चंदौली जिले के मुगलसराय विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अलीनगर इलाके में जल निकासी की समस्या लगातार विकराल रूप धारण करती जा रही है और यहां के निवासियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कुछ समय पहले जिला कलेक्टर चंद्र मोहन गर्ग ने खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया था और हालात का मुआयना किया था। उस दौरान निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर नाले चोक मिले थे और गलियों में पानी भरा हुआ दिखाई दिया था। जिला कलेक्टर ने उस समय मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए नालियों की तुरंत सफाई करवाने और जल निकासी की व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए थे ताकि आम जनता को इस गंभीर समस्या से राहत मिल सके। लेकिन जिला कलेक्टर के इस दौरे और स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जब ज़मीनी स्तर पर हकीकत जानने का प्रयास किया गया तो पता चला कि हालात में कोई भी सुधार नहीं आया है। अलीनगर की कई गलियों और चौराहों पर अभी भी गंदा पानी भरा हुआ है और स्थानीय लोगों का जीवन नारकीय बना हुआ है।
जलभराव और गंदे पानी से पनप रहा संक्रमण का खतरा
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गलियों में जमा हुआ पानी केवल बारिश का नहीं है, बल्कि इसके साथ नालियों का बदबूदार और गंदा पानी भी खुलकर मिल रहा है। इस स्थिति के कारण पूरे इलाके में लगातार तेज दुर्गंध फैल रही है और गंभीर बीमारियों के संक्रमण का खतरा भी लगातार मंडरा रहा है। स्थानीय निवासी लाल मोहम्मद ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि इलाके की खुली जगहों और गलियों में लगभग पंद्रह दिनों से पानी लगातार जमा हुआ है। पानी की निकासी का कोई भी पुख्ता इंतजाम न होने की वजह से लोगों को रोजमर्रा के कामों में भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इस जलभराव के कारण कई वाहन चालक अपनी मोटरसाइकिल समेत फिसलकर गिर चुके हैं और चोटिल हो चुके हैं। उनका कहना है कि इलाके में नया नाला तो बनाया गया था, लेकिन निर्माण कार्य को अधूरा ही छोड़ दिया गया और नालियों की नियमित सफाई भी नहीं की जा रही है। एक अन्य स्थानीय निवासी रुस्तम अली ने बताया कि नाले को ऊपर से ढकने का काम तो जरूर किया गया है, लेकिन पानी की निकासी का रास्ता अब भी बंद है। सड़क पर हर तरफ पानी भरा होने के कारण वहां से साइकिल और मोटरसाइकिल लेकर निकलना बेहद जोखिम भरा हो गया है। सबसे बड़ी चिंता स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को लेकर बनी हुई है, क्योंकि छात्र-छात्राओं को रोजाना इसी दूषित पानी से भरे रास्ते से गुजरकर अपने स्कूल और अन्य स्थानों पर जाना पड़ता है।
कई वार्डों में बदतर हालात और कोरे आश्वासन
क्षेत्र के एक अन्य निवासी आरिफ ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें और उनके परिवार को हर रोज कई-कई बार इसी गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई घरों के अंदर और कमरों की देहरी तक पानी पहुंच गया है, जिससे गृहस्थी का सामान भी प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप है कि इस इलाके में आए दिन स्थानीय जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी आते हैं और केवल बड़े-बड़े आश्वासन देकर चले जाते हैं कि जल्द ही नालियों की सफाई करवा दी जाएगी। लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है और समस्या में कोई बदलाव नहीं आया है। इसके अलावा जितेंद्र प्रजापति ने जानकारी दी कि अलीनगर के कई वार्ड इस वक्त जलभराव की भयंकर चपेट में हैं। उन्होंने खासतौर पर वार्ड नंबर 5, वार्ड नंबर 6, वार्ड नंबर 9 और वार्ड नंबर 10 समेत कई रिहायशी इलाकों में पानी भरे होने की बात कही। उनका कहना है कि जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को इस बड़ी समस्या की पूरी जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई भी ठोस और प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है जिससे जनता में भारी रोष व्याप्त है।
जिम्मेदारों की उदासीनता पर खड़े होते बड़े सवाल
स्थानीय निवासी प्रिंस यादव ने भी इलाके में साफ-सफाई और जल निकासी के बदतर इंतजामों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि लगातार मिलने वाले झूठे आश्वासनों के बावजूद गलियों से पानी की एक बूंद भी बाहर नहीं निकल पा रही है और लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। अलीनगर की मौजूदा और बदहाल स्थिति यह बहुत बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आखिर जिला कलेक्टर के इतने स्पष्ट और कड़े निर्देशों के बावजूद जल निकासी की इस पुरानी समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है। सड़कों और गलियों के गंदे पानी के बीच रोजाना जोखिम उठाकर आवाजाही करने वाले स्थानीय लोगों को अब भी इस बात का बेसब्री से इंतजार है कि कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचेगा और उन्हें इस गंभीर जलभराव से हमेशा के लिए स्थायी राहत दिलाएगा।



















