यूरोपीय सेंट्रल बैंक की आगामी मौद्रिक नीतियों को लेकर वैश्विक वित्तीय बाजारों में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। वित्तीय स्थितियों में आए अनचाहे कड़ेपन ने निवेशकों और नीति निर्माताओं को अपनी उम्मीदों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। ऊर्जा कीमतों में आए अप्रत्याशित उछाल के बाद ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की संभावनाओं पर ब्रेक लगता दिख रहा है। बैंकिंग और वित्तीय सेवा समूह एमयूएफजी के अनुसार, अनचाही वित्तीय सख्ती के कारण बाजार प्रतिभागियों ने ऊर्जा मूल्य झटके से निपटने के लिए ईसीबी द्वारा आगे की जाने वाली दर वृद्धि की उम्मीदों को घटा दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों पर आर्थिक विखंडन का खतरा मंडरा रहा है। बाजार की मौजूदा दर वृद्धि मूल्य निर्धारण अब एमयूएफजी के दो और दर वृद्धि के अनुमान के अधिक करीब पहुंच गई है, लेकिन यदि विखंडन से जुड़े जोखिम और गहरे होते हैं तो यह अनुमान भी अत्यधिक आक्रामक साबित हो सकता है। ऐसे माहौल में नीतिगत फैसलों का संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
संक्रमण के जोखिम और ट्रांसमिशन प्रोटेक्शन इंस्ट्रूमेंट पर चर्चा
बाजार में इस बात को लेकर भी कयास तेज हो रहे हैं कि वित्तीय संक्रमण के जोखिमों को थामने के लिए ईसीबी को अतिरिक्त नीतिगत कदम उठाने पड़ सकते हैं। इनमें मात्रात्मक सख्ती यानी क्यूटी की गति को धीमा करना या पहली बार अपने ट्रांसमिशन प्रोटेक्शन इंस्ट्रूमेंट यानी टीपीआई का सहारा लेना शामिल हो सकता है। आर्थिक विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि संक्रमण के जोखिम फैलते हैं तो वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।
हालांकि, इस कदम से जुड़ी अपनी चुनौतियां भी हैं। विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि टीपीआई का उपयोग करने का फैसला ऐसा प्रभाव छोड़ सकता है मानो केंद्रीय बैंक सदस्य देशों की सरकारों के वित्तीय घाटे को वित्तपोषित करने में मदद कर रहा है। यह स्थिति केंद्रीय बैंक की साख और उसकी स्वतंत्रता को लेकर असहज सवाल खड़े कर सकती है, जिससे नीति निर्माताओं के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है।
विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर का दबदबा और यूरो में गिरावट
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में व्यापक उथल-पुथल देखने को मिल रही है। यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। यह मुद्रा जोड़ी बुधवार को 1.1312 के स्तर तक फिसल गई, जो जनवरी के शिखर स्तर 1.2082 से काफी नीचे कारोबार कर रही है। इस तीव्र गिरावट के पीछे अमेरिकी डॉलर की नए सिरे से आई मजबूती, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और यूरोप के महंगे ऊर्जा दामों के संपर्क में आने से जुड़ी चिंताएं शामिल हैं।
वहीं अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी दबाव साफ दिखाई दिया है। एशियाई कारोबार के दौरान सोमवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी में ताजा बिकवाली देखी गई, जिससे यह 0.6900 के स्तर की ओर गिर गई। मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनावों के बीच डॉलर की मजबूती ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर भारी दबाव डाला। अब बाजार प्रतिभागियों की निगाहें कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक यानी आरबीए की भावी नीतियों पर टिकी हुई हैं।
येन, सोना और डिजिटल संपत्तियों की चाल
अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी ने सोमवार को एशियाई सत्र में शुरुआती नुकसान की भरपाई करते हुए 158.00 का स्तर दोबारा छू लिया। यह जोड़ी पिछले एक सप्ताह के अपने सीमित दायरे में ही कारोबार कर रही है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आगे दरें बढ़ाने की उम्मीदें कमजोर पड़ने के बावजूद भू-राजनीतिक अनिश्चितता डॉलर को सहारा दे रही है। हालांकि, बैंक ऑफ जापान की ओर से सख्त मौद्रिक रुख की उम्मीदों और संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिमों के चलते येन को मजबूती मिल सकती है, जिससे इस जोड़ी की बढ़त सीमित रहने के आसार हैं।
कमोडिटी बाजार में सोने ने सोमवार को अपने नुकसान में कुछ कमी दर्ज की, लेकिन यह अपने पुराने दायरे में ही फंसा रहा। कीमती धातु के लिए बढ़त के प्रयास $4,200 के नीचे सीमित रहे, जबकि $4,110 का दो महीने का निचला स्तर इससे कुछ ही दूरी पर बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में आई हालिया नरमी ने सोने को कुछ सहारा दिया है, लेकिन अमेरिकी ट्रेजरी की ऊंची यील्ड ने डॉलर में किसी भी बड़ी गिरावट को रोक रखा है।
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में पाई नेटवर्क में लगातार पांचवें दिन गिरावट का सिलसिला जारी रहा और यह $0.090 के नीचे फिसल गया। इस बिकवाली के बावजूद खुदरा मांग स्थिर बनी हुई है, जहां सक्रिय परपेचुअल्स का नोशनल मूल्य $10 मिलियन से ऊपर बना हुआ है। तकनीकी दृष्टिकोण से पाई के लिए मंदी का रुझान मजबूत होता दिख रहा है।
अमेरिकी सेवा क्षेत्र और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर ध्यान अब आर्थिक संकेतकों पर केंद्रित हो गया है। सितंबर महीने में अमेरिकी आईएसएम सर्विसेज पीएमआई में मामूली सुधार की उम्मीद जताई गई है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी सेवा क्षेत्र संतोषजनक ढंग से विस्तार के दायरे में बना रहेगा। इसी बीच, फेडरल रिजर्व द्वारा आगे और मौद्रिक सख्ती किए जाने के दांव पिछले कुछ दिनों में कमजोर पड़े हैं, जिससे आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में नए आंकड़े निर्णायक साबित होंगे।


















