सिनेमाघरों में नितिन कक्कड़ के निर्देशन में तैयार हुई फिल्म आवारापन 2 की दस्तक के साथ ही दर्शकों में गहरा उत्साह देखा जा रहा है। साल 2007 में आई सुपरहिट कल्ट फिल्म आवारापन का यह आधिकारिक सीक्वल लंबे समय से चर्चा में बना हुआ था। इस नए रिलीज के बीच बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी के लंबे करियर पर भी नजर डाली जा रही है। उन्होंने कई ऐसी लीक से हटकर फिल्में की हैं जिनमें उनकी अदाकारी तो बेमिसाल रही, मगर व्यावसायिक रूप से वे फिल्में उतनी बड़ी कामयाबी हासिल नहीं कर सकीं जितनी वे हकदार थीं। आइए जानते हैं इमरान हाशमी के अभिनय सफर की ऐसी ही छह सबसे चर्चित और अंडररेटेड फिल्मों के बारे में।
शंघाई (2012): दिबाकर बनर्जी की तीखी राजनीतिक थ्रिलर
साल 2012 में रिलीज हुई फिल्म शंघाई का निर्देशन जाने-माने फिल्मकार दिबाकर बनर्जी ने किया था। इस फिल्म में इमरान हाशमी ने अपनी स्थापित रोमांटिक और सीरियल किसर की छवि से पूरी तरह बाहर निकलकर जोगिंदर परमार नामक एक छोटे शहर के साधारण वीडियोग्राफर की भूमिका निभाई थी। फिल्म की कहानी छोटे कस्बों में फैले राजनीतिक भ्रष्टाचार और आम इंसान की लाचारी के इर्द-गिर्द घूमती है। इमरान ने इस संजीदा किरदार की अंदरूनी कशमकश को इतने सहज और प्रभावशाली अंदाज में पर्दे पर उतारा कि हर कोई उनकी अभिनय क्षमता का कायल हो गया।
आवारापन (2007): गैंगस्टर शिवम की दर्दभरी कहानी
साल 2007 में प्रदर्शित आवारापन इमरान हाशमी के करियर का एक बड़ा मोड़ साबित हुई थी। इसमें उन्होंने शिवम नाम के एक ऐसे टूटे हुए गैंगस्टर का किरदार निभाया था जो अपनी वफादारी और आत्म-मुक्ति के बीच फंसा रहता है। हालांकि शुरुआती दौर में यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई बड़ा रिकॉर्ड नहीं बना पाई थी, लेकिन समय के साथ इसके भावनात्मक संवाद, सुरीले संगीत और इमरान के संजीदा अंदाज ने इसे एक कल्ट क्लासिक का दर्जा दिला दिया। प्यार, दर्द और प्रायश्चित के ताने-बाने पर बुनी यह कहानी आज भी उनके प्रशंसकों की पसंदीदा सूची में शामिल है।
टाइगर्स (2018): दानिस तानोविक की खोजी बायोग्राफिकल ड्रामा
ऑस्कर विजेता निर्देशक दानिस तानोविक के मार्गदर्शन में बनी 2018 की फिल्म टाइगर्स इमरान हाशमी के अभिनय जीवन के सबसे सशक्त प्रोजेक्ट्स में गिनी जाती है। यह एक सच्ची घटना पर आधारित बायोग्राफिकल ड्रामा है, जिसमें इमरान ने एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की भूमिका निभाई थी। उनका किरदार एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी द्वारा बनाए जा रहे उस बेबी मिल्क पाउडर के घोटाले का पर्दाफाश करता है जो नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा साबित हो रहा था। बिना किसी लाउड ड्रामे के, इमरान ने एक आम व्हिसलब्लोअर के डर और संघर्ष को बेहद ईमानदारी से पर्दे पर पेश किया।
घनचक्कर (2013): याददाश्त खोने और चोरी की डार्क कॉमेडी
निर्देशक राजकुमार गुप्ता की साल 2013 में आई फिल्म घनचक्कर एक अनूठी डार्क कॉमेडी थ्रिलर थी। इस फिल्म में इमरान हाशमी ने संजू नाम के एक पूर्व बैंक लुटेरे का रोल निभाया था, जो एक दुर्घटना के बाद अपनी याददाश्त गंवा बैठता है और यह भूल जाता है कि उसने चोरी की रकम कहां छिपाई है। फिल्म में विद्या बालन के साथ इमरान की केमिस्ट्री और सस्पेंस व हास्य का अनूठा मेल देखने को मिला था। अलग तरह के ताने-बाने के बावजूद यह फिल्म उस वक्त दर्शकों को खींचने में नाकाम रही, लेकिन आज भी इसे बॉलीवुड की बेहतरीन डार्क कॉमेडी में गिना जाता है।
तुम मिले (2009): 2005 की मुंबई बाढ़ की पृष्ठभूमि पर बना प्यार
साल 2009 में आई फिल्म तुम मिले 26 जुलाई 2005 को मुंबई में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा और बाढ़ की पृष्ठभूमि पर आधारित एक प्रेम कहानी है। फिल्म में इमरान हाशमी ने एक संघर्षशील कलाकार की भूमिका निभाई थी जो अपनी कला, करियर की चिंताओं और अपनी मोहब्बत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है। फिल्म के गाने बेहद लोकप्रिय रहे और इमरान ने अपने किरदार की संवेदनशीलता को पर्दे पर बहुत खूबसूरती से उभारा। इसके बावजूद यह भावनात्मक रोमांटिक ड्रामा बॉक्स ऑफिस पर वह मुकाम नहीं पा सका जिसकी इसे उम्मीद थी।
एक थी डायन (2013): तंत्र-मंत्र और जादू का खौफनाक ताना-बाना
साल 2013 की हॉरर थ्रिलर एक थी डायन में इमरान हाशमी ने बोबो नाम के एक मशहूर और सफल जादूगर का किरदार निभाया था। बोबो अपने बचपन के काले अतीत, तंत्र-मंत्र और डायन के साए से लगातार परेशान रहता है। फिल्म का सस्पेंस, बैकग्राउंड स्कोर और हॉरर एलिमेंट्स काफी मजबूत थे। इमरान ने इस डरावने माहौल में भी अपने अभिनय में गंभीरता और ठहराव बनाए रखा। अपनी बेहतरीन मेकिंग के बावजूद यह फिल्म बॉलीवुड की सबसे अंडररेटेड हॉरर-मिस्ट्री फिल्मों की श्रेणी में ही सिमट कर रह गई।



















