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जमशेदपुर स्टाइल में बनाएं कुरकुरे चना दाल पकौड़े, ढाबे जैसा स्वाद पाने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्सखानपान
2 सित॰ 2026, 10:18 am (44 मिनट पहले)· 3

जमशेदपुर स्टाइल में बनाएं कुरकुरे चना दाल पकौड़े, ढाबे जैसा स्वाद पाने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स

बारिश के मौसम में चाय के साथ करारे चना दाल पकौड़े बनाने के लिए दाल भिगोने से लेकर तलने तक की सही तकनीक जानना बेहद जरूरी है। चावल का आटा और दरदरा पीसने की ट्रिक से घर पर ही ढाबा स्टाइल पकौड़े तैयार किए जा सकते हैं।

बारिश की रिमझिम फुहारों के बीच गर्म चाय की चुस्की के साथ अगर थाली में करारे और स्वादिष्ट पकौड़े मिल जाएं, तो मौसम का आनंद दोगुना हो जाता है। झारखंड के जमशेदपुर समेत देश भर के कई इलाकों में मानसून के दौरान चना दाल के पकौड़े बेहद चाव से खाए जाते हैं। हालांकि, कई बार घर पर पकौड़े बनाते समय वे या तो बहुत सख्त हो जाते हैं या फिर ज्यादा तेल सोखकर ढीले पड़ जाते हैं। सही विधि और कुछ छोटी-छोटी ट्रिक्स का ध्यान रखकर आप आसानी से घर पर ही बिल्कुल ढाबा स्टाइल के कुरकुरे पकौड़े तैयार कर सकते हैं।

दाल भिगोने और पीसने की सही तकनीक

स्वादिष्ट पकौड़े बनाने की सबसे पहली शुरुआत चना दाल के सही चुनाव और उसे भिगोने के समय से होती है। इसके लिए सबसे पहले आवश्यकतानुसार चना दाल लेकर उसे साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। दाल को भिगोते समय ध्यान रखें कि इसे पानी में 2 से 3 घंटे से अधिक न छोड़ें। बारिश के मौसम में हवा में नमी अधिक होती है, जिससे ज्यादा समय तक पानी में रहने पर दाल अत्यधिक नरम पड़ जाती है। अत्यधिक नरम दाल पीसते समय ज्यादा पानी सोखती है और इसका टेक्सचर खराब हो जाता है, जिससे पकौड़े कुरकुरे नहीं बन पाते हैं। 3 घंटे बाद दाल का पूरा पानी छानकर निकाल देना चाहिए।

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भीगी हुई दाल को पीसने के लिए मिक्सर ग्राइंडर में डालें, लेकिन इस बात का विशेष ध्यान रखें कि दाल का बिल्कुल महीन पेस्ट न बने। पकौड़ों में असली करारापन लाने के लिए दाल को हमेशा दरदरा ही पीसना चाहिए। पीसते समय पानी का इस्तेमाल न करें या यदि बहुत आवश्यक हो तो केवल एक से दो चम्मच पानी ही मिलाएं। दाल में मौजूद साबुत दाने और दरदरापन ही पकौड़ों को बाहर से क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट बनाता है। पिसी हुई दाल को एक बड़े और गहरे बर्तन में निकाल लें ताकि सभी मसाले मिलाने में आसानी हो।

मसाले मिलाने और कुरकुरापन बढ़ाने की ट्रिक

दरदरी पिसी हुई दाल में बारीक कटा हुआ प्याज, बारीक कटी हरी मिर्च, घिसा हुआ अदरक और ताज़ा हरा धनिया मिलाएं। इसके बाद स्वादानुसार नमक, थोड़ा लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, साबुत जीरा और चुटकी भर हींग शामिल करें। हींग न केवल पकौड़ों के स्वाद को बढ़ाती है, बल्कि चना दाल के भारीपन को पचाने में भी मदद करती है। इन बुनियादी मसालों के अलावा पकौड़ों को लंबे समय तक कुरकुरा बनाए रखने के लिए इसमें दो से तीन चम्मच चावल का आटा मिलाना एक बेहतरीन ट्रिक माना जाता है।

