देशभर में E20 पेट्रोल के बढ़ते इस्तेमाल के बीच वाहन मालिकों के मन में इंजन की परफॉर्मेंस, माइलेज में कमी और संभावित खराबी को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। कई वाहन चालकों को यह चिंता सता रही है कि यदि E20 ईंधन की वजह से उनकी गाड़ी में कोई समस्या आती है या उसका माइलेज अचानक गिर जाता है, तो उन्हें अपनी शिकायत किस मंच पर दर्ज करानी चाहिए। इस विषय पर गोवा विधानसभा के भीतर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि E20 ईंधन या पेट्रोल की गुणवत्ता से जुड़ी किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में वाहन मालिक सीधे नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
E20 पेट्रोल की शिकायत और नागरिक आपूर्ति विभाग की भूमिका
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, जिनके पास सिविल सप्लाई और कंज्यूमर अफेयर्स विभाग का प्रभार भी है, ने विधानसभा सत्र के दौरान सदन को इस व्यवस्था के बारे में सूचित किया। उन्होंने बताया कि अब तक राज्य के नागरिक आपूर्ति विभाग के पास E20 पेट्रोल की वजह से किसी गाड़ी के खराब होने या माइलेज घटने संबंधी कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, अभी तक किसी व्यक्तिगत वाहन मालिक, टैक्सी ड्राइवर, ऑटोमोबाइल एसोसिएशन या गैराज संचालक की तरफ से ऐसा कोई औपचारिक मामला सामने नहीं आया है।
हालांकि, आधिकारिक शिकायतें न मिलने का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि उपभोक्ता अपनी समस्याएं दर्ज नहीं करा सकते। प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि यदि किसी भी वाहन चालक को लगता है कि पेट्रोल की खराब गुणवत्ता या सप्लाई की कमी के कारण उसकी गाड़ी प्रभावित हुई है, तो वह बिना किसी झिझक के अपनी बात विभाग के सामने रख सकता है। शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक जांच प्रक्रिया शुरू करेंगे और ईंधन की गुणवत्ता का परीक्षण कराएंगे।
माइलेज में गिरावट, मिलावट और पेट्रोल पंपों की अनियमितता
ईंधन से जुड़ी शिकायत दर्ज कराने का दायरा केवल इंजन के पूरी तरह बंद पड़ने या खराब होने तक सीमित नहीं है। उपभोक्ता कई अन्य तरह की अनियमितताओं पर भी नागरिक आपूर्ति विभाग में मामला उठा सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी वाहन मालिक को पेट्रोल की शुद्धता पर संदेह होता है या ईंधन में मिलावट की आशंका महसूस होती है, तो इसकी तुरंत शिकायत की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, यदि कोई पेट्रोल पंप चालक तय मापदंडों से कम मात्रा में ईंधन देता है या निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलता है, तो ऐसे मामलों पर भी प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की जा सकती है।
यदि E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने के बाद किसी वाहन की ईंधन खपत अचानक बहुत बढ़ जाती है, इंजन की आवाज या पिकअप में असामान्य बदलाव अनुभव होता है या ड्राइविंग के दौरान कोई अन्य तकनीकी अड़चन आती है, तो उसकी पूरी जानकारी विभाग को दी जा सकती है। शिकायतों का निपटारा करने के उद्देश्य से विभाग पेट्रोल पंपों से ईंधन के आधिकारिक सैंपल एकत्र कर प्रयोगशाला में उनकी गुणवत्ता की गहन जांच करवा सकता है।
पुराने वाहनों पर E20 का प्रभाव और वारंटी पर स्थिति
विधानसभा चर्चा के दौरान विधायकों ने विशेष रूप से उन पुराने वाहनों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की, जो E20 ईंधन मानकों के अनुसार डिजाइन नहीं किए गए थे। सदन में पुराने वाहनों के मेंटेनेंस, इंजन की उम्र और माइलेज पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठाए गए। इन संशयों का समाधान करते हुए मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बताया कि जिन वाहनों को E10 पेट्रोल के हिसाब से तैयार किया गया था, उनमें E20 पेट्रोल का उपयोग करने पर माइलेज में लगभग 3 से 5 फीसदी तक की मामूली कमी दर्ज की जा सकती है।
