भारतीय तटरक्षक बल में शॉर्ट सर्विस अपॉइंटमेंट के तहत सेवारत डिप्टी कमांडेंट प्रियंका त्यागी को परमानेंट कमीशन देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को स्पष्ट हिदायत दी कि किसी जांबाज और वरिष्ठ अधिकारी का इस प्रकार अनादर स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने साफ चेतावनी दी है कि यदि तटरक्षक प्रशासन प्रियंका त्यागी को स्थायी सेवा में शामिल करने पर शीघ्र निर्णय नहीं करता है, तो शीर्ष अदालत स्वयं इसके लिए आवश्यक आदेश जारी कर देगी।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और लैंगिक समानता पर बल
सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों के समान अधिकार और लैंगिक समानता की व्यवस्था को रेखांकित करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर गंभीर चिंता जताई। थलसेना और नौसेना में महिला अफसरों को परमानेंट कमीशन दिए जाने का प्रावधान लागू हो चुका है, लेकिन तटरक्षक बल में स्पष्ट नीति की कमी का हवाला देकर महिला अधिकारियों को 14 वर्ष की सेवा के बाद कार्यमुक्त किया जा रहा था। अदालत ने केंद्र सरकार से सीधा सवाल किया कि जब पुरुष अधिकारियों को परमानेंट कमीशन की सुविधा मिल रही है, तो सर्वोत्कृष्ट योग्यता और समृद्ध अनुभव रखने वाली प्रियंका त्यागी को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है। पीठ ने कहा कि नीतिगत खामियों की आड़ लेकर किसी अधिकारी का वाजिब हक नहीं छीना जा सकता।
प्रियंका त्यागी की असाधारण उपलब्धियां और रिकॉर्ड
प्रियंका त्यागी का भारतीय तटरक्षक बल में 14 वर्षों से अधिक का एक बेदाग और ऐतिहासिक करियर रहा है। वे पूर्वी क्षेत्र में डोर्नियर एयरक्राफ्ट उड़ाने वाली पहली महिला कॉकपिट क्रू कर्नल या कैप्टन के रूप में जानी जाती हैं। उनके नाम तटरक्षक बल के सभी पुरुष और महिला अधिकारियों में सबसे अधिक, लगभग 4,500 उड़ान घंटे पूरे करने का अद्वितीय रिकॉर्ड दर्ज है। इसके अतिरिक्त, समुद्र में आयोजित कई जोखिम भरे खोज एवं बचाव अभियानों का नेतृत्व करते हुए उन्होंने अपनी अदम्य वीरता का परिचय दिया और 300 से अधिक लोगों का जीवन सुरक्षित बचाया। इतनी उत्कृष्ट सेवाओं और वरिष्ठता के बावजूद 14 साल की सेवा अवधि समाप्त होने पर उन्हें सेवानिवृत्ति का नोटिस थमा दिया गया, जिसके बाद उन्होंने न्याय पाने के लिए अदालत की शरण ली।
तटरक्षक बल की नीतिगत कमियां और सरकारी पक्ष
अदालत के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया कि भारतीय तटरक्षक बल का परिचालन ढांचा थलसेना और नौसेना की तुलना में भिन्न है। जहाजों पर महिला अधिकारियों के लिए बुनियादी ढांचे और आवश्यक सुविधाओं की सीमित उपलब्धता का हवाला दिया गया। इसके अतिरिक्त, तटरक्षक बल में महिलाओं के परमानेंट कमीशन को लेकर अब तक सुस्पष्ट नीति का अभाव होना भी एक कारण बताया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि नीतिगत व्यवस्था में सुधार करना सरकार की जिम्मेदारी है, न कि अधिकारी के अधिकारों में कटौती का आधार।
परमानेंट और शॉर्ट सर्विस कमीशन के नियम तथा प्रस्तावित बदलाव
भारतीय तटरक्षक बल में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC या SSA) के अंतर्गत अधिकारियों को 10 या 14 वर्षों की निश्चित अवधि के लिए नियुक्त किया जाता है। इसके विपरीत, परमानेंट कमीशन (PC) प्राप्त करने वाला अधिकारी अपनी सेवानिवृत्ति की निर्धारित आयु तक सेवा में बना रहता है और उसे पेंशन सहित सभी पूर्व सैनिक लाभ प्राप्त होते हैं। सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के पश्चात अब रक्षा मंत्रालय तथा भारतीय तटरक्षक बल अपनी नीतियों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। इसके तहत पात्र शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों की सेवा पुस्तिका और प्रदर्शन के आधार पर उन्हें परमानेंट कैडर में पदोन्नत करने का नया ढांचा तैयार किया जा रहा है।
असिस्टेंट कमांडेंट पद पर भर्ती और चयन की संपूर्ण प्रक्रिया
प्रियंका त्यागी ने तटरक्षक बल में अपने करियर की शुरुआत असिस्टेंट कमांडेंट (जनरल ड्यूटी) के पद से की थी। इस पद पर सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थियों का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 60% अंकों के साथ स्नातक होना अनिवार्य है। साथ ही, 12वीं कक्षा में भौतिक विज्ञान और गणित विषयों का होना आवश्यक है। अभ्यर्थियों को चयन हेतु तटरक्षक असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा (CGEP) उत्तीर्ण करनी होती है। लिखित परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों को प्रीलिमिनरी सिलेक्शन बोर्ड (PSB) और फाइनल सिलेक्शन Board (FSB) के कड़े चरणों से गुजरना पड़ता है, जिसमें मनोवैज्ञानिक परीक्षण, साक्षात्कार और समूह कार्य शामिल हैं। इन सभी प्रक्रियाओं एवं चिकित्सीय परीक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले उम्मीदवारों को इंडियन नेवल एकेडमी (INA) एझिमाला में गहन सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है।



















