राजधानी में महंगाई से राहत दिलाने आदर्श नगर स्टेशन पहुंची 800 टन प्याज, ₹35 किलो में बेचने की तैयारीचरखी दादरी में रिश्तेदारों को फंसाने के लिए पिता ने रची 14 वर्षीय बेटे के अपहरण की झूठी साजिश, कमरे में छिपा मिला अंशदौसा में एक्सप्रेसवे किनारे खड़े सायल मीणा और महेंद्र मीणा की अज्ञात ट्रक की टक्कर से दर्दनाक मौतडिजिटल करेंसी बाजार में तेजी का नया दौर: 80,000 डॉलर के पार निकला बिटकॉइन, इथेरियम और रिपल में भी उछाल से निवेशक गदगदजयपुर में पानी भरे गड्ढे में डूबे दो मासूम भाई-बहन, पानी की सतह पर तैरती चप्पलों से पिता को लगा पतागर्दन की झुर्रियां और टेक नेक दूर करेंगी 5 आसान फेशियल एक्सरसाइज, 10वें दिन दिखेगा स्किन में कसावजमशेदपुर के फूड लवर्स को भा रहा घी और पोड़ी मसालेदार बेने डोसा, सफेद मक्खन से बढ़ता है जायकाबुरहानपुर के विशेषज्ञ योगेश ने बताया 500 रुपये में घर की छत पर पालक और मेथी उगाने का आसान तरीकाचित्तौड़गढ़ के ओछड़ी गांव में अनोखा रक्षा बंधन, पुरुष एक-दूसरे को राखी बांधकर देते हैं सुरक्षा का वचनमूलांक 7 राशिफल 28 अगस्त 2026: धैर्य और शांति से बनेंगे बिगड़े काम, जल्दबाजी लाएगी नुकसान
बच्चों की क्लास तक पहुंचा 35 साल पुराना सिनेमा हॉल, जहानाबाद का शिव शंकर टॉकीज अब कोचिंग सेंटरबिहार
13 जुल॰ 2026, 12:55 am (46 दिन पहले)· 5

बच्चों की क्लास तक पहुंचा 35 साल पुराना सिनेमा हॉल, जहानाबाद का शिव शंकर टॉकीज अब कोचिंग सेंटर

जहानाबाद के ऊंटा मोड़ स्थित करीब 35 साल पुराना शिव शंकर सिनेमा हॉल 5 साल पहले बंद हो गया, अब इसकी इमारत में कई कोचिंग इंस्टीट्यूट चल रहे हैं जहां सैकड़ों बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।

मनोरंजन का तरीका बीते कुछ सालों में पूरी तरह बदल चुका है। पहले किसी फिल्म को देखने के लिए सिनेमा हॉल की टिकट खिड़की पर घंटों लंबी कतार में खड़ा होना पड़ता था, हर शुक्रवार नई फिल्म रिलीज़ होने का बेसब्री से इंतजार रहता था। लेकिन अब ओटीटी प्लेटफॉर्म, मल्टीप्लेक्स की ऑनलाइन बुकिंग और घर के प्रोजेक्टर टेलीविजन ने यह पूरा अनुभव ही घर बैठे संभव बना दिया है। इसी बदलाव की मार बिहार के जहानाबाद जिले के पुराने सिनेमा हॉलों पर भी पड़ी है, जहां कभी दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ा करती थी।

डिजिटल दौर में अब लोग एक क्लिक में पुरानी से पुरानी और नई से नई फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर देख लेते हैं, मल्टीप्लेक्स की टिकट भी घर बैठे बुक हो जाती है और प्रोजेक्टर या स्मार्ट टीवी की मदद से बड़े परदे जैसा मजा भी घर के अंदर ही मिल जाता है। इसी सहूलियत ने पुराने सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉलों की जरूरत को काफी हद तक कम कर दिया है। नतीजा यह हुआ कि देश भर के कई शहरों की तरह जहानाबाद के पुराने हॉल भी या तो पूरी तरह बंद हो गए या फिर उन्हें किसी और मकसद के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा।