चावल का आटा मिश्रण की अतिरिक्त नमी को सोख लेता है और तलते समय पकौड़ों की बाहरी परत को शानदार क्रिस्प देता है। इन सभी सामग्रियों को हाथों की मदद से अच्छी तरह मिला लें। मिश्रण तैयार करते समय ध्यान दें कि यह न तो बहुत ज्यादा पतला हो और न ही बहुत ज्यादा सूखा या सख्त हो। मिश्रण की संगति ऐसी होनी चाहिए कि उसे आसानी से हाथ से छोटे-छोटे हिस्सों में बांधकर गर्म तेल में डाला जा सके। तैयार मिश्रण को तलने से पहले कुछ मिनटों के लिए ढककर रख दें ताकि मसालों का स्वाद दाल में अच्छी तरह समा जाए।

तेल का तापमान और तलने की विधि

पकौड़ों को सही तरीके से तलना सबसे महत्वपूर्ण चरण है। एक कड़ाही में पर्याप्त मात्रा में तेल डालकर उसे मध्यम आंच पर गर्म करें। तेल बहुत ज्यादा तेज गर्म नहीं होना चाहिए, क्योंकि अत्यधिक गर्म तेल में पकौड़े डालते ही बाहर से तुरंत काले या भूरे हो जाएंगे और अंदर से कच्चे रह जाएंगे। वहीं दूसरी ओर, यदि तेल पर्याप्त गर्म नहीं होगा, तो पकौड़े कड़ाही में जाते ही बहुत सारा तेल सोख लेंगे और भारी हो जाएंगे।

जब तेल मध्यम रूप से गर्म हो जाए, तब तैयार मिश्रण में से थोड़ा-थोड़ा हिस्सा लेकर छोटे आकार के पकौड़े बनाते हुए कड़ाही में डालें। कड़ाही में एक साथ बहुत ज्यादा पकौड़े न भरें, वरना तेल का तापमान अचानक गिर जाएगा और पकौड़े आपस में चिपक सकते हैं। पकौड़ों को मध्यम आंच पर ही धीरे-धीरे सिकने दें और बीच-बीच में कलछी की मदद से उलटते-पलटते रहें। जब पकौड़ों का रंग चारों तरफ से सुंदर सुनहरा और बाहरी परत एकदम कुरकुरी नजर आने लगे, तब इन्हें तेल से बाहर निकाल लें।

परोसने का तरीका और अतिरिक्त तेल निकालने के उपाय

तले हुए पकौड़ों को कड़ाही से निकालकर तुरंत टिश्यू पेपर या एब्जॉर्बेंट पेपर पर रखें। ऐसा करने से पकौड़ों के साथ आया अतिरिक्त तेल पूरी तरह से सोख लिया जाता है और वे खाने में भारी नहीं लगते। इसी प्रकार पूरे मिश्रण से गरम-गरम पकौड़ों का नया बैच तैयार कर लें।

इन करारे चना दाल पकौड़ों का असली आनंद लेने के लिए इन्हें ताज़ी हरी धनिया-पुदीने की तीखी चटनी, इमली की खट्टी-मीठी चटनी या फिर टमाटर सॉस के साथ परोसें। बारिश के मौसम में चाय के समय परोसे जाने वाले ये पकौड़े हर किसी को बेहद पसंद आते हैं। बस दो बातें हमेशा याद रखें कि दाल को 3 घंटे से ज्यादा न भिगोएं और पीसते समय इसे दरदरा रखें, आपके पकौड़े हर बार परफेक्ट बनेंगे।

सवाल-जवाब

चना दाल को कितने समय तक भिगोना चाहिए?
चना दाल को केवल 2 से 3 घंटे के लिए भिगोना चाहिए। 3 घंटे से अधिक भिगोने से दाल अत्यधिक नरम हो जाती है और पकौड़े सही नहीं बनते।
पकौड़ों को ज्यादा कुरकुरा बनाने के लिए क्या मिलाएं?
मिश्रण में दो से तीन चम्मच चावल का आटा मिलाने से पकौड़े बहुत कुरकुरे बनते हैं।
क्या चना दाल को बहुत महीन पीसना चाहिए?
नहीं, चना दाल को हमेशा दरदरा पीसना चाहिए। महीन पेस्ट बनाने से पकौड़े अंदर से चिपिचपे और बाहर से ढीले हो सकते हैं।
पकौड़े तलते समय तेल का तापमान कैसा होना चाहिए?
तेल मध्यम आंच पर गर्म होना चाहिए। बहुत तेज गर्म तेल में पकौड़े अंदर से कच्चे रह जाते हैं और कम गर्म तेल में वे ज्यादा तेल सोख लेते हैं।
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