बिहार के बेगूसराय जिले स्थित मानोपुर गांव में एक अत्यंत दुर्लभ और अचरज में डालने वाली घटना प्रकाश में आई है। यहां एक स्थानीय परिवार ने दावा किया है कि लगभग 12 वर्ष पूर्व जिस बेटे की सर्पदंश के कारण मृत्यु हो गई थी और जिसके पार्थिव शरीर को धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया गया था, वह अचानक जीवित अवस्था में अपने पैतृक घर लौट आया है। गांव की गलियों में भिक्षा मांगते समय परिजनों की नजर जब इस युवक पर पड़ी, तो उसके शारीरिक लक्षणों और पारिवारिक जानकारियों ने परिजनों को आश्चर्यचकित कर दिया। हालांकि, 12 सालों की इस रहस्यमयी अनुपस्थिति और युवक की वास्तविक पहचान को लेकर फिलहाल किसी प्रशासनिक या स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।
12 वर्ष पूर्व की घटना और सर्पदंश के बाद का घटनाक्रम
परिजनों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, मानोपुर गांव निवासी राहुल कुमार को लगभग 12 वर्ष पहले एक विषैले सांप ने डंस लिया था। पिता के पास मौजूद आधार कार्ड के दस्तावेजों में राहुल की जन्मतिथि 1 जनवरी 2005 दर्ज है। सांप के काटने के तुरंत बाद बालक राहुल की शारीरिक स्थिति काफी तेजी से बिगड़ने लगी थी। सर्पदंश के असर से उसकी आंखों की स्थिति भी बेहद असामान्य हो गई थी, जिससे परिवार के लोग काफी भयभीत और चिंतित हो गए थे। उस समय उचित चिकित्सकीय देखभाल के साथ-साथ परिजनों ने स्थानीय परंपराओं के तहत बालक को झाड़-फूंक और इलाज के उद्देश्य से एक स्थानीय भगत के पास भी ले जाया था।
झाड़-फूंक और प्राथमिक प्रयासों के बावजूद बालक की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और परिजनों के अनुसार अंततः उसने दम तोड़ दिया। इसके पश्चात सनातन हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करते हुए बालक के शव को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के तहत पवित्र गंगा नदी की धारा में दफन या प्रवाहित कर दिया गया। अंतिम संस्कार के उस दुखद क्षण में परिवार के कई निकट संबंधी और ग्रामीण भी उपस्थित थे, जिन्होंने उस समय बालक की मृत्यु की पुष्टि मान ली थी।
गांव में साधु भिक्षुक के रूप में अचानक वापसी
घटना में नया मोड़ तब आया जब 12 वर्षों के लंबे अंतराल के पश्चात मानोपुर गांव में एक अज्ञात युवक भिक्षा मांगते हुए दाखिल हुआ। वह युवक घूमते-घूमते ठीक उसी परिवार के मकान के आसपास पहुंच गया और भिक्षा मांगने लगा। जब घर के लोगों की नजर उस युवक के हाव-भाव, कद-काठी और चेहरे पर पड़ी, तो उन्हें अपने वर्षों पहले खोए हुए बेटे राहुल की छवि नजर आने लगी। युवक का चेहरा-मोहरा और शारीरिक रंग-रूप पुराने राहुल से अत्यधिक मेल खा रहा था।
राहुल की मां कविता देवी ने बताया कि युवक के चेहरे की बनावट और विशेष रूप से उसकी आंखों के आसपास मौजूद पुराने निशान उनके बेटे से पूरी तरह मिलते-जुलते हैं। परिजनों ने जब युवक से बातचीत शुरू की, तो वह न केवल अपने माता-पिता और अन्य रिश्तेदारों को तुरंत पहचान गया, बल्कि उसने घर और परिवार के आंतरिक मामलों से जुड़ी ऐसी गोपनीय बातें बताईं, जिन्हें किसी बाहरी अनजान व्यक्ति के लिए जानना सर्वथा असंभव था। इन बातों को सुनकर परिजनों का विश्वास पक्का हो गया कि वह कोई अन्य नहीं बल्कि उनका अपना बेटा ही है।
