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मानसून के दौरान गमले और बगीचे के पौधों को सड़ने से बचाने की कारगर तकनीकेंजीवनशैली
2 सित॰ 2026, 10:19 am (39 मिनट पहले)· 2

मानसून के दौरान गमले और बगीचे के पौधों को सड़ने से बचाने की कारगर तकनीकें

मानसून के मौसम में लगातार होने वाली बारिश गमलों और बगीचे के पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है। सही ड्रेनेज, मिट्टी की गुड़ाई, फंगस से बचाव और संतुलित देखभाल के जरिए पौधों को पूरे बरसात हरे-भरे बनाए रखा जा सकता है।

मानसून का मौसम जहां पेड़-पौधों में नई जान फूंकता है और चारों तरफ हरियाली बिखेरता है, वहीं अत्यधिक बारिश होम गार्डन और गमलों में लगे पौधों के लिए गंभीर चुनौती भी बन सकती है। जब गमलों या क्यारियों में लगातार पानी भरा रहता है, तो मिट्टी में हमेशा नमी बनी रहती है। इसका सीधा असर पौधों की जड़ों पर पड़ता है, जिससे जड़ें सड़ने लगती हैं और पत्तियां पीली पड़कर गिरने लगती हैं। ऐसे में बरसात के दिनों में पौधों की नियमित रूप से देखरेख करना बहुत आवश्यक हो जाता है। यदि गमले में पानी जमा हुआ दिखाई दे, तो उसे तुरंत बाहर निकालना चाहिए और बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी देने से पूरी तरह बचना चाहिए।

गमलों में ड्रेनेज व्यवस्था और स्टैंड का उपयोग

गमले में लगे पौधों को बरसात के मौसम में स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहली और जरूरी शर्त बेहतर जल निकासी व्यवस्था का होना है। अक्सर गमलों के निचले हिस्से में बने ड्रेनेज होल मिट्टी के जमने या जड़ों के अत्यधिक फैल जाने की वजह से बंद हो जाते हैं। जब ये छेद बंद होते हैं, तो बारिश का पानी बाहर नहीं निकल पाता और गमले के अंदर जमा होकर जड़ों को सड़ाने लगता है। इसलिए समय-समय पर ड्रेनेज होल की जांच करना और उन्हें साफ रखना बेहद जरूरी है। इसके अतिरिक्त गमलों को सीधे जमीन या पक्के फर्श पर रखने के बजाय ईंटों, लकड़ी के गुटकों या गमले के स्टैंड पर उठाकर रखना चाहिए। इससे गमले के नीचे हवा का रास्ता बना रहता है और अतिरिक्त पानी बिना किसी रुकावट के बाहर निकल जाता है।

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मिट्टी की हल्की गुड़ाई और काई की सफाई

लगातार होने वाली बारिश से गमले की मिट्टी बहुत अधिक गीली, भारी और चिपचिपी हो जाती है। ऐसी स्थिति में मिट्टी के छिद्र बंद हो जाते हैं और जड़ों तक ऑक्सीजन यानी हवा का संचार ठीक से नहीं हो पाता, जिससे पौधे धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए बारिश के बीच में जब भी धूप निकले या मिट्टी की ऊपरी सतह थोड़ी सूखी दिखे, तब किसी खुरपी की मदद से हल्की गुड़ाई करनी चाहिए। गुड़ाई करने से मिट्टी में हवा की आवाजाही बेहतर होती है और जड़ों को सांस लेने का अवसर मिलता है। इसके साथ ही, लगातार नमी रहने से मिट्टी के ऊपर हरी काई या चिकनी परत जम जाती है, जिसे सावधानीपूर्वक हटाते रहना चाहिए ताकि मिट्टी की ऊपरी सतह सांस ले सके।

