अश्लेषा नक्षत्र में गुरु का प्रवेश 19 अगस्त से, 31 अक्टूबर तक इन 4 राशियों को होगा जबरदस्त आर्थिक फायदाक्या पाकिस्तान में भी जेनरेशन जेड ला सकती है राजनीतिक बदलाव? शशि थरूर ने उठाया सवालकेंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण को जन्मदिन पर अमित शाह ने दी बधाई, आर्थिक प्रगति में योगदान को सराहानिर्मला सीतारमण के जन्मदिन पर विदेश मंत्री एस जयशंकर और प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाईमूलांक 8 राशिफल 18 अगस्त 2026: एक साथ आएंगे कई काम, जल्दबाजी में फैसला लेने से बचेंमूलांक 9 राशिफल 18 अगस्त 2026: रुके काम होंगे शुरू, करियर में मिल सकती है नई ज़िम्मेदारी20 अगस्त को रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेंगे शनि, चंद्र ग्रहण से पहले इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मतलाइव: झारखंड परीक्षा विरोध: हेमंत सोरेन सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा की रद्द; देवेंद्र महतो का 16 दिन का अनशन समाप्तमूलांक 7 राशिफल 18 अगस्त 2026: जल्दबाजी से बचें, वित्तीय लेनदेन और रिश्तों में बरतें विशेष सावधानीमूलांक 4 राशिफल 18 अगस्त 2026: राहु के प्रभाव और संवाद की समझदारी से कैसे संवरेगा दिन
एथेनॉल वाले E20 पेट्रोल पर अफवाहों की भरमार, सरकार ने एक-एक दावे का दिया जवाबऑटो
4 जुल॰ 2026, 10:04 am (45 दिन पहले)· 4

एथेनॉल वाले E20 पेट्रोल पर अफवाहों की भरमार, सरकार ने एक-एक दावे का दिया जवाब

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 10 बिंदुओं में साफ किया कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिले पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रहे दावे गलत हैं और यह कार्यक्रम वैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित है।

पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के देश के E20 कार्यक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर जो तरह-तरह की बातें घूम रही हैं, सरकार ने शुक्रवार को उन पर विराम लगाने की कोशिश की। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ कहा कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिले पेट्रोल के बारे में जो जानकारियां वायरल हो रही हैं, वे पूरी तरह भ्रामक हैं। मंत्रालय ने 10 बिंदुओं में एक-एक करके इन आशंकाओं का जवाब दिया और बताया कि यह पूरा कार्यक्रम वैज्ञानिक अध्ययन, दुनिया भर के अनुभव और नियामकीय सुरक्षा उपायों की बुनियाद पर खड़ा है। इस योजना के तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जाता है।

पानी की खपत वाला दावा कितना सही

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की थी कि 1 लीटर एथेनॉल बनाने में कथित तौर पर 10,000 लीटर पानी लग जाता है। मंत्रालय ने इसे सिरे से खारिज किया। सरकार का कहना है कि एथेनॉल बनाने के लिए सिर्फ वही अतिरिक्त चावल इस्तेमाल होता है, जो देश की खाद्य सुरक्षा की जरूरतें पूरी करने के बाद बच जाता है। असल में प्रति लीटर एथेनॉल के उत्पादन में महज करीब 3 से 5 लीटर प्रसंस्कृत पानी ही खर्च होता है, और अब 'जीरो लिक्विड डिस्चार्ज' सिस्टम के जरिए इस पानी को दोबारा इस्तेमाल में लाया जाता है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि अब एथेनॉल बनाने में कच्चे माल के तौर पर मक्का का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। मक्का की खेती में धान के मुकाबले काफी कम पानी लगता है, इसलिए इसे बढ़ावा भी दिया जा रहा है।

ये भी पढ़ें

कारों और दोपहिया पर हुए लंबे ट्रायल

गाड़ियों पर असर के सवाल पर सरकार ने आंकड़े रखे। भारतीय वाहन अनुसंधान संघ (ARAI) ने कारों पर करीब 40,000 किलोमीटर और दोपहिया वाहनों पर 20,000 किलोमीटर तक ट्रायल किए। इन परीक्षणों में गाड़ी के प्रदर्शन या ईंधन दक्षता पर कोई बड़ा नकारात्मक असर सामने नहीं आया। सिर्फ माइलेज में कुछ हद तक फर्क जरूर देखा गया।

