पोल्ट्री फार्मिंग के दौरान बत्तख पालन करने वाले किसानों को पक्षियों के रहन-सहन और उनके पैरों की सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। पानी और जमीन दोनों जगहों पर वक्त बिताने वाली बत्तखों को अगर लगातार गीली जगह पर रखा जाए, तो उनके पैरों में सूजन और लाल धब्बों की समस्या शुरू हो सकती है। चास मॉडल पशु चिकित्सालय, बोकारो की पशु चिकित्सक डॉ. दीप्ति मिंज के अनुसार, पैरों के तलवों में खरोंच या घाव होने पर यह स्थिति जीवाणु संक्रमण का रूप ले लेती है। जब स्टैफिलोकोकस जैसा बैक्टीरिया घाव में प्रवेश करता है, तो संक्रमण काफी गंभीर हो जाता है और पक्षियों में बंबल फुट की समस्या पैदा हो जाती है।
लक्षण और चलने-फिरने में असमर्थता
बंबल फुट की चपेट में आने पर बत्तखों के तलवों में तेज दर्द और सूजन हो जाती है, जिसका सबसे स्पष्ट असर उनके चलने के तरीके पर दिखता है। पक्षी लंगड़ाकर चलने लगते हैं या चलने-फिरने से पूरी तरह बचते हुए एक ही जगह पर बैठे रहते हैं। पैरों में अत्यधिक तकलीफ की वजह से वे अपने शरीर का भार तलवों पर नहीं संभाल पाते हैं। अगर इस स्थिति को शुरुआती दौर में ही न पहचाना जाए, तो बैक्टीरियल संक्रमण भीतर तक फैल सकता है। गंभीर मामलों में बत्तख के पैर के अंदरूनी ऊतकों को हमेशा के लिए भारी नुकसान पहुंचने का जोखिम बना रहता है।
उत्पादन पर सीधा असर और आर्थिक नुकसान
शारीरिक बीमारी या तनाव की स्थिति किसी भी पक्षी की उत्पादकता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। बत्तखों के बीमार होने पर उनके अंडा देने की क्षमता घट जाती है और वजन न बढ़ने के कारण मांस का उत्पादन भी बुरी तरह गिर जाता है। डॉ. दीप्ति मिंज स्पष्ट करती हैं कि बंबल फुट को मामूली समस्या समझकर टालना पोल्ट्री किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो सकता है। पक्षी की सेहत बिगड़ने से फार्म का पूरा आर्थिक चक्र प्रभावित होने लगता है, इसलिए समय रहते कदम उठाना जरूरी है।
बचाव के उपाय और फार्म प्रबंधन
बत्तखों को इस बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए उनके बाड़े को सूखा और साफ-सुथरा रखना अनिवार्य है। गीली मिट्टी या नमी वाली जमीन की परत को समय-समय पर बदलते रहना चाहिए, ताकि बैक्टीरिया न पनप सकें। इसके अलावा जिस जमीन पर बत्तखें विचरण करती हैं, वहां से कांटेदार झाड़ियां, नुकीले पत्थर और धारदार चीजें पूरी तरह हटा देनी चाहिए। तलवों पर कट या चोट लगने से ही बैक्टीरिया को पैर के भीतर घुसने का रास्ता मिलता है।
शुरुआती पहचान और उपचार के निर्देश
झुंड में यदि कोई भी बत्तख लंगड़ाती हुई दिखाई दे, तो संक्रमण और चोट की जांच के लिए उसे तुरंत बाकी पक्षियों से अलग कर देना चाहिए। उसके पैरों और तलवों को अच्छी तरह देखकर यह जांचें कि कहीं कोई घाव या सूजन तो नहीं है। प्रभावित हिस्से की नियमित सफाई बेहद जरूरी है, लेकिन किसी भी एंटीसेप्टिक या दवा के प्रयोग से पहले पेशेवर राय लेनी चाहिए। गंभीर स्थिति में घरेलू नुस्खों पर समय गंवाने के बजाय नजदीकी पशु चिकित्सक से विधिवत जांच कराकर दवाएं शुरू करनी चाहिए। सही समय पर पहचान और साफ-सुथरे प्रबंधन से इस परेशानी को रोका जा सकता है।



















