उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में पिछले कई घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश ने सामान्य जनजीवन को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया है। बारिश का असर इस कदर व्यापक है कि जिला मुख्यालय गौरीगंज स्थित प्रमुख प्रशासनिक और सरकारी दफ्तर जलमग्न हो गए हैं। सड़कों पर कई फीट पानी जमा होने के कारण लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए दफ्तरों और परिसरों में भरे पानी को बाहर निकालने के लिए दमकल विभाग की टीम को पंपिंग सेट लेकर मोर्चा संभालना पड़ा है।
सरकारी कार्यालय जलमग्न, दस्तावेजों पर मंडराया खतरा
बारिश के चलते जिला मुख्यालय गौरीगंज में स्थिति काफी चिंताजनक हो गई है। पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय, गौरीगंज कोतवाली परिसर तथा ट्रैफिक कार्यालय पानी में डूब चुके हैं। इसके अलावा आसपास के व्यावसायिक क्षेत्रों और दुकानों में भी पानी भर गया है। सरकारी परिसरों के अंदर घुटनों तक पानी भर जाने से प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप पड़ गया है। अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए कमरों के अंदर दाखिल होना मुश्किल हो रहा है।
कार्यालयों के भीतर जलभराव होने से सरकारी फाइलों, कंप्यूटरों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों के भीगने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने दमकल कर्मियों को बुलाया। फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंचकर भारी क्षमता वाले पंपिंग सेट के जरिए परिसरों से जल निकासी के कार्य में जुटी हुई है, ताकि पानी के स्तर को कम किया जा सके और रिकॉर्ड्स को नुकसान से बचाया जा सके।
चोक नालियों से सड़कों पर भरा पानी, आवाजाही हुई ठप
नगर पालिका क्षेत्र और आसपास के कई वार्डों में स्थिति अत्यंत विकट बनी हुई है। मानसूनी बारिश से पहले नालियों और नालों की सफाई न होने के कारण जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। चोक नालियों से पानी सड़कों पर आ गया, जिससे मुख्य मार्ग और रिहायशी इलाके दरिया में तब्दील नजर आ रहे हैं। सड़कों पर घुटनों तक जलभराव होने से पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहन चालकों को आवाजाही में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सड़कों पर पानी भरने की वजह से सतह पर मौजूद गड्ढे और खुली नालियां छिप गई हैं, जिससे दुर्घटनाओं का अंदेशा काफी बढ़ गया है। जलमग्न रास्तों पर आवाजाही करने के दौरान लोग अनजाने में हादसों का शिकार होने से बच रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल मानसून के समय ऐसे ही हालात पैदा होते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी बरसात से पहले नाले-नालियों की सफाई और जल निकासी का कोई ठोस इंतजाम नहीं करते हैं।
दुकानदारों का नुकसान और ग्रामीण इलाकों में बढ़ा संकट
शहर के मुख्य व्यापारिक क्षेत्रों और नगर पालिका के आसपास स्थित दुकानों में पानी घुस जाने से व्यापारियों को काफी आर्थिक नुकसान की आशंका है। पानी के कारण दुकानों में रखा सामान खराब हो रहा है। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि नगर प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा हर बार आम जनता को भुगतना पड़ता है। बारिश खत्म होने के बाद भी कई घंटों तक पानी सड़कों पर जमा रहता है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का डर भी बना रहता है।
शहरी इलाकों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी भारी बारिश ने तबाही मचाई है। किसानों के खेतों में लबालब पानी भर जाने से फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा कच्चे मकानों और झोपड़ियों में रहने वाले गरीब परिवारों के सामने रहने और भोजन पकाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कई कच्चे मकानों के गिरने की आशंका भी बनी हुई है।
प्रशासन अलर्ट मोड पर, अनावश्यक बाहर न निकलने की सलाह
बारिश के कारण स्कूली बच्चों, दैनिक वेतनभोगियों और दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों का दैनिक काम प्रभावित हुआ है। बाजार सुनसान पड़े हैं और लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं। जिला प्रशासन की ओर से पूरे जिले के हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। आपातकालीन सेवाओं और प्रशासनिक टीमों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने आम नागरिकों और यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम खराब रहने तक बहुत जरूरी काम न होने पर अपने घरों से बाहर न निकलें। इसके साथ ही जलभराव वाले इलाकों और खुले नालों के पास जाने से बचने की हिदायत दी गई है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।





















