दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए एक प्रदर्शन को लेकर चल रहा सियासी घमासान अब एक नए और बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए गंभीर आरोप लगाए थे कि प्रदर्शन के दौरान एक शख्स पर हमला करने वाले आरोपी को जानबूझकर बचाया जा रहा है। इस तीखे राजनीतिक विवाद के बीच अब मुख्य आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज का पक्ष सामने आया है, जिन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पूरी घटना पर खुलकर बात की है और अपनी तरफ से सफाई पेश की है।
स्वतंत्र भारद्वाज ने इस बात से बिल्कुल इनकार नहीं किया है कि उन्होंने निशु आजाद के पिता के सिर पर वार किया था। हालांकि, उनका दावा है कि यह किसी सोची-समझी साजिश या जानलेवा हमले का हिस्सा नहीं था, बल्कि उन्होंने पूरी तरह से अपनी सुरक्षा यानी सेल्फ डिफेंस में यह कदम उठाया था। स्वतंत्र के मुताबिक, जब वह जंतर-मंतर पर मौजूद थे, तब वहां का माहौल अचानक काफी तनावपूर्ण हो गया और उनके ऊपर कई लोगों ने एक साथ हमला करने की कोशिश की थी। खुद को भीड़ से बचाने और अपनी जान की हिफाजत करने के लिए उन्होंने जवाबी प्रतिक्रिया दी थी, जिसके दौरान यह दुर्भाग्यपूर्ण चोट लग गई।
अपनी सफाई देते हुए स्वतंत्र भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि जब वह शुरुआत में जंतर-मंतर पहुंचे थे, तो उनका इरादा किसी भी प्रकार के विरोध का नहीं था। वह उस समय सीजेपी की मांग के समर्थन में वहां गए थे और प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े थे। उनका कहना है कि वह अकेले वहां पहुंचे थे और उनके साथ कोई गैंग या भारी-भरकम भीड़ नहीं थी, जैसा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से उनके बारे में प्रचारित किया जा रहा है। उनके अनुसार, उन्हें जानबूझकर एक खतरनाक अपराधी की तरह पेश किया जा रहा है ताकि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके और राजनीतिक रोटियां सेकी जा सकें।
घटना के पीछे के सिलसिले को याद करते हुए स्वतंत्र ने बताया कि जब वह प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे, तो उन्हें वहां कई तरह के नारे सुनाई दिए, जिसके बाद उन्होंने कुछ समय के लिए वहां से दूरी बना ली थी। लेकिन बाद में छात्रों की लगातार मौजूदगी और नीट से जुड़े अहम मुद्दों को देखते हुए वह दोबारा उस जगह पर लौट आए। इसी दौरान उन्हें एहसास हुआ कि एक व्यक्ति उनका लगातार वीडियो रिकॉर्ड कर रहा है। पड़ताल करने पर उन्हें पता चला कि वह शख्स कोई और नहीं बल्कि निशु आजाद के पिता थे। स्वतंत्र का कहना है कि उन्होंने उस व्यक्ति के पास जाकर शालीनता से कैमरा नीचे करने का अनुरोध किया था, लेकिन इस मामूली सी बात पर विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते करीब 20 से 25 लोग उनके ऊपर टूट पड़े।
भीड़ के हमले से घिरे होने का दावा करते हुए स्वतंत्र ने कहा कि जब उन पर चारों तरफ से हमला किया गया और दर्जनों लोग उन पर चढ़ आए, तो उनके पास खुद को बचाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके हाथ में एक कड़ा पहना हुआ था और जब वह भीड़ के बीच अपने बचाव में हाथ चला रहे थे, तभी वह कड़ा सामने वाले व्यक्ति के सिर पर जा लगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका इरादा किसी की हत्या करना या किसी को गंभीर रूप से चोट पहुंचाना कतई नहीं था। उन्होंने इसे पूरी तरह से आत्मरक्षा का मामला बताया और चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर भविष्य में भी उन पर इसी तरह कोई हमला करेगा, तो वह अपनी रक्षा करने के लिए फिर से कदम उठाएंगे।
पुलिस की कार्रवाई और जांच के सिलसिले में स्वतंत्र ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने इस मामले में उनसे पूछताछ की है और उन्हें सीआरपीसी की धारा 41 के तहत औपचारिक नोटिस भी जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि वह कानून का पूरा सम्मान करते हैं और पुलिस की वर्दी को भी आदर की नजर से देखते हैं। उनके अनुसार, जब भी पुलिस उन्हें जांच में सहयोग करने के लिए बुलाएगी, वह बिना किसी आनाकानी के पेश होंगे और पूरी ईमानदारी से सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि उन पर लगाए जा रहे कई अन्य दावे बेबुनियाद हैं और उनके पुराने पुराने वीडियो को आधार बनाकर उन्हें ऑनलाइन ट्रोल करने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है।
इस पूरे विवाद में कपिल मिश्रा का नाम आने को लेकर भी स्वतंत्र ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद कभी यह दावा नहीं किया था कि कपिल मिश्रा ने उन्हें फोन करके इस मामले से बाहर निकलवाया या छुड़वाया है। उनके मुताबिक, यह हवा-हवाई बात दूसरे लोगों द्वारा फैलाई जा रही थी और उन्होंने केवल मीडिया के सामने उसी बाहरी दावे को दोहराया था या कोट किया था। उनका इस पूरे घटनाक्रम में किसी भी राजनीतिक हस्ती से सीधे तौर पर इस तरह के संरक्षण से जुड़ाव होने की बात से उन्होंने किनारा कर लिया है।
दूसरी तरफ, निशु आजाद ने इस घटना के बाद सोशल मीडिया के जरिए राहुल गांधी से गुहार लगाई थी और मदद की मांग की थी। निशु ने खुलकर आरोप लगाया था कि उनके पिता पर हमला करने वाले स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दिल्ली पुलिस कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर रही है और आरोपी खुलेआम घूम रहा है। इस अपील के तुरंत बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट लिखकर निशु को खुला समर्थन देने का ऐलान किया। कांग्रेस नेता के इस तीखे हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस की कार्यशैली और भूमिका पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, हालांकि पुलिस प्रशासन का यही कहना है कि इस मामले में कानून के मुताबिक निष्पक्ष कार्रवाई की जा रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस की आगे की जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं और इस सियासी तकरार का क्या अंजाम होता है।




















