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लोकसभा में भारी हंगामे के बीच पास हुआ पेपर लीक रोधी कड़ा विधेयक, सुप्रीम कोर्ट ने दिए सभी नाबालिग प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने के आदेशबिहार
29 जुल॰ 2026, 7:55 pm (4 घंटे पहले)· 0

लोकसभा में भारी हंगामे के बीच पास हुआ पेपर लीक रोधी कड़ा विधेयक, सुप्रीम कोर्ट ने दिए सभी नाबालिग प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने के आदेश

संसद के निचले सदन में तीखी बहस के बीच परीक्षा में धांधली और नकल पर रोक लगाने वाला विधेयक पारित हो गया है, जबकि सर्वोच्च अदालत ने प्रदर्शन में पकड़े गए नाबालिगों की तत्काल रिहाई का निर्देश दिया है।

संसद के निचले सदन लोकसभा ने देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान होने वाली धांधली और नकल पर रोक लगाने के मकसद से लाए गए बेहद कड़े विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया है। सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्षी दलों के जबरदस्त हंगामे और नारेबाजी के बावजूद यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। लोकसभा से मंजूरी मिलने के बाद अब इस विधेयक को उच्च सदन यानी राज्यसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। राज्यसभा से स्वीकृति मिलने के उपरांत इसे अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा, जिसके बाद यह पूरे देश में एक प्रभावी कानून का रूप ले लेगा। यद्यपि संसद में इस नए कानून की आवश्यकता को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच एक सहमति दिखाई दी, लेकिन सदन के भीतर बहस का माहौल बेहद गर्म और राजनीतिक तीखापन से भरा रहा। देर रात तक चली इस लंबी चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के नेताओं ने एक दूसरे पर तीखे हमले बोले। विशेष रूप से प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा गृह मंत्री अमित शाह को लेकर दिए गए बयानों के बाद सदन के भीतर भारी हंगामा देखने को मिला।

संसदीय बहस में तीखे आरोप और राजनीतिक गतिरोध

संसद में कानून बनाने की प्रक्रिया के बीच नेताओं के बयानों ने राजनीतिक पारे को और बढ़ा दिया। चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए गठित टास्क फोर्स में शामिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के निदेशक डॉक्टर कामकोटि पर टिप्पणी करते हुए उन्हें गोमूत्र विशेषज्ञ करार दे दिया। इस बयान का करारा जवाब देते हुए भारतीय जनता पार्टी के सांसद अनुराग ठाकुर ने डॉक्टर कामकोटि की उच्च शैक्षणिक योग्यताओं और डिग्रियों का ब्योरा सदन के सामने रखा। अनुराग ठाकुर ने कहा कि यदि गांधी परिवार के सभी सदस्यों की शैक्षणिक डिग्रियों को एक साथ मिला भी दिया जाए, तब भी उनकी कुल योग्यता प्रोफेसर कामकोटि के शैक्षणिक स्तर से कम ही रहेगी।

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संसदीय कार्यवाही के दौरान विवाद उस समय और गहरा गया जब प्रियंका गांधी ने नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि प्रह्लाद जोशी ने गुजरात के चर्चित बिलकिस बानो मामले के दोषियों का बचाव किया था। इस आरोप पर शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने तुरंत कड़ा ऐतराज जताया और इसे पूरी तरह से निराधार और झूठा करार दिया। उन्होंने प्रियंका गांधी से सदन में अपने आरोपों को साबित करने के लिए ठोस सबूत पेश करने की मांग की। इस तीखी नोकझोंक के चलते संसद में काफी देर तक अव्यवस्था का माहौल बना रहा।

परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाली और कानून के प्रभाव

इस नए संशोधित विधेयक के कानून बन जाने के बाद देश में सक्रिय पेपर लीक माफिया और संगठित गिरोहों पर शिकंजा कसना पूरी तरह तय माना जा रहा है। सरकार का यह कदम दर्शाता है कि परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखने के लिए उसकी नीति और नीयत पूरी तरह स्पष्ट है। संसद में बहस के दौरान जहां विपक्षी नेताओं का मुख्य ध्यान राजधानी के जंतर मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों, पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और सरकार को घेरने की राजनीति पर केंद्रित रहा, वहीं प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण देश की युवा पीढ़ी को सुरक्षित और निष्पक्ष भविष्य देने की कोशिश पर केंद्रित दिखाई दिया।

राजनीतिक मोर्चे पर आरोप-प्रत्यारोप चलना स्वाभाविक है, लेकिन वर्तमान परिस्थिति में सबसे प्राथमिक आवश्यकता यह है कि देश के लाखों परीक्षार्थियों और उनके माता-पिता के भीतर परीक्षा तंत्र के प्रति डगमगाया हुआ विश्वास फिर से बहाल हो सके। शासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में किसी भी परीक्षा का पेपर लीक न हो और न ही बड़े पैमाने पर नकल की गुंजाइश रहे, ताकि हर मेहनती छात्र को अपनी प्रतिभा साबित करने के लिए एक समान और निष्पक्ष माहौल मिल सके।

सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश और राज्य सरकारों को नोटिस

संसद में जारी इस राजनीतिक गहमागहमी के बीच देश की सर्वोच्च अदालत से भी इस मामले से जुड़ा एक बड़ा मोड़ सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और दर्ज प्राथमिकियों के संबंध में कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस को यह अनुमति दी है कि वह दर्ज की गई एफआईआर की जांच नियमानुसार जारी रख सकती है।

इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने देश की सभी राज्य सरकारों को यह सख्त आदेश दिया है कि प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी नाबालिग प्रदर्शनकारियों को बिना किसी देरी के तुरंत रिहा किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई न की जाए और पुलिस या जांच एजेंसियां किसी भी प्रदर्शनकारी की निजी और गोपनीय जानकारियों को सार्वजनिक न करें। इस मामले में अदालत ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल, बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकारों को औपचारिक नोटिस जारी कर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को तय की गई है।

सुरक्षा बलों पर हमले, साक्ष्य संरक्षण और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के सामने सुरक्षा संबंधी गंभीर तथ्य प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों की आड़ में कई आपराधिक और असामाजिक तत्व भीड़ में घुस आए थे, जिनके पास घातक हथियार मौजूद थे। इन असामाजिक तत्वों ने मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप 250 से भी ज्यादा पुलिस अधिकारी और कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए। इन तर्कों को सुनने के बाद सर्वोच्च अदालत ने निर्देश दिया है कि घटना से जुड़े तमाम डिजिटल साक्ष्य, ड्रोन कैमरे की फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, वायरलेस संदेशों का ब्योरा और पुलिस डायरी के रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित रखे जाएं।

दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पुलिस द्वारा सभी एफआईआर की जांच जारी रखने के फैसले पर तीखा विरोध दर्ज कराया है। पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार ने आंदोलन में शामिल सभी प्रदर्शनकारियों को बिना शर्त रिहा करने और मुकदमे वापस लेने का वादा किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अदालत के आदेश से उस वादे या समझौते की शर्तों में कोई बदलाव होता है, तो उनकी पार्टी इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी।

कानूनी और प्रशासनिक दृष्टि से यह अत्यंत आवश्यक है कि सर्वोच्च अदालत दोनों पक्षों की दलीलों को निष्पक्षता से सुने। छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और पुलिस बल पर किए गए पथराव, दोनों पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। चुंकि घटना से जुड़ी हर गतिविधि रिकॉर्ड पर है और प्रत्यक्षदर्शी मौजूद हैं, इसलिए इस पूरे घटनाक्रम से प्रशासनिक सबक सीखे जाने चाहिए। भविष्य में ऐसे बड़े प्रदर्शनों से निपटने के लिए पुलिस की कार्यप्रणाली के नियम तय होने चाहिए और भीड़ में शामिल होने वाले अराजक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का मानक ढांचा तैयार किया जाना चाहिए, ताकि देश की जनता में न्याय व्यवस्था के प्रति कोई शिकायत न रहे।

सवाल-जवाब

लोकसभा ने पेपर लीक रोधी विधेयक को किस प्रकार पारित किया?
लोकसभा ने भारी शोर-शराबे और हंगामे के बीच पेपर लीक के खिलाफ बनाए गए कड़े विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग प्रदर्शनकारियों के संबंध में क्या आदेश जारी किया है?
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए सभी नाबालिगों को तुरंत रिहा किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट की इस विशेष बेंच में कौन-कौन से न्यायाधीश शामिल थे?
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय बेंच कर रही थी।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में पुलिस सुरक्षा को लेकर क्या जानकारी दी?
उन्होंने अदालत को बताया कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ में हिंसक और असामाजिक तत्व शामिल थे, जिनके हमलों में 250 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए।
सुप्रीम कोर्ट ने किन छह राज्यों को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई कब होगी?
अदालत ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल, बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकारों को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई 3 अगस्त को तय की है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अदालत के किस फैसले का विरोध किया है?
पार्टी प्रवक्ता सौरव दास ने पुलिस द्वारा दर्ज सभी एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति देने का कड़ा विरोध जताया है।
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