बिहार में BPSC परीक्षा का बड़ा फर्जीवाड़ा: बायोमेट्रिक सिस्टम हैक कर प्रॉक्सी कैंडिडेट्स को बैठाया, अब तक 37 गिरफ्तारbihar
10 घंटे पहले· 1

बिहार में BPSC परीक्षा का बड़ा फर्जीवाड़ा: बायोमेट्रिक सिस्टम हैक कर प्रॉक्सी कैंडिडेट्स को बैठाया, अब तक 37 गिरफ्तार

बिहार में BPSC की AEDO समेत भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक माफिया ने बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम में सेंध लगाकर असली अभ्यर्थियों की जगह प्रॉक्सी कैंडिडेट बैठाए। आर्थिक अपराध इकाई की जांच में अफसरों की मिलीभगत के सबूत मिले हैं और अब तक 37 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

बायोमेट्रिक की दीवार में ही लगा दी सेंध

बिहार में सरकारी नौकरी की परीक्षाओं की साख पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिस बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन को नकल और प्रॉक्सी रोकने का सबसे भरोसेमंद हथियार माना जाता था, पेपर लीक माफिया ने ठीक उसी व्यवस्था को अपना औजार बना लिया। बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षाओं में माफिया ने इस सिस्टम को हैक कर असली स्टूडेंट्स की जगह प्रॉक्सी कैंडिडेट को परीक्षा में बैठाने का पूरा ताना-बाना बुना। परीक्षा कराने वाली एजेंसी से मिलीभगत कर प्रॉक्सी कैंडिडेट के बायोमैट्रिक्स को असली कैंडिडेट के नाम पर दर्ज करा दिया गया। इस पूरे मामले में अब तक 37 लोग सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं।

जयपुर की कंपनी और BPSC अफसरों का गठजोड़

आर्थिक अपराध इकाई के अधिकारी मानवजीत सिंह ढिल्लों के मुताबिक, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का ठेका जयपुर की एक कंपनी को दिया गया था, और इसी कंपनी ने BPSC के अफसरों के साथ मिलकर परीक्षा में गड़बड़ी को अंजाम दिया। हैरानी की बात यह रही कि न तो कंपनी के कर्मचारियों ने आयोग के नियम-कायदों का पालन किया और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने उनके काम की कोई जांच-परख की। जांच में अफसरों की मिलीभगत के सीधे सबूत भी सामने आए हैं — और जब रखवाले ही अपराधियों से हाथ मिला लें, तो पूरी व्यवस्था पर भरोसा डगमगा जाता है।

BPSC बिहार की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित परीक्षा मानी जाती है। यही परीक्षा पास कर अभ्यर्थी राज्य सरकार के बड़े अफसर बनते हैं। ऐसे में इस स्तर की परीक्षा में सेंध लगना बेहद गंभीर और चिंताजनक है।

ऐसे खुली पूरी पोल

ढिल्लों ने बताया कि बायोमेट्रिक का काम संभालने वाली कंपनी ने संदिग्ध पृष्ठभूमि के लोगों को एग्जामिनर के तौर पर तैनात कर दिया। इनमें से कई पहले भी पेपर लीक और दूसरी गड़बड़ियों के आरोप में गिरफ्तार हो चुके थे। कंपनी ने ठेके की एक भी शर्त ढंग से पूरी नहीं की, और परीक्षा प्रक्रिया के दौरान जिम्मेदार अफसरों ने भी उसके काम को क्रॉस-चेक नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि पेपर लीक से लेकर किसी और के अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने तक की शिकायतें आने लगीं। इन्हीं शिकायतों के बाद जांच शुरू हुई और एक-एक कर पूरी सच्चाई सामने आती चली गई।

935 पदों के लिए उमड़े थे 11 लाख अभ्यर्थी

आर्थिक अपराध इकाई ने इस साल परीक्षाओं की गड़बड़ी पर अपनी जांच की प्रगति एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साझा की। मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) के कुल 935 पदों के लिए BPSC ने 14 अप्रैल से 21 अप्रैल के बीच तीन चरणों में परीक्षा कराई थी, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया। इस परीक्षा में गड़बड़ी और कदाचार को लेकर 5 जिलों में FIR दर्ज की गई। खास बात यह है कि शिक्षा विभाग के तहत आने वाली AEDO की यह वैकेंसी बिहार में पहली बार आई थी और इसके लिए 11 लाख कैंडिडेट्स ने फॉर्म भरा था।