ये भी पढ़ें

35 साल पुराना शिव शंकर सिनेमा हॉल अब बंद

जहानाबाद शहर के ऊंटा मोड़ के पास स्थित शिव शंकर सिनेमा हॉल करीब 35 साल पुराना है। एक दौर था जब इस हॉल के बाहर हर शुक्रवार नई फिल्म देखने वालों की लंबी कतार लगती थी और एक्शन फिल्मों के गानों का हर शहरवासी को बेसब्री से इंतजार रहता था। लेकिन बदलते वक्त के साथ यह हॉल भी बाकी पुराने सिनेमाघरों की तरह अपनी चमक खो बैठा और करीब 5 साल पहले पूरी तरह बंद हो गया।

प्रभात सिनेमा को टक्कर देकर बना शहर का सबसे बढ़िया हॉल

स्थानीय लोगों के मुताबिक, जहानाबाद में शिव शंकर सिनेमा हॉल शहर का सबसे बढ़िया सिनेमाघर माना जाता था। इसका सीधा मुकाबला अंबेडकर चौक स्थित तिलोत्तमा हॉल से रहता था, और नई फिल्म देखने के लिए दर्शक करीब 30 किलोमीटर दूर से भी यहां पहुंचते थे। दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले जिले में प्रभात सिनेमा को सबसे अच्छा हॉल माना जाता था, लेकिन जब शिव शंकर चित्र मंदिर खुला तो उसने धीरे धीरे प्रभात सिनेमा की जगह ले ली और खुद शहर का सबसे पसंदीदा हॉल बन गया। उस दौर में शहर के लोग सिनेमा हॉल की चर्चा से रोमांचित रहते थे और नई फिल्म की रिलीज़ को त्योहार की तरह मनाया जाता था।

अब हॉल में गूंजती है बच्चों की पढ़ाई

आज शिव शंकर सिनेमा हॉल की इमारत में फिल्मों की जगह किताबों की पढ़ाई हो रही है। इस परिसर में कई कोचिंग इंस्टीट्यूट चल रहे हैं, जहां सैकड़ों बच्चे रोजाना पढ़ाई करने पहुंचते हैं। यानी जिस जगह कभी परदे पर हीरो हीरोइन की एंट्री पर सीटियां बजती थीं, वहां अब बच्चे किताबें खोलकर बैठे नजर आते हैं। बदलते दौर में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता ने भी इस बदलाव को बढ़ावा दिया है, क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थानों की मांग लगातार बढ़ रही है।

सिनेमा के शौकीनों को अब पटना और गया का रुख

शिव शंकर चित्र मंदिर बंद होने के बाद जहानाबाद के लोगों को फिल्म देखने के लिए पटना या गयाजी जाना पड़ रहा है। दरअसल, शहर में एक भी मल्टीप्लेक्स सिनेमा हॉल नहीं बचा है, इसलिए डॉल्बी साउंड में मूवी देखने का शौक रखने वाले लोग पटना तक का सफर तय करते हैं। यह बदलाव सिर्फ जहानाबाद तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों में पुराने सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों के बंद होने और उनकी जगह कोचिंग सेंटर, दुकानों या अन्य कारोबार के खुलने का यह एक बड़ा उदाहरण है, जो बदलते दौर की तस्वीर साफ दिखाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिनेमा हॉल के दिनों की यादें आज भी उनके जेहन में ताजा हैं, लेकिन वक्त के साथ आया यह बदलाव अब जहानाबाद की पहचान का हिस्सा बन चुका है।

सवाल-जवाब

शिव शंकर सिनेमा हॉल कहां स्थित है?
यह जहानाबाद शहर के ऊंटा मोड़ के पास स्थित है।
यह सिनेमा हॉल कब बंद हुआ था?
यह करीब 5 साल पहले पूरी तरह बंद हो गया था।
शिव शंकर सिनेमा हॉल कितना पुराना है?
यह करीब 35 साल पुराना सिनेमा हॉल है।
अब इस हॉल की इमारत का इस्तेमाल किस लिए हो रहा है?
अब यहां कई कोचिंग इंस्टीट्यूट चल रहे हैं, जहां सैकड़ों बच्चे रोजाना पढ़ाई करने आते हैं।
जहानाबाद में फिल्म देखने के शौकीनों को अब कहां जाना पड़ता है?
शहर में मल्टीप्लेक्स न होने के कारण उन्हें अब पटना या गयाजी जाना पड़ता है।
शिव शंकर सिनेमा हॉल का शहर में किससे मुकाबला रहता था?
इसका सीधा मुकाबला अंबेडकर चौक स्थित तिलोत्तमा हॉल से रहता था, और इससे पहले प्रभात सिनेमा को जिले का सबसे अच्छा हॉल माना जाता था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR