यूरोपीय देश फ्रांस के कई हिस्सों में लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों और प्रशासन की ओर से लागू किए गए रात्रि कर्फ्यू के मद्देनजर भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे और यात्रा कर रहे अपने नागरिकों के लिए विस्तृत सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। फ्रांस के विभिन्न शहरों में बने तनावपूर्ण हालात को देखते हुए भारतीय मिशन ने सभी नागरिकों को अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी है। विशेष रूप से उन इलाकों से पूरी तरह दूरी बनाए रखने को कहा गया है जहां हिंसक घटनाएं या बड़े स्तर पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके साथ ही, स्थानीय फ्रांसीसी पुलिस और प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी किए जा रहे सुरक्षा दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का आग्रह किया गया है।
भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास ने जारी किए आपातकालीन नंबर
पेरिस में स्थित भारतीय दूतावास ने अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारतीय समुदाय के लोगों को आपातकालीन संपर्क सूत्र उपलब्ध कराए हैं। दूतावास की ओर से कहा गया है कि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति या सहायता की आवश्यकता होने पर नागरिक सीधे संपर्क स्थापित कर सकते हैं। राजधानी पेरिस में भारतीय दूतावास के आपातकालीन फोन नंबर +33 6 48 34 00 63 और आधिकारिक ईमेल [email protected] पर मदद मांगी जा सकती है। इसके अतिरिक्त, दक्षिणी फ्रांस के प्रमुख शहर मार्सिले में स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास ने भी अपने हेल्पलाइन नंबर सक्रिय किए हैं। मार्सिले स्थित मिशन से फोन नंबर +33 7 43 16 25 59 और ईमेल [email protected] के माध्यम से संपर्क साधा जा सकता है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक आवाजाही से बचें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।
विदेशी नेताओं के बयानों और राजनीतिक बयानबाजी पर इमैनुएल मैक्रों का पलटवार
फ्रांस में जारी अशांति के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ विदेशी राजनेता फ्रांस के संवेदनशील सामाजिक माहौल का इस्तेमाल अपने निजी राजनीतिक फायदे के लिए करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हिंसा का उल्लेख करते हुए दावा किया था कि इस अशांति के लिए मुस्लिम प्रवासी जिम्मेदार हैं। ट्रंप ने इमैनुएल मैक्रों को सार्वजनिक रूप से यह सलाह दी थी कि फ्रांस को बहुत देर होने से पहले अपनी सीमाओं को बंद कर देना चाहिए और स्थिति पर कड़ा नियंत्रण स्थापित करना चाहिए।
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए इमैनुएल मैक्रों ने पलटवार किया। मैक्रों ने स्पष्ट किया कि पेरिस और देश के अन्य शहरों में पिछले सप्ताहांत हुई तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों से सुनियोजित तरीके से गलत जानकारियां फैलाई जा रही हैं। राष्ट्रपति मैक्रों के अनुसार, विदेशी नेताओं द्वारा की गई ऐसी टिप्पणियां पूरी तरह से अस्वीकार्य होने के साथ-साथ बेहद बेतुकी भी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आंतरिक कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से निपटने में फ्रांस पूरी तरह सक्षम है और किसी भी बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
हिंसा भड़काने के लिए सोशल मीडिया पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का दुरुपयोग
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस बात को भी प्रमुखता से रेखांकित किया कि मौजूदा अशांति के दौरान जनता को भ्रमित करने के लिए आधुनिक तकनीक, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर एआई द्वारा तैयार की गई फर्जी तस्वीरें और वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें ऐसे दृश्य दिखाए गए हैं जो वास्तव में फ्रांस में कभी घटित ही नहीं हुए। मैक्रों ने कहा कि इन फर्जी दृश्यों के आधार पर यह झूठ फैलाया गया कि प्रवासियों और चरमपंथियों की भारी भीड़ ने हिंसक हमले किए हैं। उन्होंने इन सभी दावों को बेबुनियाद और सच्चाई से कोसों दूर बताया।
यूरोप के अन्य देशों तक पहुंचा असंतोष का दायरा
फ्रांस में जारी यह अशांति केवल एक देश तक सीमित नहीं दिख रही है। फ्रांस, स्पेन और अल्बानिया में हुए हालिया घटनाक्रमों के बाद अब ग्रीस में भी व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। ग्रीस की राजधानी एथेंस समेत कई बड़े शहरों में आम जनता सड़कों पर उतर आई है। ग्रीक नागरिक लगातार बढ़ती महंगाई, गंभीर होते आजीविका संकट और ईंधन की आसमान छूती कीमतों के खिलाफ अपना आक्रोश जता रहे हैं। पूरे महाद्वीप में आर्थिक दबाव और जीवन यापन के बढ़ते खर्च के कारण सामाजिक असंतोष तेजी से पैर पसार रहा है, जिससे कई सरकारों के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।



















