हिंदी सिनेमा के विकास और उसकी समृद्ध विरासत में मुख्य सितारों और निर्देशकों के साथ चरित्र अभिनेताओं का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे ही एक बहुमुखी अभिनेता अच्युत पोतदार का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने 18 अगस्त 2025 की रात को मुंबई के ठाणे स्थित एक अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली। अपने चार दशक लंबे करियर में 125 से ज्यादा फिल्मों और कई टीवी शो में काम करने वाले पोतदार को दर्शक उनके अनूठे अभिनय और सहज संवाद अदायगी के लिए हमेशा याद रखेंगे।
3 इडियट्स का प्रोफेसर और यादगार संवाद
अच्युत पोतदार ने बॉलीवुड में कई तरह की भूमिकाएं निभाईं, लेकिन राजकुमार हिरानी की ब्लॉकबस्टर फिल्म 3 इडियट्स में निभाए गए एक सख्त प्रोफेसर के किरदार ने उन्हें हर घर में पहचान दिला दी। इस फिल्म में मशीन की परिभाषा वाले दृश्य में उनका एक संवाद "अरे, कहना क्या चाहते हो?" आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है और सोशल मीडिया पर एक क्लासिक मीम के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा उनका एक और संवाद "क्या बात है" भी काफी सराहा गया। उन्होंने अपनी छोटी लेकिन असरदार भूमिकाओं से साबित किया कि एक कलाकार का प्रभाव स्क्रीन टाइम पर नहीं बल्कि उसके अभिनय की गहराई पर निर्भर करता है।
सैन्य अधिकारी से लेकर कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव तक का सफर
अभिनय की दुनिया में आने से पहले अच्युत पोतदार का जीवन काफी विविध और प्रेरणादायक रहा। उनका जन्म 22 अगस्त 1934 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ था। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रीवा में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में की थी। हालांकि जल्द ही वह देश सेवा के जज्बे के साथ भारतीय सेना में शामिल हो गए। उन्होंने सेना में कई वर्षों तक समर्पित सेवा दी और वर्ष 1967 में कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेना की नौकरी के बाद उन्होंने सरकारी उपक्रम इंडियन ऑयल (आईओसीएल) में एग्जीक्यूटिव के रूप में अपनी दूसरी पारी शुरू की और वर्ष 1992 में वहां से रिटायर हुए।
44 वर्ष की उम्र में अभिनय का पदार्पण और 4 दशक का सफर
इंडियन ऑयल में अपनी कॉर्पोरेट नौकरी के दौरान ही अच्युत पोतदार ने कला के प्रति अपने जुनून को जीवित रखा। उन्होंने 44 वर्ष की परिपक्व उम्र में वर्ष 1980 की प्रसिद्ध फिल्म आक्रोश से हिंदी सिनेमा में अपना कदम रखा। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अगले चार दशकों में 125 से अधिक बॉलीवुड और मराठी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। उन्होंने सिनेमा के साथ-साथ कई प्रसिद्ध टीवी धारावाहिकों और रंगमंच के नाटकों में भी काम किया।
उनकी प्रमुख फिल्मों में लगे रहो मुन्ना भाई, इश्क, राजू बन गया जेंटलमैन, दबंग 2, आक्रोश, तेज़ाब, परिंदा, रंगीला, वास्तव और परिणीता शामिल हैं। इसके अलावा टेलीविजन जगत में उन्होंने लोकप्रिय धारावाहिक वागले की दुनिया, दूरदर्शन का ऐतिहासिक शो भारत एक खोज और मराठी सीरियल माझा होशील ना में भी अपनी अदाकारी की छाप छोड़ी।
कला जगत में शोक की लहर और अमिट यादें
अच्युत पोतदार के जाने से हिंदी और मराठी सिनेमा जगत ने एक बेहतरीन चरित्र अभिनेता को खो दिया है। ठाणे के अस्पताल में 90 वर्ष की उम्र में उनके निधन की खबर से उनके प्रशंसकों और सिनेमा प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई। यद्यपि वह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन भारतीय सिनेमा में उनके दिए गए योगदान और फिल्म 3 इडियट्स के उनके यादगार दृश्य हमेशा दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाते रहेंगे।



















