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भोजपुरी सिनेमा में सिंगर्स के दबदबे के बीच रवि किशन के शुरुआती संघर्ष पर मनोज तिवारी का खुलासाभोजपुरी
29 अक्तू॰ 2026, 6:20 am (2 मिनट पहले)· 1

भोजपुरी सिनेमा में सिंगर्स के दबदबे के बीच रवि किशन के शुरुआती संघर्ष पर मनोज तिवारी का खुलासा

मनोज तिवारी ने भोजपुरी सिनेमा के शुरुआती दौर को याद करते हुए बताया कि कैसे गायकी से आए सितारों के बीच रवि किशन ने अपनी अभिनय क्षमता और ओटीटी के जरिए पहचान बनाई।

भोजपुरी फिल्म जगत के जाने-माने अभिनेता और सांसद मनोज तिवारी ने इंडस्ट्री के पुराने दिनों को याद करते हुए कई रोचक संस्मरण साझा किए हैं। उन्होंने विस्तार से चर्चा की कि किस तरह उनके दौर में अभिनेताओं की फीस तय होती थी और किस प्रकार गायकी के रास्ते आने वाले कलाकारों का फिल्मों में दबदबा कायम हुआ। इस बातचीत के दौरान उन्होंने साथी सांसद और अभिनेता रवि किशन के शुरुआती करियर, दिनेश लाल यादव निरहुआ के उभार, तथा पवन सिंह और खेसारी लाल यादव की लोकप्रियता पर खुलकर अपनी राय रखी।

शुरुआती दौर की फीस और इंडस्ट्री का समीकरण

मनोज तिवारी ने अपने करियर के उस दौर को रेखांकित किया जब उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में कदम रखा था। उन्होंने बताया कि रवि किशन उनसे पहले ही इंडस्ट्री में सक्रिय हो चुके थे और उनके आने से पूर्व दो से तीन फिल्में कर चुके थे। उस समय फीस के ढांचे में जमीन-आसमान का फर्क देखने को मिलता था।

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तिवारी के अनुसार, जब वह एक फिल्म के लिए 30 लाख रुपये का पारिश्रमिक लेते थे, उस वक्त रवि किशन 5 लाख रुपये मांगने में भी झिझक महसूस करते थे। उन्होंने एक खास घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि रवि किशन की एक पूरी फिल्म का बजट पारिश्रमिक महज 25 हजार रुपये था, जबकि उसी फिल्म में केवल एक आइटम गीत करने के लिए मनोज तिवारी को डेढ़ लाख रुपये का भुगतान किया गया था। इस तुलना से उस दौर में गायकी की पृष्ठभूमि वाले कलाकारों की व्यावसायिक मांग का साफ पता चलता है।

ससुरा बड़ा पैसावाला और नए सितारों का आगमन

मनोज तिवारी ने बताया कि फिल्म 'ससुरा बड़ा पैसावाला' की जबरदस्त सफलता के बाद वह अचानक स्टारडम की ऊंचाइयों पर पहुंच गए थे। हालांकि, उनके बाद इंडस्ट्री में वास्तविक चुनौती और दूसरा बड़ा स्टारडम दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' के रूप में सामने आया। निरहुआ ग्रामीण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते थे और जमीन से जुड़े हुए कलाकार थे।

निरहुआ के संगीत सफर की चर्चा करते हुए तिवारी ने कहा कि उनका एक खास गाना 'निरहुआ सटल रहे' बहुत बड़ा हिट साबित हुआ था। निरहुआ बिरहा गायकी की परंपरा से आए थे और उनकी शैली में विशुद्ध देहाती अंदाज झलकता था। तिवारी ने यह भी जोड़ा कि वह खुद तुलनात्मक रूप से अधिक औपचारिक शिक्षा के साथ आए थे, जबकि निरहुआ का अंदाज ठेठ देहाती था जिसने आम जनता के दिलों को छू लिया। निरहुआ के बाद संगीत और फिल्मों के इस संयुक्त मंच पर पवन सिंह का प्रवेश हुआ, जिनकी सुरीली गायकी ने उन्हें दिनेश लाल यादव के बाद सबसे बड़ा स्टारडम दिलाया। लगभग उसी समय खेसारी लाल यादव भी सक्रिय हुए, जिसके चलते पवन और खेसारी दोनों का आगमन काल समकालीन माना जाता है।

सिंगर्स की भीड़ में अभिनेता के रूप में रवि किशन की राह

मनोज तिवारी ने स्वीकार किया कि भोजपुरी इंडस्ट्री में कलाकारों के स्थापित होने का जो ढांचा था, उसमें रवि किशन की स्थिति को लेकर उन्हें काफी चिंता रहती थी। इंडस्ट्री का चलन यह बन चुका था कि पहले गायक के तौर पर बड़ा नाम बनाया जाता था और उसके बाद फिल्मों में बतौर मुख्य नायक प्रवेश मिलता था।