ज़मीन में लगे पौधों के लिए जल निकासी की व्यवस्था

केवल गमलों में लगे पौधे ही नहीं, बल्कि जमीन या बगीचे की क्यारियों में रोपे गए पौधों को भी बारिश के अतिरिक्त पानी से सुरक्षित रखना उतना ही आवश्यक है। यदि पौधे के तने और जड़ों के आसपास लगातार पानी इकट्ठा रहता है, तो जड़ प्रणाली को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इस समस्या के समाधान के लिए पौधे के मुख्य तने के आसपास मिट्टी डालकर सतह को थोड़ा ऊंचा कर देना चाहिए। इसके अलावा क्यारियों के चारों तरफ छोटी नाली बनाकर अतिरिक्त जल को बाहर निकालने की समुचित व्यवस्था करनी चाहिए। इस उपाय से जड़ों के पास अनावश्यक नमी का ठहराव नहीं होता और पौधे लंबे समय तक मजबूत बने रहते हैं।

फंगस संक्रमण, छंटाई और नीम के घोल का छिड़काव

बरसात के दिनों में हवा में अत्यधिक नमी रहने और धूप की कमी के कारण पौधों पर फंगस का प्रकोप काफी बढ़ जाता है। यदि पत्तियों पर सफेद या काले धब्बे दिखाई दें, टहनियां सड़ने लगें या कोई असामान्य परत जम जाए, तो समझ लें कि पौधा फंगल संक्रमण की चपेट में आ रहा है। संक्रमण दिखने पर प्रभावित या सड़ी हुई पत्तियों और टहनियों को तुरंत कैंची से काटकर अलग कर देना चाहिए। इससे फंगस को पौधे के अन्य स्वस्थ हिस्सों में फैलने से रोका जा सकता है। अत्यधिक फंगस फैलने की स्थिति में किसी विशेषज्ञ से परामर्श लेकर जैविक उपचार या उपयुक्त फंगीसाइड का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा, मानसून में पौधों पर छोटे सफेद कीड़े और अन्य कीट भी हमला करते हैं। इनके नियंत्रण के लिए नीम की पत्तियों को पानी में भिगोकर और छानकर बनाया गया घरेलू घोल पत्तियों पर स्प्रे किया जा सकता है। हालांकि, पूरे पौधे पर छिड़काव करने से पहले एक छोटी पत्ती पर पैच टेस्ट करना समझदारी होती है।

सिंचाई और खाद देने में सावधानी

बरसात के मौसम में पौधों की जरूरत से ज्यादा सिंचाई करना और अत्यधिक खाद डालना फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है। चूंकि बारिश की वजह से मिट्टी में पहले से ही पर्याप्त नमी होती है, इसलिए अलग से पानी देने से पहले मिट्टी को उंगली से छूकर नमी की जांच अवश्य कर लें। अत्यधिक गीली मिट्टी में भारी मात्रा में खाद डालने से जड़ों पर दबाव पड़ता है और वे जल सकती हैं। पौधे की वास्तविक स्थिति और आवश्यकता को देखकर ही जैविक खाद का प्रयोग करें। साथ ही, पौधे पर मौजूद सूखी, पीली और सड़ी-गली पत्तियों को समय-समय पर हटाते रहें ताकि पौधे को व्यर्थ की ऊर्जा न गंवानी पड़े और उसकी हरियाली बनी रहे।

सवाल-जवाब

बारिश के मौसम में गमले के पौधों में पानी कब डालना चाहिए?
बारिश के दौरान अलग से पानी देने से पहले हमेशा मिट्टी की ऊपरी सतह छूकर नमी की जांच करें। यदि मिट्टी पहले से गीली हो, तो पानी बिल्कुल न दें।
गमले में पानी जमा होने पर क्या करना चाहिए?
जमा हुए पानी को तुरंत उड़ेलकर बाहर निकालें और नीचे बने ड्रेनेज होल को साफ करें। गमले को सीधे जमीन के बजाय स्टैंड या ईंट पर रखें।
मानसून में पौधों पर फंगस लगने पर क्या उपाय करें?
फंगस से प्रभावित पत्तियों और टहनियों को तुरंत काटकर हटा दें। संक्रमण अधिक होने पर विशेषज्ञ की सलाह से जैविक फंगीसाइड का छिड़काव करें।
बरसात में पौधों से सफेद कीड़े कैसे हटाएं?
नीम की पत्तियों को पानी में भिगोकर और छानकर बनाए गए घरेलू घोल का पत्तियों पर हल्का छिड़काव करें। स्प्रे करने से पहले एक छोटी पत्ती पर टेस्ट कर लें।
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