इसके साथ ही सरकार ने वाहन मालिकों को बड़ी राहत देते हुए यह स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल के उपयोग से वाहनों की आधिकारिक वारंटी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसका सीधा तात्पर्य यह है कि यदि वाहन निर्माता या डीलरशिप E20 ईंधन का हवाला देकर वारंटी क्लेम खारिज करने का प्रयास करती है, तो उपभोक्ता अपनी गाड़ी की तकनीकी जांच करवाकर नागरिक आपूर्ति विभाग या उपभोक्ता मंच के समक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं।
नागरिक आपूर्ति विभाग में दर्ज कराई जा सकने वाली अन्य शिकायतें
सिविल सप्लाई और उपभोक्ता मामले विभाग केवल ईंधन की बिक्री तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों और बाजार की पारदर्शी व्यवस्था से जुड़े व्यापक अधिकारों की रक्षा करता है। इसमें राशन आपूर्ति, केरोसिन, एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी और पेट्रोल-डीजल की बिक्री जैसे दैनिक जीवन के मामले शामिल हैं। यदि कोई व्यापारी, दुकानदार या सेवा प्रदाता घटिया सामग्री बेचता है या उपभोक्ता को गुमराह करता है, तो विभाग के पास अनेक प्रकार की शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं।
उपभोक्ता अधिकारों के तहत निम्नलिखित परिस्थितियों में नागरिक आपूर्ति विभाग या उपभोक्ता मंच से संपर्क किया जा सकता है
- पुराना सामान नया बताकर बेचना: यदि कोई विक्रेता इस्तेमाल की जा चुकी सामग्री या रिफर्निश्ड उत्पाद को बिल्कुल नया बताकर किसी ग्राहक को बेच देता है।
- उत्पाद के मुख्य फीचर्स का काम न करना: किसी उपकरण या उत्पाद में दिए गए जरूरी फीचर्स का ठीक से काम न करना या पूरी तरह ठप होना।
- वारंटी सेवा देने से इंकार: वारंटी अवधि के भीतर खराब हुए सामान को ठीक करने से मना करना या वारंटी से जुड़ी शर्तों का पालन न करना।
- सर्विस सेंटर की लापरवाही: अधिकृत सर्विस सेंटर द्वारा खराबी को दूर न करना या मरम्मत के बाद भी उत्पाद का बार-बार खराब होना।
- रिफंड न देना: रद्द किए गए ऑर्डर का पैसा वापस न लौटाना या जमा की गई एडवांस एवं सिक्योरिटी राशि को रिफंड करने से इंकार करना।
- पैकेजिंग और गुणवत्ता पर भ्रामक जानकारी: उत्पाद के पैकेट पर अनिवार्य वैधानिक जानकारी न देना अथवा उसकी गुणवत्ता और मानकों के बारे में गलत दावे करना।
- ई-कॉमर्स और ऑनलाइन ऑर्डर में धोखाधड़ी: ऑनलाइन भुगतान के बाद सामान न भेजना, भुगतान पूरा होने के बाद मनमाने ढंग से ऑर्डर रद्द कर देना या वेबसाइट पर दिखाई गई वस्तु के स्थान पर कोई अलग उत्पाद डिलीवर करना।
- फर्जी ऑफर और फर्जी रेटिंग्स: भ्रामक डिस्काउंट ऑफर दिखाकर ग्राहकों को लुभाना अथवा नकली रिव्यू और रेटिंग्स के जरिए उत्पाद की बिक्री बढ़ाना।
- वित्तीय और डिजिटल सेवाएं: DTH सेवा बंद होने पर रिफंड न मिलना, ATM से नकदी न निकलने पर भी बैंक खाते से राशि कट जाना, तथा UPI ट्रांजैक्शन फेल होने के बाद कटे हुए पैसे वापस न आना।
- बीमा और लोन से जुड़ी गड़बड़ियां: लोन प्रोसेसिंग फीस या अन्य छिपाए गए शुल्कों की गलत जानकारी देना, बीमा क्लेम को अनुचित आधार पर खारिज करना, पॉलिसी की शर्तों को छिपाना अथवा पॉलिसी रद्द करने पर रिफंड में अड़चनें डालना।
- एमआरपी से अधिक वसूली: रेस्तरां, होटल या अन्य दुकानों पर पैकेज्ड वस्तुओं के लिए निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से ज्यादा पैसे वसूलना।



















