पूर्वोत्तर सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा के अलग-अलग संवेदनशील हिस्सों में भारतीय सुरक्षा कर्मियों और चीनी सैनिकों के बीच तनातनी जारी है। दोनों पक्षों की टुकड़ियों के बीच यह गतिरोध जुलाई के महीने से ही समय-समय पर सामने आता रहा है, जिससे स्पष्ट है कि इस पर्वतीय सीमा क्षेत्र में स्थिति अब भी सामान्य नहीं हो सकी है।
सीमा पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी और भारतीय जवाबी मोर्चाबंदी
गुरुवार को आयोजित हिमवीर सम्मान समारोह के दौरान भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने सीमावर्ती हालातों का विवरण साझा किया। उन्होंने जानकारी दी कि हाल के दिनों में कई अलग-अलग मोर्चों पर दोनों देशों के जवान एकदम करीब आ गए थे।
“पिछले कुछ दिनों में ऐसी स्थिति बनी जहां कई स्थानों पर सैनिकों का आमना-सामना हुआ, और यह अब भी बना हुआ है।”
विवादित सीमावर्ती हिस्सों में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के नए जमावड़े सामने आए हैं। अग्रिम इलाकों में चीनी सुरक्षा बलों ने भारत द्वारा मानी जाने वाली एलएसी की सीमा से लगभग 6 से 7 किलोमीटर की दूरी पर अपने तंबू लगाए हैं। यह गतिविधियां विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश के असापफिला और ताकसिंग के नजदीकी क्षेत्रों में दर्ज की गई हैं।
चीनी पक्ष द्वारा की जा रही इस हलचल को रोकने और अपनी सामरिक स्थिति को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए भारतीय सुरक्षा बलों ने भी तत्काल जवाबी तैनाती की है। इस मजबूत कदम का मुख्य मकसद सीमा पर किसी भी प्रकार के अनधिकृत विस्तार या घुसपैठ को रोकना है।
शौर्य कमांडो की भूमिका और आधुनिक ड्रोन तकनीक पर जोर
सीमा की सुरक्षा में जुटे विशेष दस्तों की सराहना करते हुए आईटीबीपी प्रमुख ने नए गठित शौर्य कमांडो के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आईटीबीपी की स्थापना मूल रूप से एक पर्वतीय छापामार बल के रूप में की गई थी, जिसे बाद में वर्ष 2004 में चीन सीमा की निगरानी का कार्य सौंपा गया था।
कपूर के अनुसार, बल अपनी मूल विशेषज्ञता पर कायम रहते हुए थलसेना से अलग एक अत्यंत विशिष्ट उच्च पर्वतीय युद्धक टुकड़ी विकसित कर रहा है। जल्द ही इस विशेष बल में शौर्य कमांडो की पूरी एक बटालियन तैयार हो जाएगी, जिससे अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों में सुरक्षा और मजबूत होगी।
इसके अलावा, आईटीबीपी प्रमुख ने आधुनिक सैन्य टकरावों में मानव रहित विमानों यानी ड्रोन के बढ़ते प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने चीन द्वारा अपनी सेना के आधुनिकीकरण पर किए जा रहे बड़े खर्च की ओर इशारा करते हुए कहा कि ड्रोन तकनीक छोटे देशों को भी बड़ी सैन्य शक्तियों के सामने मजबूती से खड़े होने का अवसर देती है। उन्होंने इसके उदाहरण के रूप में रूस-यूक्रेन तथा ईरान-अमेरिका के बीच के तनावों का हवाला दिया।
पूर्व में हुई सैन्य वार्ता और कूटनीतिक प्रयास
अरुणाचल प्रदेश के ताकसिंग इलाके में उपजे तनाव के बीच दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने स्थिति को सुलझाने की कोशिशें भी की थीं। इसी संदर्भ में 6 सितंबर को भारतीय सीमा के भीतर वाचा-दामई सीमा बैठक बिंदु पर कोर कमांडर स्तर की द्विपक्षीय बातचीत संपन्न हुई थी। उस वार्ता का मुख्य उद्देश्य एलएसी पर बने गतिरोध को समाप्त करना था, हालांकि सीमा पर जवानों का आमना-सामना अब भी बना हुआ है।
