दुनिया के कई देश पहले से कर रहे इस्तेमाल

मंत्रालय ने याद दिलाया कि एथेनॉल मिला ईंधन कोई नई चीज नहीं है। अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, जापान और यूरोप के कई देशों में यह लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा है। इंजन खराब होने या वारंटी खत्म हो जाने जैसे दावों को भी सरकार ने गलत बताया। मंत्रालय के मुताबिक, ऑटो कंपनियां और बीमा कंपनियां पहले ही साफ कर चुकी हैं कि E20 के लिए बनी गाड़ियों की वारंटी और बीमा दोनों वैध बने रहते हैं।

चींटी, मधुमक्खी और इंजन को नुकसान वाली अफवाहें

सोशल मीडिया पर यह भी वायरल हो रहा था कि E20 ईंधन की वजह से गाड़ियों की तरफ चींटियां और मधुमक्खियां खिंची चली आती हैं। मंत्रालय ने इस दावे को भी बेबुनियाद करार दिया। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि E20 कार्यक्रम को लेकर उच्चतम न्यायालय में जो चर्चा हुई थी, वह अनुबंध से जुड़े मामलों पर थी, न कि इस नीति की वैज्ञानिक उपयोगिता पर किसी सवाल को लेकर। इंजन खराब होने या गाड़ी के पुर्जों में जंग लगने के आरोपों पर सरकार ने बताया कि ARAI ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के साथ मिलकर इस पर अध्ययन किया है।

फ्यूल टैंक में पानी और गन्ने के रस वाला दावा

एक और आशंका यह जताई जा रही थी कि E20 से गाड़ियों के फ्यूल टैंक में पानी घुस सकता है। मंत्रालय ने इसे भी खारिज कर दिया। इसी तरह, पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाए जाने का दावा करने वाले वायरल वीडियो को भी मनगढ़ंत बताया गया। सरकार ने साफ किया कि ईंधन वाला एथेनॉल औद्योगिक प्रक्रियाओं के जरिए तैयार किया जाता है, न कि इस तरह से।

सवाल-जवाब

E20 पेट्रोल क्या है?
यह वह पेट्रोल है जिसमें 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जाता है। यह कार्यक्रम वैज्ञानिक अध्ययन और नियामकीय सुरक्षा उपायों पर आधारित है।
क्या सच में 1 लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी लगता है?
नहीं, सरकार ने इस दावे को खारिज किया है। असल में प्रति लीटर एथेनॉल बनाने में सिर्फ करीब 3 से 5 लीटर प्रसंस्कृत पानी खर्च होता है, जिसे रीसाइकल भी किया जाता है।
क्या E20 से गाड़ी का इंजन खराब होता है या वारंटी खत्म हो जाती है?
सरकार के मुताबिक ऐसा नहीं है। ऑटो और बीमा कंपनियां साफ कर चुकी हैं कि E20 के लिए बनी गाड़ियों की वारंटी और बीमा वैध रहते हैं।
ARAI ने कितने किलोमीटर तक ट्रायल किए?
ARAI ने कारों पर करीब 40,000 किलोमीटर और दोपहिया वाहनों पर 20,000 किलोमीटर तक ट्रायल किए, जिनमें प्रदर्शन पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं मिला।
क्या E20 ईंधन से चींटियां और मधुमक्खियां आकर्षित होती हैं?
नहीं, सरकार ने इस वायरल दावे को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है।
उच्चतम न्यायालय में E20 को लेकर क्या चर्चा हुई थी?
सरकार के मुताबिक वह चर्चा अनुबंध से जुड़े मामलों पर थी, न कि इस नीति की वैज्ञानिक उपयोगिता पर किसी सवाल को लेकर।
किन देशों में एथेनॉल मिला ईंधन इस्तेमाल होता है?
अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, जापान और यूरोप के कई देशों में यह लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR