पटना के सरकारी स्कूलों में बच्चों की थाली में छिपकली और कीड़े मिलने की शिकायतों ने बिहार सरकार को हरकत में ला दिया है। लगातार आ रही ऐसी घटनाओं के बाद शिक्षा विभाग ने मिड डे मील व्यवस्था में बड़े बदलाव का ऐलान किया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सोमवार को विभाग के अधिकारियों और भोजन आपूर्तिकर्ताओं के साथ बैठक बुलाकर कई अहम फैसले लिए, जिनका मकसद बच्चों को हर हाल में साफ, गर्म और पौष्टिक भोजन मुहैया कराना है। मंत्री ने बैठक में साफ शब्दों में कहा कि भोजन की गुणवत्ता में किसी भी स्तर पर कोताही अब बर्दाश्त नहीं होगी और गड़बड़ी करने वाली एजेंसियों पर सीधी कार्रवाई होगी।
दो महीने में बदलेंगे बर्तन, तापमान बना रहेगा भोजन में
मंत्री तिवारी ने आपूर्तिकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिया कि आने वाले दो महीनों के भीतर तापरोधी यानी इंसुलेटेड बर्तनों का इंतजाम पूरा किया जाए। इसके पीछे तर्क यह है कि रसोई में तैयार खाना जब तक बच्चों की थाली तक पहुंचे, तब तक न तो वह ठंडा हो और न ही उसकी पौष्टिकता कम हो। अभी तक सामान्य बर्तनों में भोजन ढोए जाने से रास्ते में उसका तापमान और स्वाद दोनों बिगड़ जाते थे। मंत्री के मुताबिक बच्चों की सेहत से जुड़ा यह विषय विभाग के लिए सबसे ऊपर की प्राथमिकता में शामिल है, इसलिए इसमें देरी की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।
हर प्रखंड में खुलेगी सेंट्रलाइज्ड रसोई, बड़े प्रखंडों में दो-दो
बैठक में यह भी तय हुआ कि राज्य के हर प्रखंड में एक सेंट्रलाइज्ड किचन तैयार किया जाएगा। जिन प्रखंडों में स्कूल और बच्चों की तादाद ज्यादा है, वहां अकेले एक रसोई से काम नहीं चलेगा, इसलिए वहां दो-दो सेंट्रलाइज्ड किचन बनाए जाएंगे। इसका मकसद यही है कि तय समय पर हर स्कूल तक अच्छी क्वालिटी का खाना पहुंच सके और किसी बच्चे को इंतजार न करना पड़े और भोजन बंटवारे में देरी की शिकायत न आए।
अब कमांड सेंटर की नजर में रहेगी हर थाली
शिक्षा विभाग ने यह भी फैसला किया कि टेक्नोलॉजी के सहारे पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी। खाना रसोई में बनने से लेकर स्कूल में परोसे जाने तक की हर कड़ी अब कमांड सेंटर की निगरानी में रहेगी। मंत्री ने यह भी सीमा तय कर दी कि खाना पकने और बच्चों की थाली तक पहुंचने के बीच का फासला 3 से 4 घंटे से ज्यादा नहीं होना चाहिए, जिससे भोजन ताजा और पौष्टिक बना रहे और खराब होने की आशंका खत्म हो जाए।
रसोई से लेकर वितरण तक बाहरी लोगों की नो एंट्री
बैठक में यह भी साफ कर दिया गया कि खाना बनाने, ढोने और बांटने के पूरे काम में किसी भी गैर अधिकृत व्यक्ति को शामिल नहीं होने दिया जाएगा। सिर्फ अधिकृत एजेंसियां और जिम्मेदार कर्मचारी ही यह जिम्मेदारी संभालेंगे। अधिकारियों से यह भी कहा गया कि वे नियमित रूप से निरीक्षण करें और गड़बड़ी मिलने पर तुरंत जवाबदेही तय करें, ताकि लापरवाही करने वालों पर नकेल कसी जा सके।
निदेशक भी रहे मौजूद, मंत्री ने दोहराया संकल्प
इस समीक्षा बैठक में मिड डे मील निदेशक विनायक मिश्र भी मौजूद रहे। मंत्री मिथिलेश तिवारी ने दोहराया कि बच्चों के भोजन की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। सरकार की कोशिश है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाला हर बच्चा समय पर सुरक्षित, पौष्टिक और अच्छी क्वालिटी का खाना पाए, ताकि आगे चलकर भोजन को लेकर कोई शिकायत सामने ही न आए और अभिभावकों का भरोसा वापस लौटे।



















