भारी बारिश, विनाशकारी बाढ़, भीषण तूफान और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं अकसर जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर देती हैं। इन विकट परिस्थितियों में जान माल के भारी नुकसान का सामना करने वाले पीड़ित परिवारों को राहत देने के लिए सरकारी स्तर पर विशेष वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। भारत में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा संचालित राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) तथा राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के तहत जरूरतमंदों को यह आर्थिक मदद प्रदान की जाती है। करौली में जिला SDRF टीम के प्रभारी धर्मेंद्र सिंह ने आपदा राहत योजनाओं के तहत मिलने वाले मुआवजे, उनकी अनिवार्य पात्रता तथा आवेदन की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।
आपदा में मौत होने पर 5 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किसी व्यक्ति की असमय मृत्यु हो जाने पर पीड़ित परिवार को आर्थिक संबल देने के लिए सरकारी नियमों के तहत मुआवजे की व्यवस्था है। धर्मेंद्र सिंह के अनुसार, यदि प्रभावित परिवार पूर्व से मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना अथवा मुख्यमंत्री आरोग्यम योजना में पंजीकृत है, तो वह जन आधार कार्ड के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकता है। ऐसे मामलों में पीड़ित परिवार को प्रति व्यक्ति 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दिए जाने का स्पष्ट प्रावधान है। यह सहायता राशि आपदा के कारण हुई मृत्यु के मामलों में प्रदान की जाती है, जिससे आपदा झेल रहे परिवारों को तात्कालिक वित्तीय सहयोग मिल सके।
आकाशीय बिजली गिरने से मृत्यु पर पृथक नियम और 4 लाख रुपये की राशि
आकाशीय बिजली की चपेट में आने से होने वाली मृत्यु के मामलों में आर्थिक सहायता की प्रक्रिया सामान्य आपदा मामलों से भिन्न होती है। इस प्रकार की दुर्घटनाओं में पीड़ित परिवार के लिए सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया अलग निर्धारित की गई है। बिजली गिरने से हुई जनहानि के मामलों में आश्रितों को DMIS पोर्टल के माध्यम से अपना आवेदन दर्ज कराना अनिवार्य होता है। SDRF के तय मानकों और नियमों के अनुसार, आकाशीय बिजली से हुई मृत्यु के प्रत्येक मामले में 4 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान किए जाने का प्रावधान बनाया गया है।
मकान क्षतिग्रस्त होने पर मुआवजा पाने की शर्तें
प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव केवल मानव जीवन की क्षति तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि कई बार मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कारण लोगों के रिहायशी मकान पूरी तरह ध्वस्त हो जाते हैं या भारी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। SDRF के दिशा-निर्देशों के तहत मकानों के नुकसान पर भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए संबंधित प्राधिकृत प्रशासनिक अधिकारी द्वारा मकान के क्षतिग्रस्त होने का आधिकारिक प्रमाण पत्र जारी किया जाना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, सहायता राशि स्वीकृत करने के लिए यह प्राथमिक शर्त भी लागू होती है कि संबंधित मकान घटना से पूर्व विधिवत रूप से निर्मित और स्थापित होना चाहिए।
आवेदन की प्रक्रिया और आवश्यक प्रशासनिक कदम
प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों को राहत राशि प्राप्त करने के लिए घटना घटित होने के तुरंत बाद आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाने होते हैं। पात्र परिवारों को सलाह दी जाती है कि वे अविलंब संबंधित विभाग और स्थानीय जिला प्रशासन से संपर्क स्थापित करें। सभी आवश्यक दस्तावेजों को तैयार कर निर्धारित पोर्टल (जैसे जन आधार कार्ड अथवा DMIS पोर्टल) के माध्यम से अपनी आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। समय पर सही प्रक्रिया का पालन करने से SDRF और NDRF के नियमों के अंतर्गत देय सहायता राशि बिना किसी अड़चन के पात्र लाभार्थियों तक पहुंच जाती है।





















