भोजपुर जिले के शाहपुर थाना अंतर्गत बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को हुए कथित पुलिस एनकाउंटर में जान गंवाने वाले भरत तिवारी के मामले की न्यायिक जांच प्रक्रिया में तेजी आ गई है। इस गंभीर प्रकरण की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग के समक्ष शनिवार को मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी और पिता काशीनाथ तिवारी ने उपस्थित होकर अपना औपचारिक बयान दर्ज कराया। आयोग के सामने अपना पक्ष रखते हुए उन्होंने इस पूरी घटना के दौरान पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की पुरजोर मांग की।
माता-पिता का भावुक बयान और सुरक्षा की मांग
आयोग के सामने बयान दर्ज कराते समय भरत तिवारी के माता-पिता का दर्द छलक पड़ा। अपनी बात रखते हुए मां आशा देवी अत्यंत भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक आए। उन्होंने आयोग से अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया, क्योंकि उन्हें अब पुलिसिया कार्यवाही के बाद खुद के जीवन पर भी खतरा महसूस हो रहा है। वहीं पिता काशीनाथ तिवारी ने आयोग को घटनाक्रम के हर पहलू से विस्तार से अवगत कराया। परिवार का स्पष्ट कहना है कि उन्हें न्याय केवल तभी प्राप्त होगा जब उनके बेटे की जान लेने वाले पुलिसकर्मियों को कानून के तहत सख्त सजा दी जाएगी।
दोषियों के लिए फांसी की सजा का आग्रह
गवाही प्रक्रिया पूरी होने के उपरांत मीडिया से मुखातिब होते हुए परिजनों ने कहा कि उन्होंने पुलिस की क्रूरता का पूरा सच न्यायिक आयोग के सामने रख दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले में उन्हें केवल एक ही परिणाम स्वीकार्य है और वह है दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाना। अपनी सुरक्षा को लेकर जताई गई चिंता पर आयोग ने परिवार को आश्वस्त किया है कि उन्हें समुचित सुरक्षा प्रदान की जाएगी। परिवार अब इस उम्मीद में है कि न्यायिक जांच के माध्यम से उन्हें पूर्ण न्याय मिलेगा।
आयोग का समन और अगली सुनवाई की तैयारी
न्यायिक जांच आयोग ने पहले ही पीड़ित परिवार के सदस्यों को समन भेजकर उपस्थित होने का निर्देश दिया था। इस क्रम में शनिवार को चार लोगों को बुलाया गया था, जिनमें से फिलहाल माता-पिता ने ही अपनी गवाही दर्ज कराई है। आयोग ने शेष दो सदस्यों, यानी भरत तिवारी के भाई और भाभी को 13 जुलाई को उपस्थित होने का स्पष्ट निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान न्यायिक जांच आयोग कार्यालय के आसपास सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए थे, जहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा ताकि पूरी कार्यवाही शांतिपूर्ण ढंग से संचालित हो सके।
घटना की पृष्ठभूमि और आंदोलन का विस्तार
उल्लेखनीय है कि 16 जून 2026 को भरत तिवारी द्वारा पुलिस को पिस्टल दिखाने का मामला सामने आया था। इसके महज एक दिन बाद, 17 जून 2026 को बिलौटी गांव में कथित पुलिस मुठभेड़ में भरत तिवारी की गोली लगने से मौत हो गई थी। तब से ही परिवार इसे फर्जी एनकाउंटर करार देते हुए पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहा है। न्याय के लिए संघर्ष कर रहे परिजनों और उनके समर्थकों ने अपने आंदोलन को और व्यापक बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत आगामी 17 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल हस्ताक्षर अभियान आयोजित किया जाएगा। परिवार का संकल्प है कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे। सभी की निगाहें अब 13 जुलाई को होने वाली आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।











