सिनेमाघरों में गांधी जयंती के खास अवसर पर कदम रखने वाली सस्पेंस थ्रिलर दृश्यम 3 ने टिकट खिड़की पर धमाकेदार शुरुआत दर्ज की है। पहले ही सप्ताहांत में बॉक्स ऑफिस के कई पुराने कीर्तिमानों को पीछे छोड़ते हुए इस पेशकश ने दर्शकों का जबर्दस्त ध्यान खींचा है। इस तीसरी कड़ी के प्रभावशाली क्लाइमैक्स और हिंदी पट्टी के दर्शकों के मिजाज के अनुकूल तैयार की गई कहानी के केंद्र में फिल्मकार अभिषेक पाठक की रचनात्मक दृष्टि रही है। शानदार निर्देशन की बदौलत चर्चा में आए इस युवा रचनाकार की निजी जिंदगी और सिनेमाई सफर बेहद दिलचस्प है।
शुरुआती तालीम और विदेश में सिनेमाई हुनर
1 जुलाई 1987 को दुनिया में आए अभिषेक पाठक बॉलीवुड में बतौर प्रोड्यूसर पहचान रखने वाले मंगत कुमार पाठक के परिवार से ताल्लुक रखते हैं। अपनी स्कूली और शुरुआती पढ़ाई के बाद उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध मीठीबाई कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की। फिल्मों की बारीक समझ विकसित करने के इरादे से वह इसके बाद सीधे न्यूयॉर्क पहुंचे, जहां उन्होंने फिल्ममेकिंग की औपचारिक और तकनीकी बारीकियों का प्रशिक्षण हासिल किया।
पारिवारिक प्रोडक्शन हाउस और फिल्मों की लंबी फेहरिस्त
विदेशी संस्थान से सिनेमा की डिग्री पूरी करके जब अभिषेक मुंबई लौटे, तो उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभालते हुए अपने पिता के कामकाज में सक्रिय योगदान देना शुरू किया। अभिषेक के पिता मंगत कुमार पाठक ने साल 2019 में पैनोरमा स्टूडियोज की नींव रखी थी। इसी बैनर तले हिंदी सिनेमा की कई चर्चित फिल्मों का निर्माण हुआ। इस प्रोडक्शन हाउस के खाते में ओमकारा, संडे, ऑल द बेस्ट, अतिथि तुम कब जाओगे, आक्रोश और दिल तो बच्चा है जी जैसी लोकप्रिय फिल्में शामिल हैं। इसके अलावा स्पेशल 26, अलोन, प्यार का पंचनामा 2, दृश्यम, रेड, सेक्शन 375, खुदा हाफिज और हालिया दृश्यम 3 भी इसी बैनर की देन हैं।
सहायक निर्देशक से शुरू हुआ बॉलीवुड का सफर
अभिषेक पाठक के सिनेमाई सफर की शुरुआत साल 2006 में अजय देवगन की शॉर्ट फिल्म द अवेकिंग में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर हुई थी। इसके बाद साल 2009 में वह शॉर्ट फिल्म बूंद के लेखक बने, जिसे प्रतिष्ठित नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया। बड़े पर्दे के मुख्यधारा सिनेमा की बात करें तो उन्होंने साल 2006 की फिल्म ओमकारा में एग्जक्यूटिव प्रोड्यूसर के रूप में जिम्मेदारी निभाई थी।
निर्माता के रूप में दशक भर का काम और निर्देशन
साल 2011 में अभिषेक पाठक निर्माता के तौर पर युवाओं के बीच लोकप्रिय हुई फिल्म प्यार का पंचनामा से जुड़े। अगले 8-9 वर्षों तक उन्होंने इंडस्ट्री में बतौर प्रोड्यूसर लगातार सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद साल 2019 में आई फिल्म उजड़ा चमन के जरिए उन्होंने मुख्यधारा फीचर फिल्म के डायरेक्टर के तौर पर अपनी नई शुरुआत की। उनके पूरे करियर को देखें तो अब तक उन्होंने केवल 3 फिल्मों का ही निर्देशन संभाला है, जिनमें उजड़ा चमन, दृश्यम 2 और हालिया दृश्यम 3 शामिल हैं।
स्टार अभिनेता के साथ पारिवारिक आत्मीयता
अभिषेक पाठक द्वारा निर्देशित तीन में से दो फिल्मों में अजय देवगन ने ही मुख्य भूमिका निभाई है। असल में यह जुड़ाव केवल पेशेवर नहीं बल्कि गहरा पारिवारिक है। अभिषेक के पिता मंगत कुमार पाठक ने कई वर्षों तक अजय देवगन के मैनेजर के तौर पर कार्यभार देखा था। उसी करीबी रिश्ते के चलते अभिषेक भी शुरुआती दिनों से अजय देवगन के बेहद निकट रहे हैं। दोनों के बीच सगे भाइयों जैसा स्नेह है और वह इस अभिनेता को हमेशा भैया कहकर पुकारते हैं।
सिनेमा से जुड़ा निजी और पारिवारिक जीवन
निजी जीवन की बात करें तो अभिषेक पाठक ने साल 2023 में अभिनेत्री शिवालिका ओबेरॉय के साथ वैवाहिक बंधन में प्रवेश किया था। शिवालिका ने उनके ही प्रोडक्शन हाउस में बनी फिल्म खुदा हाफिज में अहम किरदार निभाया था। अभिषेक की मां का नाम नीलम पाठक है, जबकि उनकी बहन अमिता पाठक भी ग्लैमर जगत में सक्रिय रही हैं और बतौर अभिनेत्री, मॉडल तथा प्रोड्यूसर अपनी पहचान बना चुकी हैं।



















