भारत सरकार के आयकर विभाग ने छोटे करदाताओं को अपनी अघोषित विदेशी संपत्तियों और आय की जानकारी देने के लिए एक विशेष अवसर प्रदान किया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के माध्यम से शुरू की गई इस नई डिस्क्लोजर स्कीम (फास्ट-डीएस) के तहत पात्र नागरिक 31 दिसंबर 2026 तक ऑनलाइन घोषणा दर्ज कर सकते हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों, युवा पेशेवरों, तकनीकी कर्मचारियों और अनिवासी भारतीयों को पुराने टैक्स विवादों से एकमुश्त राहत दिलाना है। जो करदाता समय रहते अपनी संपत्तियों का खुलासा करते हैं, वे नियमानुसार टैक्स और पेनल्टी देकर कानूनी कार्रवाई से बच सकेंगे।
फास्ट-डीएस योजना का उद्देश्य और पात्रता
केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा बजट 2026-27 में इस योजना का ऐलान किया गया था। आयकर विभाग का मानना है कि विदेश में पढ़ाई या नौकरी करने वाले कई छोटे करदाता जानकारी के अभाव में अपनी विदेशी आय या बैंक खातों का ब्योरा आईटीआर में देने से चूक जाते हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए सीबीडीटी ने यह एकमुश्त निपटान व्यवस्था तैयार की है। यह योजना 16 अगस्त से प्रभावी होगी। करदाताओं को अपनी घोषित की जाने वाली संपत्तियों और आय का उचित बाजार मूल्य 31 मार्च 2026 की स्थिति के आधार पर तय करके बताना होगा। समय पर घोषणा करने वाले व्यक्तियों पर 31 मार्च के बाद टैक्स लगाने और मामले को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
घोषणा के लिए निर्धारित दो मुख्य श्रेणियां
सीबीडीटी ने करदाताओं की स्थिति के अनुसार इस योजना को दो अलग श्रेणियों में विभाजित किया है। पहली श्रेणी उन मामलों के लिए है जहां भारत के बाहर स्थित संपत्ति या आय पर अब तक कोई टैक्स नहीं चुकाया गया है। इस श्रेणी में वही करदाता आवेदन कर सकते हैं जिनकी अघोषित संपत्ति का कुल मूल्य 1 करोड़ रुपये से अधिक न हो।
दूसरी श्रेणी उन करदाताओं के लिए बनाई गई है जिनकी विदेश स्थित संपत्ति पर पहले ही टैक्स दिया जा चुका है या फिर वह संपत्ति उस समय खरीदी गई थी जब संबंधित व्यक्ति अनिवासी भारतीय (एनआरआई) की स्थिति में था। हालांकि, करदाता उस संपत्ति को अपने आयकर रिटर्न की संबंधित अनुसूची में दर्ज करने में विफल रहा था। इस दूसरी श्रेणी में संपत्ति की अधिकतम सीमा 5 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसके साथ ही इस श्रेणी के आवेदकों को 1 लाख रुपये का निश्चित शुल्क भी जमा करना होगा।
टैक्स और पेनल्टी की गणना का गणित
इस योजना के तहत टैक्स का भुगतान करने के लिए सीबीडीटी ने एक पारदर्शी फॉर्मूला जारी किया है। अघोषित विदेशी आय या संपत्ति के मूल्यांकन पर 30 फीसदी टैक्स लगाया जाएगा। इसके अलावा, करदाता को टैक्स की राशि के बराबर यानी 30 फीसदी राशि अतिरिक्त जुर्माने या पेनल्टी के रूप में भी चुकानी होगी। इस प्रकार कुल देनदारी संपत्ति के मूल्य की 60 फीसदी बैठती है।
इसे समझने के लिए सीबीडीटी ने एफएक्यू के माध्यम से एक स्पष्ट उदाहरण दिया है। मान लीजिए किसी करदाता के पास विदेश में एक अघोषित बैंक खाता है जिसमें 60 लाख रुपये जमा हैं और उसकी अघोषित विदेशी आय 20 लाख रुपये है। इस स्थिति में कुल अघोषित राशि 80 लाख रुपये मानी जाएगी। इस पर 30 फीसदी की दर से 24 लाख रुपये का टैक्स बनेगा और 24 लाख रुपये ही पेनल्टी के रूप में देने होंगे। नतीजतन, करदाता को कुल 48 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।
कानूनी सुरक्षा और ब्लैक मनी एक्ट से राहत
फास्ट-डीएस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके तहत सही घोषणा करने वाले करदाताओं को पूर्ण कानूनी सुरक्षा मिलेगी। योजना के जरिए विवाद सुलझाने पर करदाता के खिलाफ ब्लैक मनी एक्ट 2015 के सख्त प्रावधानों के तहत कोई मुकदमा या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही आयकर कानून के अन्य नियमों के तहत भी अतिरिक्त पेनल्टी से सुरक्षा प्राप्त होगी। सीबीडीटी ने यह भी साफ किया है कि इस योजना में घोषित की गई राशि को करदाता की नियमित कुल वार्षिक आय में नहीं जोड़ा जाएगा, जिससे उन पर अतिरिक्त प्रोग्रेसिव टैक्स का बोझ नहीं पड़ेगा।



