मनोज तिवारी, दिनेश लाल यादव, पवन सिंह और खेसारी लाल यादव, ये सभी पहले संगीत की दुनिया के दिग्गज बने और फिर अभिनय की तरफ मुड़े। इसके विपरीत, रवि किशन विशुद्ध रूप से एक अभिनेता थे और सभी कलाकारों में से उनका अभिनय कौशल सबसे उम्दा था। तिवारी के मुताबिक, उस समय भोजपुरी सिनेमा के ढांचे में बिना गायकी के स्टारडम वाले अभिनेता के टिकने का स्कोप बेहद सीमित था। लेकिन रवि किशन ने जिस लगन और निरंतरता से खुद को ढाला, वह काबिले तारीफ रहा। आगे चलकर जब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और वेब सीरीज का जमाना शुरू हुआ, तब रवि किशन के भीतर छिपे सशक्त अभिनेता को खुलकर अपनी प्रतिभा दिखाने का उचित मंच मिला।

अवसरों की कमी और सिनेमा की धारा

मनोज तिवारी ने इस बात पर भी जोर दिया कि उस दौर के भोजपुरी सिनेमा में मुख्यधारा के साधन, बेहतर निर्देशक और आधुनिक सुविधाओं का भारी अभाव था। कलाकारों को विपरीत परिस्थितियों और धारा के खिलाफ जाकर काम करना पड़ता था। उनका मानना है कि यदि उस वक्त उन सभी को वैसे निर्देशक और अवसर मिले होते जैसे आज रवि किशन को मिल रहे हैं, तो परिस्थितियां बिल्कुल भिन्न हो सकती थीं।

इंडस्ट्री में अपने और रवि किशन के संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों के बीच अक्सर एक पेशेवर मुकाबला या प्रतिद्वंद्विता देखी जाती रही है। उनका मानना है कि वास्तविक टकराव या खींचतान हमेशा बराबरी के स्तर पर ही होती है। इसके विपरीत, दिनेश लाल यादव निरहुआ हमेशा एक छोटे भाई के आदर भाव के साथ आए, इसलिए उन्हें तुरंत अपना लिया गया। रवि किशन के साथ संबंध अब भी सतर्कता और सहज दूरी वाले बने हुए हैं, हालांकि अब वे दोनों संसद सदस्य हैं। तिवारी ने रवि किशन के सांसद के रूप में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे जमीन पर अपनी मजबूत पकड़ बना रहे हैं।

निरहुआ की विनम्रता और पवन सिंह का कद

दिनेश लाल यादव के योगदान की चर्चा करते हुए मनोज तिवारी ने उन्हें 'जुबली स्टार' बताया। उन्होंने कहा कि निरहुआ ने जबरदस्त स्टारडम हासिल करने के बावजूद अपनी विनम्रता और सादगी को कभी नहीं खोया। सिनेमा में जब कई नए कलाकारों को आर्थिक तंगी और अभिनय के मौकों की दिक्कत होती थी, तब निरहुआ ने आगे आकर ऐसे कलाकारों को भरपूर समर्थन दिया।

मनोज तिवारी ने वर्तमान दौर के परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज का समय पवन सिंह का है। उन पर दैवीय कृपा बनी हुई है और वे वर्तमान समय में एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। इस प्रकार भोजपुरी सिनेमा ने गायकी और अभिनय के अनोखे मेल के साथ कई उतार-चढ़ाव देखे हैं।

सवाल-जवाब

शुरुआती दिनों में मनोज तिवारी और रवि किशन की फीस में क्या अंतर था?
मनोज तिवारी जहां एक फिल्म के 30 लाख रुपये लेते थे, वहीं रवि किशन 5 लाख रुपये मांगने में भी झिझकते थे। तिवारी को रवि की एक फिल्म में केवल आइटम सॉन्ग के लिए डेढ़ लाख रुपये मिले थे, जबकि रवि किशन को पूरी फिल्म के 25 हजार रुपये मिले थे।
मनोज तिवारी के अनुसार भोजपुरी सिनेमा में पहला बड़ा मुकाबला किस कलाकार से मिला?
मनोज तिवारी ने बताया कि फिल्म 'ससुरा बड़ा पैसावाला' के बाद उनके सामने दिनेश लाल यादव निरहुआ पहले ऐसे कलाकार थे, जिन्होंने सुपरस्टार के तौर पर उभरकर वास्तविक चुनौती पेश की।
रवि किशन को इंडस्ट्री में स्थापित होने में क्या चुनौती थी?
भोजपुरी इंडस्ट्री में उस समय मुख्य कलाकार पहले गायक के तौर पर स्टार बनते थे और फिर अभिनय में आते थे, जबकि रवि किशन केवल अभिनेता थे और गाते नहीं थे।
रवि किशन के अभिनय को व्यापक पहचान कब और कैसे मिली?
मनोज तिवारी के अनुसार, जब वेब सीरीज और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का दौर शुरू हुआ, तब रवि किशन के भीतर के बेहतरीन अभिनेता को सही मंच मिला और उनकी प्रतिभा खुलकर सामने आई।
मनोज तिवारी ने दिनेश लाल यादव निरहुआ के स्वभाव के बारे में क्या कहा?
तिवारी ने निरहुआ को अत्यंत विनम्र, सरल और जुबली स्टार बताया, जिन्होंने फिल्म उद्योग में आर्थिक तंगी से जूझ रहे कई कलाकारों को आगे बढ़ाने में मदद की।
पवन सिंह के वर्तमान स्टारडम पर मनोज तिवारी की क्या राय है?
मनोज तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय पवन सिंह का है, उन पर भगवती की विशेष कृपा है और वे इस समय एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के सितारे बन चुके हैं।
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