भारतीय सिनेमा के इतिहास में 10 अगस्त की तारीख एक बेहद खास और सुनहरे पन्ने की तरह दर्ज है। छह साल के अंतर पर इसी एक तारीख को हिंदी सिनेमा की दो ऐसी फिल्मों ने बड़े पर्दे पर दस्तक दी, जिन्होंने बॉलीवुड में कहानी कहने के अंदाज को हमेशा के लिए बदल दिया। 10 अगस्त 2001 को फरहान अख्तर ने बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म ‘दिल चाहता है’ से शुरुआत की थी, जिसमें आमिर खान, सैफ अली खान और अक्षय खन्ना मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। इसके ठीक छह साल बाद, 10 अगस्त 2007 को शाहरुख़ खान की कल्ट स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म ‘चक दे इंडिया’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई। दोनों फिल्में अपने समय के पारंपरिक बॉलीवुड फॉर्मूले से पूरी तरह अलग थीं, फिर भी दर्शकों ने इन पर भरपूर प्यार लुटाया और ये दोनों फिल्में अपने-अपने रिलीज वर्ष की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की सूची में शामिल हुईं।
‘दिल चाहता है’ और आमिर खान का अर्बन सिनेमा का प्रयोग
वर्ष 2001 में रिलीज हुई फिल्म ‘दिल चाहता है’ के बनने की कहानी हिंदी सिनेमा के सबसे दिलचस्प अध्यायों में से एक है। जब निर्देशक फरहान अख्तर पहली बार इस फिल्म की पटकथा लेकर आमिर खान के पास पहुंचे, उस समय आमिर अपनी महत्वाकांक्षी और ऐतिहासिक फिल्म ‘लगान’ (2001) की शूटिंग में व्यस्त थे। फिल्म में ‘आकाश’ के युवा और शहरी किरदार को निभाने के लिए आमिर खान ने अपने पूरे लुक को बदलने का एक बड़ा जोखिम उठाया। उस दौर के मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा में किसी बड़े सुपरस्टार द्वारा इस तरह का शारीरिक और विजुअल बदलाव करना लगभग अकल्पनीय माना जाता था।
फिल्म की रिलीज से पहले ट्रेड विश्लेषकों और फिल्म उद्योग के जानकारों के बीच कई तरह की आशंकाएं थीं। बॉलीवुड गलियारों में यह अफवाह तेजी से फैली कि आमिर खान एक ऐसी फिल्म में काम कर रहे हैं जो भारतीय परंपराओं और पारिवारिक मूल्यों से अलग है और इसे केवल बड़े शहरों या मेट्रो शहरों के दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। व्यापार विशेषज्ञों ने इसे बॉक्स ऑफिस के लिहाज से एक बहुत बड़ा खतरा माना था। हालांकि, जब 10 अगस्त 2001 को फिल्म सिनेमाघरों में उतरी, तो इसने देश के युवाओं को तुरंत अपना दीवाना बना लिया। आमिर खान का स्पाइकी हेयरस्टाइल और गोटी दाढ़ी देखते ही देखते युवाओं के बीच एक बड़ा फैशन ट्रेंड बन गया। सांस्कृतिक प्रभाव के साथ-साथ इस फिल्म ने शानदार कारोबार किया और यह 2001 की पांचवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म साबित हुई।
‘चक दे इंडिया’ और शाहरुख़ खान का साहसिक करियर फैसला
‘दिल चाहता है’ की ऐतिहासिक सफलता के छह साल बाद, 10 अगस्त 2007 को ‘चक दे इंडिया’ के साथ बॉलीवुड में एक और नया इतिहास रचा गया। यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनी इस स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म की कास्टिंग से जुड़ा किस्सा आज भी दर्शकों के बीच बेहद चर्चित है। मीडिया रिपोर्ट्स और उद्योग से जुड़ी जानकारियों के अनुसार, निर्माता-निर्देशक ने महिला हॉकी टीम के कोच ‘कबीर खान’ की भूमिका के लिए सबसे पहले सलमान खान को चुना था, न कि शाहरुख़ खान को।
हालांकि, फिल्म के विषय को लेकर सोच के मतभेद और तारीखों (डेट्स) की समस्याओं के कारण सलमान खान ने इस प्रोजेक्ट को करने से इनकार कर दिया। सलमान के मना करने के बाद यह प्रस्ताव शाहरुख़ खान के पास पहुंचा। उस दौर में शाहरुख़ खान अपनी रोमांटिक फिल्मों की अपार सफलता के साथ करियर के शीर्ष पर थे। ऐसे समय में बिना किसी पारंपरिक हीरोइन और बिना गानों वाली एक गंभीर स्पोर्ट्स फिल्म का चुनाव करना शाहरुख़ के करियर के लिए एक बहुत बड़ा रिस्क माना जा रहा था। इसके बावजूद, शाहरुख़ खान ने ‘कबीर खान’ के किरदार को पूरी निष्ठा के साथ जीया। 10 अगस्त 2007 को रिलीज हुई इस फिल्म ने दर्शकों के दिलों को छू लिया और यह 2007 की तीसरी सबसे बड़ी हिट फिल्म बनी।
कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा की नींव और 10 अगस्त का ऐतिहासिक महत्व
दो अलग-अलग दशकों और दो अलग-अलग सुपरस्टार्स के साथ बनी ‘दिल चाहता है’ और ‘चक दे इंडिया’ ने भारतीय सिनेमा में आधुनिक अर्बन फिल्मों और यथार्थवादी स्पोर्ट्स ड्रामा की नई नींव रखी। 2001 से पहले बॉलीवुड की मुख्यधारा की फिल्मों में शहरी युवाओं की दोस्ती, उनके आपसी संबंधों और विचारों को इतने स्वाभाविक और आधुनिक तरीके से कभी नहीं दिखाया गया था। ‘दिल चाहता है’ ने बॉलीवुड में ‘मॉडर्न अर्बन सिनेमा’ का एक नया दौर शुरू किया।
दूसरी ओर, ‘चक दे इंडिया’ ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर स्पोर्ट्स ड्रामा जॉनर के प्रति दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया। महिला हॉकी टीम के संघर्ष, समर्पण और जीत पर आधारित इस फिल्म ने पूरे देश में देशभक्ति का एक नया जज्बा पैदा किया। फिल्म में शाहरुख़ खान का ‘सत्तर मिनट’ वाला प्रेरणादायक संवाद भारतीय पॉप कल्चर का एक अटूट हिस्सा बन गया। इन दोनों फिल्मों ने यह साबित कर दिया कि 10 अगस्त की तारीख बॉलीवुड में प्रयोगधर्मी और कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा के लिए बेहद भाग्यशाली रही है।
डिजिटल युग में भी कायम है कल्ट क्लासिक का क्रेज
सिनेमाघरों में अपनी पहली रिलीज के दशकों बीत जाने के बाद भी ‘दिल चाहता है’ और ‘चक दे इंडिया’ का जादू आज भी बरकरार है। समय बीतने के साथ इन दोनों फिल्मों की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। आज भी टेलीविजन प्रसारण और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर ये फिल्में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली पसंदीदा फिल्मों में शामिल हैं। 10 अगस्त 2001 और 10 अगस्त 2007 की तारीखें इस बात की गवाह हैं कि कैसे आमिर खान और शाहरुख़ खान जैसे सुपरस्टार्स ने लीक से हटकर कहानियों का चयन किया और बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए।



















