मऊ जिले के मधुबन क्षेत्र में मधुबन नगर पंचायत को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली मुख्य सड़क इस समय स्थानीय लोगों और राहगीरों के लिए आफत बनी हुई है। वर्षों से मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुका यह मार्ग बारिश के दिनों में बेहद खतरनाक रूप ले चुका है। सड़क पर एक से दो फीट गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिनमें पानी भरा रहने के कारण रोजाना दुर्घटनाएं हो रही हैं। जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों से लगातार गुहार लगाने के बाद भी अब तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
मानसून में जानलेवा साबित हो रहे बड़े-बड़े गड्ढे
बरसात के मौसम में इस सड़क की स्थिति और अधिक भयावह हो जाती है। स्थानीय निवासी जितेंद्र यादव के अनुसार, जब से यह सड़क बनाई गई थी, उसके बाद से आज तक इसकी दोबारा कभी मरम्मत नहीं कराई गई। उचित रख-रखाव न होने की वजह से सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह उखड़ चुकी है और पूरी सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे उभर आए हैं। मौजूदा बारिश के सीजन में इन गड्ढों में लबालब पानी भर जाने के कारण राहगीरों को सड़क की गहराई का बिल्कुल अंदाजा नहीं मिलता।
जितेंद्र यादव ने बताया कि जलभराव की वजह से लोग आए दिन अपनी गाड़ियों सहित इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। इस रास्ते पर चलना किसी जोखिम से कम नहीं है और हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या पिछले कई सालों से लगातार बनी हुई है, लेकिन शासन और प्रशासन के अधिकारियों ने इस ओर पूरी तरह से आंखें मूंद रखी हैं। बार-बार की शिकायतों के बावजूद सड़क निर्माण को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया।
एक किलोमीटर लंबे रास्ते पर चलना हुआ दूभर
मधुबन नगर पंचायत को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाला यह मार्ग इलाके का एक बेहद महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। जितेंद्र मौर्य ने बताया कि इस रास्ते से प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोगों का आवागमन होता है। मुख्य मार्ग होने की वजह से मजबूरी में लोगों को इसी जर्जर रास्ते से गुजरना पड़ता है। हालांकि, लगभग एक किलोमीटर लंबे इस हिस्से पर सफर करना अब लोगों के लिए किसी यातना से कम नहीं रह गया है।
सड़क पर जगह-जगह एक से दो फीट तक गहरा पानी जमा हो गया है। जितेंद्र मौर्य के मुताबिक, वर्षों पहले जब यह सड़क टूटी थी, तब से लेकर अब तक किसी भी विभाग ने इसकी सुध नहीं ली। रोजाना लोग इस सड़क पर गिरकर घायल हो रहे हैं। विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए यह रास्ता बेहद जानलेवा बन चुका है। बार-बार स्थानीय प्रतिनिधियों से मरम्मत की गुहार लगाई गई, परंतु हर बार आश्वासन के सिवाय कुछ हासिल नहीं हुआ। प्रशासन की इस उदासीनता के कारण लोगों को दैनिक आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा बनी परिजनों की चिंता
सड़क की खस्ताहाल स्थिति का सबसे बुरा प्रभाव छोटे स्कूली बच्चों की पढ़ाई और उनकी सुरक्षा पर पड़ रहा है। स्थानीय निवासी शैलेंद्र कुमार ने बताया कि मुख्य सड़क की दयनीय हालत के कारण रोजाना स्कूल जाने वाले बच्चे गड्ढों में गिरकर घायल हो जाते हैं। बारिश के पानी से ढके गड्ढों में बच्चों का संतुलन बिगड़ जाता है और वे दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब परिजनों को खुद उन्हें रोजाना स्कूल छोड़ने और वापस घर लाने का काम करना पड़ रहा है। शैलेंद्र कुमार का कहना है कि अगर सड़क की समय रहते मरम्मत करा दी जाए, तो आवागमन सुगम हो जाएगा और लोगों को इन तमाम दिक्कतों से निजात मिल जाएगी। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन के समक्ष सड़क निर्माण की पुरजोर मांग उठाई है, लेकिन आज तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। क्षेत्र के लोगों ने शासन-प्रशासन से तत्काल इस मुख्य मार्ग का रिपेयर कार्य शुरू कराने की मांग की है ताकि जानलेवा बने इन गड्ढों से राहत मिल सके।



















