की बनाई एक सूची वायरल हुई थी, जिसका शीर्षक था महिलाओं को बोलने की आजादी क्यों नहीं होनी चाहिए। उस सूची में लिखा गया था कि यदि कोई महिला बोल नहीं पाएगी तो वह इनकार भी नहीं कर पाएगी। उस समय भी कई लोगों ने इसे केवल मजाक या व्यंग्य बताकर प्रथम संशोधन के तहत जायज ठहराने की कोशिश की थी। फ्रैंक्स स्पष्ट करती हैं कि निजी विश्वविद्यालय प्रथम संशोधन से बंधे नहीं होते और किसी भी संस्थान के लिए अपने छात्रों की सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखना बोलने की तथाकथित आजादी से कहीं अधिक अनिवार्य कर्तव्य है।

अभिव्यक्ति की आज़ादी का संकुचित और विकृत रूप

जब भी तकनीक के माध्यम से महिलाओं की स्वायत्तता का हनन होता है या डीपफेक को गैरकानूनी घोषित करने की बात आती है, सोशल मीडिया मंच अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दुहाई देने लगते हैं। फ्रैंक्स का कहना है कि यौन शोषण वास्तव में पीड़ित के बोलने के अधिकार को पूरी तरह छीन लेता है। अदालतों में पीड़ितों पर बोलने की पाबंदी लगा दी जाती है, उन्हें धमकियां मिलती हैं, वे अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं, और महिलाएं पत्रकारिता या राजनीति जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों से बाहर होने को मजबूर हो जाती हैं।

हाल के वर्षों में सोशल मीडिया पर बोलने की आजादी को एक खास राजनीतिक हथियार बना दिया गया है। एलन मस्क द्वारा एक्स का अधिग्रहण करने के बाद बोलने की आजादी के नाम पर नफरत और उत्पीड़न को खुली छूट मिलने की शिकायतें बढ़ी हैं। फ्रैंक्स के अनुसार, खुद को अभिव्यक्ति की आजादी का मसीहा बताने वाले लोग असल में केवल अपनी पसंद की आवाजों को बढ़ावा देते हैं और अपनी आलोचना करने वालों को कुचलते हैं। सोशल मीडिया मंचों पर पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले संदेशों को जानबूझकर नहीं हटाया जाता, जिससे डिजिटल भीड़ को मनोरंजन और ध्यान आकर्षित करने का मौका मिलता है।

बर्नर नेटवर्क और डिजिटल भीड़ का उन्माद

सोशल मीडिया पर कॉलेज खेलों के गुमनाम फैन अकाउंट्स, जिन्हें 'बर्नरवर्स' कहा जाता है, अब युवा महिलाओं की निजी जिंदगी को बर्बाद करने का खेल खेल रहे हैं। फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी की 20 वर्षीय छात्रा मैडी कोवाल्स्की का मामला इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, जहां उनका एक निजी वीडियो इन गुमनाम हैंडल्स ने एक्स पर उनकी पहचान और कॉलेज संगठन के नाम के साथ प्रसारित कर दिया। इससे उनका जीवन पूरी तरह तबाह हो गया और लगातार फोन कॉल्स तथा धमकियों का सिलसिला शुरू हो गया।

स्क्रीन की मौजूदगी इंसानों के बीच की सहानुभूति को समाप्त कर देती है। पुरुष अपनी पहचान साबित करने के लिए महिलाओं के सार्वजनिक अपमान को एक खेल बना लेते हैं। इस भीड़ तंत्र में कई बार गलत नाम वाले निर्दोष लोग भी फंस जाते हैं, जिससे स्थिति और विकराल हो जाती है। सोशल मीडिया का यह अल्गोरिदम इंसानियत को मिटाकर केवल ध्यान खींचने की भूख को बढ़ावा दे रहा है।

बचाव के तरीके और समाधान

इस संकट से निपटने के लिए प्रोफेसर फ्रैंक्स का मानना है कि सबसे पहली जिम्मेदारी पुरुषों को जवाबदेह बनाने की है। संस्थानों को खेल टीमों और फ्रेटरनिटीज के पुरुषों से सीधे बात करनी होगी। इसके साथ ही महिलाओं के लिए शारीरिक आत्मरक्षा का प्रशिक्षण बेहद आवश्यक है, ताकि वे न कहना सीखें और शुरुआती खतरों को पहचान सकें।

डिजिटल दुनिया में युवाओं को सोशल मीडिया के प्रति जागरूक होना चाहिए। तकनीक का उपयोग करने से पहले यह सोचना जरूरी है कि क्या यह हमें क्रोधित या खाली महसूस करा रहा है। अकेलापन दूर करने के लिए सोशल मीडिया पर अत्यधिक व्यक्तिगत जानकारियां साझा करने से बचना चाहिए, क्योंकि कई किशोर अब सेक्सटॉर्शन के शिकार हो रहे हैं। इस निराशाजनक माहौल में कॉर्नेल डेली सन जैसे छात्र अखबारों की साहसिक पत्रकारिता उम्मीद की किरण दिखाती है, जो धमकियों के बावजूद सच सामने लाने के लिए डटे हुए हैं।

सवाल-जवाब

मेरी ऐन फ्रैंक्स कौन हैं और वे इस मामले पर क्यों बोल रही हैं?
मेरी ऐन फ्रैंक्स जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी लॉ स्कूल में प्रोफेसर और साइबर सिविल राइट्स इनिशिएटिव की अध्यक्ष हैं, जो दशकों से डिजिटल उत्पीड़न और कानून पर शोध कर रही हैं।
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी का मामला असल में क्या है?
2024 में एक पूर्व छात्रा ने काई फाई फ्रेटरनिटी के सात सदस्यों पर फ्रेटरनिटी हाउस के अंदर सात घंटों तक सामूहिक दुष्कर्म करने का मुकदमा दर्ज कराया है।
इस मामले में स्नैपचैट की क्या भूमिका रही?
एक आरोपी ने रात की शुरुआत में पीड़िता की आपत्तिजनक तस्वीर स्नैपचैट ग्रुप में साझा करके साथियों को संदेश भेजा था कि वह ऊपर मौजूद है, जिसके बाद अन्य सदस्यों ने हमला किया।
यौन शोषण को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा क्यों माना जा रहा है?
प्रोफेसर फ्रैंक्स के अनुसार, यौन उत्पीड़न पीड़ितों को भयभीत करके और कानूनी पाबंदियों में बांधकर उनकी आवाज दबा देता है, जिससे वे समाज में स्वतंत्र रूप से बोलने से वंचित हो जाती हैं।
बर्नरवर्स किसे कहा जाता है?
बर्नरवर्स कॉलेज स्पोर्ट्स फैन अकाउंट्स और फ्रेटरनिटी से जुड़े गुमनाम प्रोफाइल का नेटवर्क है, जो युवा महिलाओं की निजी जानकारियों और वीडियो को इंटरनेट पर वायरल करने का काम करते हैं।
क्या निजी विश्वविद्यालयों पर अमेरिकी संविधान का प्रथम संशोधन लागू होता है?
नहीं, निजी विश्वविद्यालय प्रथम संशोधन से कानूनी तौर पर बाध्य नहीं होते और वे अपने परिसर में आचार संहिता और छात्रों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम लागू कर सकते हैं।
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