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भीलवाड़ा में मूंग और उड़द पर पीलिया रोग का हमला, पैदावार बचाने को कृषि अधिकारियों ने जारी की चेतावनीबिहार
20 अग॰ 2026, 3:17 pm (1 घंटे पहले)· 1

भीलवाड़ा में मूंग और उड़द पर पीलिया रोग का हमला, पैदावार बचाने को कृषि अधिकारियों ने जारी की चेतावनी

भीलवाड़ा जिले में मूंग और उड़द की फसल पर पीला मोजेक रोग का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे कई खेतों में 50 से 60 प्रतिशत तक नुकसान देखा जा रहा है।

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में बरसात के मौसम के बीच दलहनी फसलों पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। जिले के कई क्षेत्रों में मूंग और उड़द की बुवाई करने वाले किसान एक संक्रामक बीमारी के फैलाव से बेहद चिंतित हैं। फसलों में तेजी से फैल रहे पीला मोजेक, जिसे स्थानीय भाषा में पीलिया रोग भी कहा जाता है, ने कई खेतों को अपनी चपेट में ले लिया है। अगर समय पर ध्यान न दिया गया तो यह बीमारी पूरी फसल को तबाह कर सकती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह रोग पौधों के स्वाभाविक विकास को पूरी तरह बाधित कर देता है और दाने बनने की प्रक्रिया को रोक देता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

50 से 60 प्रतिशत तक फसल प्रभावित और बीमारी के प्रमुख लक्षण

भीलवाड़ा जिले के कई इलाकों में इस बीमारी का असर काफी व्यापक देखा जा रहा है, जहां खेतों में 50 से 60 प्रतिशत तक फसल पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। पीला मोजेक रोग की पहचान बहुत शुरुआती चरण में पत्तियों के रंग से की जा सकती है। इस बीमारी का पहला लक्षण पौधों की हरी पत्तियों पर दिखाई देता है। शुरुआती दौर में पत्तियों की सतह पर पीले और हरे रंग के धब्बे उभरने लगते हैं। समय बीतने के साथ यह पीलापन पूरी पत्ती पर छा जाता है और पत्ती का प्राकृतिक हरा रंग पूरी तरह बदल जाता है।

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जब पत्तियां हरी नहीं रहतीं तो पौधे में भोजन बनाने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है। इसके परिणामस्वरूप पौधे का विकास रुक जाता है और पौधा बौना ही रह जाता है। संक्रमण ज्यादा गहराने पर पौधों में फूल आने और फलियां बनने की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित होती है या पूरी तरह बंद हो जाती है। फलियां न बनने या कम बनने से दानों का उत्पादन गिर जाता है, जिसका सीधा प्रतिकूल असर कुल कृषि पैदावार पर पड़ता है। यही वजह है कि किसानों को अपने खेतों की नियमित देखरेख करने की सलाह दी गई है।

सफेद मक्खी का प्रकोप और खरपतवार की भूमिका

कृषि विभाग के अधिकारी कजोड़ मल गुर्जर के अनुसार, मानसून के इस मौसम में फसलों पर जैविक खतरों का जोखिम काफी बढ़ जाता है। इस रोग को एक खेत से दूसरे खेत और एक पौधे से दूसरे पौधे तक फैलाने में सफेद मक्खी की सबसे प्रमुख भूमिका होती है। सफेद मक्खी एक संक्रामक वाहक के रूप में कार्य करती है, जो रोगग्रस्त पौधे का रस चूसने के बाद स्वस्थ पौधों पर बैठकर वायरस पहुंचा देती है। इसलिए पीलिया रोग की रोकथाम के लिए सफेद मक्खी के फैलाव को नियंत्रित करना सबसे प्राथमिक कदम है।

इसके अलावा खेतों में मौजूद अनावश्यक खरपतवार भी इस संकट को और बढ़ा देते हैं। खरपतवार सफेद मक्खी के साथ-साथ अन्य हानिकारक कीटों और बीमारियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह का काम करते हैं। खरपतवार की मौजूदगी में ये कीट तेजी से पनपते हैं और फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए खेतों को पूरी तरह खरपतवार मुक्त रखना बेहद आवश्यक है ताकि कीटों का आश्रय स्थल खत्म किया जा सके।

