सिनेमाघरों में अजय देवगन की बहुप्रतीक्षित सस्पेंस थ्रिलर फिल्म ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ रिलीज हो चुकी है। यह इस लोकप्रिय फ्रेंचाइजी की तीसरी किस्त है, जिसका निर्देशन अभिषेक पाठक ने संभाला है। बड़े पर्दे पर उतरते ही फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जोरदार शुरुआत की है और पहले ही दिन 66 करोड़ रुपये का शानदार कारोबार कर खाता खोला है। समीक्षकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के साथ-साथ दर्शकों से भी फिल्म की कसी हुई पटकथा को भरपूर सराहना मिल रही है। सिनेमाप्रेमियों के बीच इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा का विषय फिल्म का चौंकाने वाला क्लाइमैक्स बना हुआ है, जो दर्शकों को अपनी सीट से बांधे रखता है।
कहानी को मुकाम तक पहुंचाना बना सबसे बड़ा इम्तिहान
इस फ्रेंचाइजी के तीसरे और अंतिम अध्याय को दर्शकों के सामने पेश करना निर्देशक के लिए एक बहुत भारी दायित्व की तरह था। अभिषेक पाठक ने इस सफर को याद करते हुए स्पष्ट किया कि दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरना कितना पेचीदा काम था। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती उस सफर का सम्मान करना था, लेकिन साथ ही दर्शकों को ऐसा अनुभव देना था जिसकी उन्होंने शायद उम्मीद न की हो। लंबे समय से दर्शक इस कहानी और इसके किरदारों के साथ बेहद गहरे स्तर पर जुड़े रहे हैं, जिस कारण हर किसी के मन में क्लाइमैक्स को लेकर अलग-अलग सिद्धांत और अपेक्षाएं तैयार थीं।
सत्य और नजरिए की जंग जो दर्शकों के जेहन में रह जाती है
फिल्म को मिल रहे जबरदस्त जनसमर्थन और प्रतिक्रियाओं को देखकर निर्देशक ने अपनी खुशी जाहिर की है। अभिषेक पाठक के मुताबिक, जब वह दर्शकों को सिनेमाघरों में फिल्म का लुत्फ उठाते, उसके अंतिम मोड़ पर चर्चा करते और विजय के कदमों पर आपस में बहस करते देखते हैं, तो यह उनके लिए बेहद संतोषजनक पल होता है। उनके अनुसार, यह पूरी सीरीज हमेशा इस मूल विचार के इर्द-गिर्द घूमी है कि आम लोग सच को किस दृष्टिकोण से परखते और समझते हैं। सिनेमाघर से बाहर आने के बाद भी दर्शक जिस तरह कहानी के अंत की अलग-अलग व्याख्या कर रहे हैं, वही इस फ्रेंचाइजी को बाकी फिल्मों से अलग और खास बनाता है।
किरदारों के साथ दर्शकों का अटूट भावनात्मक लगाव
अभिषेक पाठक ने इस बात पर भी गहरा आश्चर्य व्यक्त किया कि इतने लंबे अंतराल के बाद भी देश भर के लोग इस कहानी के संसार से भावनात्मक रूप से कितने जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि दर्शक सिर्फ मुख्य किरदार विजय सालगांवकर से ही नहीं, बल्कि इस पूरी दुनिया और इसके हर पात्र से आत्मिक रूप से जुड़े महसूस करते हैं। सालों के सफर के बाद ये किरदार दर्शकों की अपनी जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। एक फिल्मकार के लिए इससे बड़ा पुरस्कार और कुछ नहीं हो सकता कि थिएटर की बत्तियां जलने और बाहर निकलने के बाद भी कहानी का अंत दर्शकों के दिमाग में लगातार घूमता रहे।
दमदार कलाकारों और निर्माताओं की अनुभवी टोली
इस बहुचर्चित निष्कर्ष को पर्दे पर जीवंत करने के लिए कलाकारों की एक मजबूत टोली सामने आई है। अजय देवगन के साथ फिल्म में तब्बू, श्रिया सरन, रजत कपूर, जयदीप अहलावत, प्रकाश राज, कमलेश सावंत, इशिता दत्ता और मृणाल जाधव ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। पर्दे के पीछे की कमान की बात करें तो फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है, जबकि इसकी पटकथा अभिषेक पाठक, आमिल कीयन खान और परवेज शेख द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई है। वहीं इस बड़े प्रोजेक्ट के निर्माण का जिम्मा अलोक जैन, अजीत अंधारे, कुमार मंगत पाठक और अभिषेक पाठक ने मिलकर उठाया है।


















