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असम एनआरसी: बाहर हुए 19 लाख लोगों को रिजेक्शन स्लिप न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने दी सफाईअसम
3 अक्तू॰ 2026, 3:45 pm (28 मिनट पहले)· 1

असम एनआरसी: बाहर हुए 19 लाख लोगों को रिजेक्शन स्लिप न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने दी सफाई

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने बताया कि डेटा सुरक्षा इंतजाम अधूरे रहने और अंतिम अधिसूचना न जारी होने के कारण एनआरसी से छूटे लोगों को रिजेक्शन स्लिप जारी नहीं की जा सकी हैं।

असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से बाहर रखे गए करीब 19 लाख नागरिकों की कानूनी लड़ाई अभी भी अधर में लटकी हुई है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक नए हलफनामे के जरिए यह बात सामने आई है कि अंतिम सूची को अब तक औपचारिक रूप से अधिसूचित नहीं किया गया है, जिसकी वजह से छूटे हुए आवेदकों को आधिकारिक रिजेक्शन स्लिप देने की प्रक्रिया अटकी हुई है।

डेटा सुरक्षा और हैंडओवर में देरी

भारत के महारजिस्ट्रार (आरजीआई) की ओर से शीर्ष अदालत में पेश हलफनामे में पूरी स्थिति स्पष्ट की गई है। इसके अनुसार, असम राज्य एनआरसी समन्वयक अभी तक एनआरसी के विशाल डेटाबेस को सुरक्षित रूप से संरक्षित करने के लिए सुरक्षा तंत्र तैयार करने में जुटे हैं। सुरक्षा व्यवस्था पूरी न होने की वजह से यह पूरा डेटा आरजीआई को ट्रांसफर नहीं किया जा सका है। नियमों के तहत जब तक यह डेटा महारजिस्ट्रार को औपचारिक रूप से प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक अंतिम एनआरसी की सरकारी अधिसूचना जारी नहीं की जा सकती।

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19 लाख से अधिक लोग हुए थे सूची से बाहर

अगस्त 2019 में जब एनआरसी की अंतिम सूची प्रकाशित की गई थी, तब कुल 3.11 करोड़ लोगों को इसमें शामिल होने की पात्रता मिली थी। वहीं दूसरी ओर 19.07 लाख आवेदकों के नाम इस सूची से बाहर कर दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में निर्देश दिया था कि बाहर किए गए लोगों के लिए एक ठोस व्यवस्था बनाई जाए ताकि उन्हें रिजेक्शन स्लिप मिल सके। यह पर्ची कानूनी रूप से बेहद अहम है क्योंकि इसे पाने के बाद ही कोई व्यक्ति फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के समक्ष अपनी नागरिकता साबित करने की अपील कर सकता है। हालांकि, राज्य समन्वयक ने अक्टूबर 2020 में ही आरजीआई को अवगत करा दिया था कि जब तक महारजिस्ट्रार अंतिम एनआरसी को विधिवत अधिसूचित नहीं करते, तब तक ये दस्तावेज नहीं बांटे जा सकते।

याचिकाओं पर सुनवाई और अगली तारीख

सर्वोच्च अदालत में यह मामला जमीयत उलेमा-ए-हिंद, असम स्टेट जमीयत उलेमा और ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन समेत कई अन्य पक्षों द्वारा दायर याचिकाओं के चलते पहुंचा था। इन याचिकाओं में मांग की गई थी कि सूची से बाहर हुए लोगों को तत्काल रिजेक्शन स्लिप दी जाए और जिन नागरिकों के नाम अंतिम सूची में आ चुके हैं, उन्हें उनके एनआरसी कार्ड सौंपे जाएं। असम सरकार की ओर से अपना जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने के बाद, अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर तय कर दी है।

सवाल-जवाब

असम एनआरसी से कितने लोग बाहर हुए थे?
अगस्त 2019 में जारी अंतिम सूची में 19.07 लाख लोगों को एनआरसी से बाहर रखा गया था, जबकि 3.11 करोड़ लोगों के नाम शामिल थे।
बाहर हुए लोगों को रिजेक्शन स्लिप क्यों नहीं मिल पाई है?
डेटा सुरक्षा व्यवस्था अधूरी होने के कारण डेटा आरजीआई को ट्रांसफर नहीं हुआ है, जिससे अंतिम एनआरसी की औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं हो सकी है।
रिजेक्शन स्लिप का कानूनी महत्व क्या है?
रिजेक्शन स्लिप मिलने के बाद ही बाहर हुए आवेदक फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में जाकर अपनी नागरिकता साबित करने की अपील कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका किन संगठनों ने दायर की है?
यह याचिका जमीयत उलेमा-ए-हिंद, ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन और असम स्टेट जमीयत उलेमा सहित अन्य पक्षों द्वारा दायर की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
असम सरकार द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगने के बाद अदालत ने सुनवाई 6 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 मिनट पहले

उन्नीस लाख लोगों की नागरिकता का मामला इतने साल से यूँ लटका हुआ है और डेटा सुरक्षा के नाम पर फाइलें आगे नहीं बढ़ रही हैं। हैरानी की बात यह है कि जब 2019 में सूची आ गई थी, तब तक यह सुरक्षा का बुनियादी ढांचा क्यों तैयार नहीं किया गया था?

Ravikash Gupta@ravikash·14 मिनट पहले

करण भाई, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर क्या आरजीआई के पास कोई तय समयसीमा है कि यह डेटा सुरक्षा का काम कब तक पूरा होगा?

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