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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की सरकारी कर्मचारी की याचिका, चौथे बच्चे के लिए मैटरनिटी लीव देने से इनकारबेनिफिट्स
12 अग॰ 2026, 8:52 pm (32 दिन पहले)· 2

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की सरकारी कर्मचारी की याचिका, चौथे बच्चे के लिए मैटरनिटी लीव देने से इनकार

संभल में तैनात एक महिला शिक्षक की याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार दो से अधिक जीवित बच्चे होने पर चौथे बच्चे के जन्म के लिए मैटरनिटी लीव का लाभ नहीं दिया जा सकता।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की एक सरकारी कर्मचारी द्वारा चौथे बच्चे के जन्म पर 6 महीने की मैटरनिटी लीव (मातृत्व अवकाश) मांगे जाने की याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अदालत ने राज्य सरकार के तर्कों को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि मौजूदा सेवा नियमों के तहत दो से अधिक जीवित संतान होने की स्थिति में अगली डिलीवरी के लिए मातृत्व अवकाश का प्रावधान लागू नहीं होता।

संभल के प्रखंड शिक्षा अधिकारी के आदेश को दी गई थी चुनौती

यह पूरा मामला संभल (भीम नगर) जिले में कार्यरत महिला कर्मचारी शशि कुमारी से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता ने संभल के प्रखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा 19 जून, 2026 को जारी उस प्रशासनिक आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके जरिए उनके 6 महीने के मैटरनिटी लीव के आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया था। शशि कुमारी ने अदालत से गुहार लगाई थी कि संबंधित अधिकारी को उन्हें 180 दिनों का सवैतनिक अवकाश देने का स्पष्ट निर्देश जारी किया जाए।

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याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने तर्क दिया था कि उनकी मुवक्किल ने अपने पहले तीन बच्चों के जन्म के समय कभी भी मातृत्व अवकाश का लाभ नहीं उठाया था। वकील का कहना था कि चूंकि कर्मचारी अपने सेवाकाल में पहली बार इस अवकाश के लिए आवेदन कर रही हैं, इसलिए चौथे बच्चे के जन्म के आधार पर भी उन्हें 6 महीने की मैटरनिटी लीव दी जानी चाहिए।

राज्य सरकार का रुख और हाईकोर्ट की टिप्पणी

हालांकि, सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने इस याचिका का कड़ा विरोध किया। सरकारी वकील ने कोर्ट के सामने तथ्य रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पूर्व में भी मैटरनिटी लीव का लाभ प्राप्त कर चुकी हैं। इसके साथ ही सेवा नियमावली का हवाला देते हुए सरकारी पक्ष ने स्पष्ट किया कि दो या उससे अधिक जीवित बच्चे होने के बाद किसी भी अगली डिलीवरी के लिए मातृत्व अवकाश की पात्रता समाप्त हो जाती है। नियमों के अनुसार चौथे बच्चे के लिए ऐसा कोई अवकाश स्वीकृत नहीं किया जा सकता, इसलिए याचिका खारिज किए जाने योग्य है।

मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस मंजू रानी चौहान ने 7 अगस्त, 2026 को इस संबंध में अपना फैसला सुनाया। अदालत ने राज्य सरकार के वकील द्वारा प्रस्तुत कानूनी स्थिति और बयानों को रिकॉर्ड पर दर्ज करते हुए कहा कि नियमानुसार याचिकाकर्ता चौथे बच्चे के लिए किसी भी प्रकार के मातृत्व अवकाश की हकदार नहीं हैं। ऐसे में अदालत द्वारा इस प्रशासनिक निर्णय में किसी भी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है, और याचिका को निरस्त कर दिया गया।

सरकारी कर्मचारियों के लिए मैटरनिटी लीव के क्या हैं नियम?

उत्तर प्रदेश सरकारी सेवा नियमों के तहत महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश से जुड़े स्पष्ट दिशानिर्देश तय किए गए हैं। सामान्य प्रावधानों के अनुसार, पात्र महिला कर्मचारी को पूरी सेवा अवधि के दौरान 180 दिन यानी लगभग 6 महीने का मैटरनिटी लीव मिलता है। अवकाश की इस अवधि के दौरान कर्मचारी को उनकी नियमित लीव सैलरी (वेतन के बराबर राशि) प्रदान की जाती है।

हालांकि, यह मुख्य सुविधा केवल उन्हीं महिला कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है जिनके जीवित बच्चों की संख्या दो से कम है। यदि किसी महिला कर्मचारी के पहले से दो या उससे अधिक जीवित बच्चे हैं, तो अगली डिलीवरी के लिए सामान्य 180 दिनों के मैटरनिटी लीव का नियम लागू नहीं होता।

इसके अलावा, नियमों में गर्भपात या मिसकैरेज की स्थिति के लिए एक अलग विशेष प्रावधान किया गया है। यदि किसी महिला कर्मचारी का गर्भपात होता है, तो जीवित बच्चों की संख्या चाहे जितनी भी हो, उसे अपने पूरे सेवाकाल में अधिकतम 45 दिनों तक का मैटरनिटी लीव प्राप्त करने का अधिकार है।

गोद लेने वाली माताओं से जुड़ा सुप्रीम कोर्ट का फैसला

मातृत्व अवकाश से जुड़े नियमों के संदर्भ में इसी वर्ष मार्च 2026 में देश की शीर्ष अदालत का एक महत्वपूर्ण फैसला भी सामने आया था। सुप्रीम कोर्ट ने बच्चा गोद लेने वाली महिला कर्मचारियों के हक में ऐतिहासिक निर्णय देते हुए व्यवस्था दी थी कि किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिलाओं को 12 हफ्ते (3 महीने) तक का मैटरनिटी लीव दिया जाएगा।

सवाल-जवाब

क्या चौथे बच्चे के जन्म पर सरकारी कर्मचारी को मैटरनिटी लीव मिल सकती है?
हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार, दो से अधिक जीवित संतान होने की स्थिति में चौथे बच्चे के जन्म पर सामान्य सवैतनिक मैटरनिटी लीव का लाभ नहीं दिया जा सकता।
उत्तर प्रदेश में महिला कर्मचारियों को कितने दिनों का मैटरनिटी लीव मिलता है?
दो से कम जीवित बच्चे होने पर पात्र महिला कर्मचारियों को 180 दिन यानी लगभग 6 महीने का सवैतनिक मातृत्व अवकाश मिलता है।
यदि महिला कर्मचारी ने पहले अवकाश न लिया हो, तो क्या चौथे बच्चे पर अवकाश मिलेगा?
नहीं, अदालत ने स्पष्ट किया कि सेवा नियम जीवित बच्चों की कुल संख्या पर निर्भर करते हैं, न कि इस बात पर कि पहले अवकाश लिया गया था या नहीं।
मिसकैरेज या गर्भपात होने पर मैटरनिटी लीव के क्या नियम हैं?
गर्भपात की स्थिति में जीवित बच्चों की संख्या चाहे जितनी हो, पूरी सेवा अवधि में अधिकतम 45 दिनों की मैटरनिटी लीव का प्रावधान है।
बच्चा गोद लेने वाली माताओं के लिए सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला है?
सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2026 के निर्णय के अनुसार, किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिला कर्मचारियों को 12 सप्ताह का मैटरनिटी लीव मिलता है।
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