पारंपरिक फसलों के मुकाबले बागवानी फसलों में नियमित नकदी आमदनी का बेहतर जरिया साबित हो रहा है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव अंतर्गत बिलहरी गांव के किसान चेतराम कुशवाहा ने फूलों की खेती को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। वे बीते 10 वर्षों यानी साल 2015 से लगातार गुलाब की बागवानी कर रहे हैं। इससे पहले वे केवल गेंदे की खेती करते थे, लेकिन बेहतर मुनाफे की तलाश में उन्होंने गेंदे के साथ-साथ गुलाब उगाने की योजना बनाई। इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए उन्होंने पहले कृषि विज्ञान केंद्र नौगांव से तकनीकी प्रशिक्षण लिया और फिर वैज्ञानिक तौर-तरीकों से खेत में गुलाब के पौधे रोपे।
गुलाब की बागवानी में लगातार उत्पादन की खासियत
गुलाब को फूलों का राजा माना जाता है और व्यावसायिक दृष्टि से इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें सालभर फूल आते रहते हैं। चेतराम के अनुसार, दूसरी मौसमी फसलों की तरह इसमें उत्पादन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता, बल्कि पौधों से रोजाना उत्पादन मिलता रहता है। बाजार में अन्य सामान्य फूलों की तुलना में गुलाब के दाम भी अपेक्षाकृत ऊंचे और स्थिर रहते हैं, जिससे किसानों को हर दिन नियमित कैश फ्लो मिलता रहता है।
पौध रोपाई, कलम और खेत की सटीक दूरी का गणित
गुलाब की शुरुआत के लिए किसान या तो स्वयं नर्सरी तैयार कर सकते हैं या फिर सीधे तैयार पौधे खरीदकर खेत में ट्रांसप्लांट कर सकते हैं। गुलाब के पौधे तैयार करने के लिए कलम विधि का उपयोग किया जाता है। खेत में रोपाई करते समय पौधों के बीच की दूरी का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। कतार से कतार यानी लाइन से लाइन की दूरी 4 फीट रखनी चाहिए, जबकि एक पौधे से दूसरे पौधे की दूरी डेढ़ फीट होनी चाहिए। इस विधि से खेत में रोपने के ठीक 1 महीने बाद ही पौधों में फ्लावरिंग शुरू हो जाती है, जो पूरे साल निरंतर चलती रहती है।
लागत का बजट और 1 बीघा का पूरा खर्च
एक बीघा जमीन पर गुलाब की खेती के पूरे बजट का हिसाब समझाते हुए चेतराम बताते हैं कि 1 बीघा खेत में कुल 2500 पौधे लगाए जा सकते हैं। एक पौधे की औसत खरीद लागत करीब 10 रुपये बैठती है। इस तरह 1 बीघा खेत में 2500 पौधे लगाने का शुरुआती खर्च लगभग 25000 रुपये आता है। यह एकमुश्त निवेश के बाद लंबे समय तक निरंतर आमदनी देने वाला मॉडल बन जाता है।
दैनिक तुड़ाई और पैदावार का चक्र
एक बीघा में लगे 2500 पौधों से रोजाना औसतन 10 से 20 किलोग्राम ताजे फूल प्राप्त होते हैं। किसान सालभर हर रोज इन फूलों की तुड़ाई कर सकते हैं। जब पौधों में नई शाखाएं निकलती हैं, उस दौरान कुछ समय के लिए फूलों की संख्या थोड़ी कम हो जाती है, लेकिन नई शाखाएं विकसित होते ही उत्पादन फिर से बढ़कर सामान्य स्तर पर आ जाता है। फूलों की तुड़ाई के लिए समय का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है; तुड़ाई या तो सुबह के समय की जानी चाहिए या फिर शाम को, ताकि फूलों की ताजगी बरकरार रहे।
बाजार भाव और रोजाना होने वाली कमाई
गुलाब के थोक बाजार भाव मांग के अनुसार बदलते रहते हैं। जब शादियों और त्योहारों का सीजन होता है, तब गुलाब का थोक भाव 150 रुपये प्रति किलो से लेकर 300 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है। वहीं सामान्य या डाउन सीजन में भी इसका भाव 50 से 80 रुपये प्रति किलो के बीच बना रहता है। इस नियमित बिक्री के दम पर 1 बीघा खेत से हर दिन 1 से 2 हजार रुपये की सीधी कमाई होती है, जबकि त्योहारों और लगन के दिनों में यह दैनिक मुनाफा और भी अधिक बढ़ जाता है।



