गंगा नदी के बहाव से मोकामा घाट पहुंचने का दावा
घर लौटे युवक ने अपने गायब रहने और 12 वर्षों के जीवन सफर की एक अनोखी कहानी परिजनों के सामने प्रस्तुत की। युवक के कथनानुसार, जब उसे 12 साल पहले नदी में प्रवाहित किया गया था, तब वह पानी के तेज बहाव में बहता हुआ बेगूसराय से आगे मोकामा घाट तक पहुंच गया था। मोकामा घाट पर मौजूद एक साधु की नजर नदी में बह रहे उसके शरीर पर पड़ी, जिसके बाद साधु ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे पानी से बाहर निकाला और अथक प्रयासों से उसकी सांसें वापस लौटाकर उसकी जान बचाई।
युवक ने परिजनों को बताया कि जान बचने के उपरांत वह लंबे समय तक मोकामा में ही उसी साधु के आश्रम में निवास करता रहा। वहां कई वर्षों तक रहने के बाद वह हाल ही में आश्रम से निकला और अपने गृह गांव मानोपुर पहुंचकर परिजनों के घर के समीप भिक्षा मांगने लगा। पिता रामप्रीत दास ने अपने बेटे की पहचान का दावा करते हुए बताया कि उन्होंने मोकामा के उस साधु से टेलीफोन के माध्यम से संपर्क भी किया है। बातचीत के दौरान साधु ने इस बात की पुष्टि की कि यह युवक पिछले कई वर्षों से उनके साथ ही मोकामा में रह रहा था।
परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों का समर्थन
इस पूरे घटनाक्रम में परिवार के अन्य सदस्य भी माता-पिता के दावों का पूर्ण समर्थन कर रहे हैं। राहुल के सगे चाचा लालो सदा ने स्पष्ट किया कि वे 12 वर्ष पूर्व आयोजित किए गए अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में स्वयं शामिल हुए थे और उन्होंने अपनी आंखों से बालक को मृत मानकर नदी में प्रवाहित होते देखा था। हालांकि, अब वापस आए युवक के शरीर और चेहरे पर मौजूद विशिष्ट शारीरिक चिह्नों की समानता देखकर वे भी इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि यह युवक वही राहुल कुमार है।
माता कविता देवी ने भावुक होकर अपनी इच्छा व्यक्त की कि यदि यह युवक वास्तव में उनका वही बेटा है, तो वह चाहती हैं कि वह अब साधु-संतों का जीवन छोड़कर अपने परिवार के साथ घर पर ही रहे और सामान्य जीवन व्यतीत करे। परिवार इस पूरी घटना को ईश्वर की कृपा, बेटे की वापसी और पुनर्जन्म के एक चमत्कार के रूप में देख रहा है।
मामले में बने हुए अनसुलझे प्रश्न और पुष्टि का अभाव
भले ही परिवार के सदस्य इस युवक की वापसी से अत्यंत उत्साहित हैं और उसे अपना खोया हुआ बेटा स्वीकार कर चुके हैं, किंतु इस पूरे वाकये में कई गंभीर सवाल अब भी अनुत्तरित बने हुए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या सांप के काटने के बाद मृत घोषित किया गया बालक वास्तव में नदी में जीवित बच गया था? 12 वर्षों के लंबे समय तक वह मोकामा के अलावा अन्य किन स्थानों पर रहा और उसकी वास्तविक पहचान क्या है?
इसके अतिरिक्त, मोकामा के साधु की इस पूरे मामले में क्या भूमिका रही और क्या परिजनों द्वारा की गई फोन वार्ता के अलावा इसका कोई अन्य वैज्ञानिक या कानूनी साक्ष्य मौजूद है? इन तमाम अनसुलझे सवालों का सटीक उत्तर आधिकारिक एवं स्वतंत्र जांच तथा डीएनए जैसी वैज्ञानिक पहचान प्रक्रियाओं के संपन्न होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।



