फसल सुरक्षा के लिए कृषि विभाग की जरूरी सलाह

किसानों को फसल के नुकसान से बचाने के लिए कृषि विभाग ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अधिकारी कजोड़ मल गुर्जर ने सलाह दी है कि किसान अपने मूंग और उड़द के खेतों का रोजाना या नियमित अंतराल पर ध्यानपूर्वक निरीक्षण करें। यदि किसी पौधे की पत्तियों पर असामान्य पीलापन, पीले-हरे धब्बे या बढ़त रुकने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत उस प्रभावित पौधे को जड़ से उखाड़कर खेत से दूर ले जाकर नष्ट कर देना चाहिए। ऐसा करने से रोगजनक वायरस को स्वस्थ पौधों तक फैलने से रोका जा सकता है।

इसके साथ ही, सफेद मक्खी के प्रभावी नियंत्रण के लिए कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों का सही मात्रा में छिड़काव करना जरूरी है। यदि खेत में बीमारी के लक्षण शुरुआती नियंत्रण के बाद भी बढ़ते हुए दिखें, तो किसानों को बिना देरी किए अपने नजदीकी कृषि विभाग के अधिकारियों या विशेषज्ञों से संपर्क कर तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए।

सवाल-जवाब

भीलवाड़ा में मूंग और उड़द की फसल को किस बीमारी से खतरा है?
भीलवाड़ा जिले में मूंग और उड़द की फसल पर पीला मोजेक यानी पीलिया रोग का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
पीला मोजेक रोग से खेतों में कितने प्रतिशत तक नुकसान देखा जा रहा है?
भीलवाड़ा के कई क्षेत्रों में इस बीमारी के कारण 50 से 60 प्रतिशत तक फसल प्रभावित होने की खबर है।
फसलों में पीला मोजेक रोग कैसे फैलता है?
यह बीमारी मुख्य रूप से सफेद मक्खी के जरिए एक संक्रमित पौधे से स्वस्थ पौधे तक तेजी से फैलती है।
कृषि विभाग अधिकारी कजोड़ मल गुर्जर ने किसानों को क्या उपाय सुझाए हैं?
कृषि विभाग अधिकारी कजोड़ मल गुर्जर ने नियमित खेत निरीक्षण, सफेद मक्खी पर कीटनाशक छिड़काव, संक्रमित पौधे उखाड़कर नष्ट करने और खेत को खरपतवार मुक्त रखने की सलाह दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

भीलवाड़ा में दलहनी फसलों पर पीला मोजेक का यह गंभीर प्रकोप केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कानून-व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी चुनौती बन सकता है। जब फसलें बड़े पैमाने पर नष्ट होती हैं, तो किसानों पर आर्थिक बोझ और कर्ज का संकट गहरा जाता है, जिससे साहूकारों के चंगुल में फंसने और ग्रामीण स्तर पर तनाव बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। सफेद मक्खी और खरपतवार के नियंत्रण के लिए प्रशासनिक स्तर पर कृषि इनपुट की कालाबाजारी रोकने और समय पर कीटनाशक वितरण सुनिश्चित करने की सख्त निगरानी जरूरी है, अन्यथा यह संकट सामाजिक अशांति का रूप ले सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

भीलवाड़ा में पीला मोजेक वायरस के कारण 50 से 60 प्रतिशत तक फसल नुकसान का यह मामला सिर्फ कृषि संकट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अंचल की आजीविका और खाद्य सुरक्षा पर सीधा प्रहार है। सफेद मक्खी जैसे रोग वाहकों के प्रसार को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तुरंत गुणवत्तापूर्ण कीटनाशकों की निर्बाध आपूर्ति और समय पर कृषि परामर्श सुनिश्चित करना होगा। यदि इस संक्रमण को शुरुआती दौर में ही नहीं रोका गया, तो यह फसल बर्बादी किसानों को कर्ज के गंभीर संकट में धकेल सकती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी झटका लग सकता है।

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