परीक्षा का स्तर समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि फॉर्म भरने की फीस सिर्फ 100 रुपये रखी गई थी। भारी संख्या में आवेदन आने की वजह से ही BPSC को तीन चरणों में परीक्षा करानी पड़ी — पहला चरण 14-15 अप्रैल, दूसरा 17-18 अप्रैल और तीसरा 20-21 अप्रैल को हुआ। इसके लिए राज्य के सभी 38 जिलों में कुल 746 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।

पांच जिलों में मुकदमे, 35 आरोपी जेल

ढिल्लों ने बताया कि सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) प्रतियोगिता परीक्षा-2026 में धांधली और कदाचार से जुड़े पांच मामले मुंगेर, नालंदा, वैशाली, बेगूसराय और नवादा में दर्ज हुए। आर्थिक अपराध इकाई ने जांच अपने हाथ में ली और इन पांच मामलों में 35 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

दूसरी परीक्षा में भी वही तरीका

गड़बड़ी सिर्फ AEDO तक सीमित नहीं रही। BPSC की ही एक अन्य परीक्षा — सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी प्रतियोगिता परीक्षा-2026, जो 23 अप्रैल को हुई थी — में भी कदाचार सामने आया। इस मामले में पटना के श्रीकृष्णापुरी थाने में केस दर्ज हुआ और EOU ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसी का कहना है कि दोनों परीक्षाओं में धांधली का तौर-तरीका लगभग एक जैसा था, जिससे साफ हो गया कि पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।

Sai Educare के कर्मचारी निकले रैकेट का हिस्सा

जांच में सामने आया कि बायोमेट्रिक सत्यापन का जिम्मा संभाल रही जयपुर स्थित M/s Sai Educare Private Limited के कई कर्मचारी इस गड़बड़ी में शामिल थे। EOU के मुताबिक कंपनी के जिला कॉर्डिनेटर, सुपरवाइजर और कई बायोमेट्रिक ऑपरेटरों को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए इन कर्मियों में मुंगेर, नालंदा, पटना, बांका और लखीसराय में तैनात लोग शामिल हैं।

पैसे लेकर बंटी आंसर की, ब्लूटूथ से बताए जवाब

पड़ताल में पता चला कि कुछ बायोमेट्रिक कर्मी पैसे लेकर परीक्षार्थियों तक आंसर की पहुंचा रहे थे और लगातार परीक्षा माफिया के संपर्क में बने हुए थे। ढिल्लों ने बताया कि BPSC और बायोमेट्रिक कंपनी के बीच हुए इकरारनामे की कई शर्तों का खुला उल्लंघन मिला है। चौंकाने वाली बात यह रही कि कई बायोमेट्रिक कॉर्डिनेटर और ऑपरेटर खुद AEDO परीक्षा के अभ्यर्थी थे, और आपराधिक इतिहास होने के बावजूद उनका सत्यापन तक नहीं किया गया।

जिन कर्मियों पर पहले परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लग चुके थे, उन्हें भी दोबारा जिम्मेदारी सौंप दी गई। अंतिम समय में ऐसे लोगों की तैनाती कर दी गई जिनके नाम आयोग को दी गई सूची में थे ही नहीं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का फैसला लिया गया। जांच के दौरान बेगूसराय, छपरा और नालंदा में ब्लूटूथ और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचाने की बात भी पुष्ट हुई।

जैमर लगाने वाली ECIL की भूमिका पर भी जांच

EOU ने बताया कि परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाने का काम कर रही ECIL से जुड़े कर्मियों की भूमिका और कार्यप्रणाली की भी जांच की जा रही है। पड़ताल में कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। ढिल्लों के मुताबिक AEDO और सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी परीक्षा घोटाले में अपराध करने के नए-नए तरीके सामने आए हैं।

स्पेशल सेल और हेल्पलाइन नंबर जारी

भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी तरह की धांधली रोकने के लिए आर्थिक अपराध इकाई ने एक Special Cell का गठन किया है। यह सेल परीक्षा माफिया की गतिविधियों और पुराने आरोपियों की मौजूदा हरकतों पर नजर रखेगा, खुफिया सूचनाएं जुटाएगा और NEET UG पुनर्परीक्षा व सिपाही भर्ती जैसी बड़ी परीक्षाओं के दौरान निगरानी करेगा। आम लोगों से सूचना लेने के लिए EOU ने हेल्पलाइन नंबर 9031829067 और ई-मेल digcou-bih@gov.in भी जारी किया है।

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