नवरात्रि के पावन उत्सव के दौरान जब देश भर के गरबा और डांडिया पंडाल रोशनी से जगमगाते हैं, तब संगीत की धुन पर कदम खुद-ब-खुद थिरकने लगते हैं। बॉलीवुड ने उत्सवों के लिए कई यादगार रचनाएं दी हैं, मगर कुछ गीत ऐसे होते हैं जो समय के साथ फीके पड़ने के बजाय और भी लोकप्रिय हो जाते हैं। फिल्म निर्माण और संगीत संयोजन की दृष्टि से जब भी उत्सव आधारित नृत्यों का जिक्र होता है, तो पारंपरिक वाद्यों और आधुनिक ऑर्केस्ट्रा का तालमेल सबसे अधिक प्रभाव छोड़ता है।
फिल्म राम-लीला का वह क्लासिक संगीत
साल 2013 के दौरान निर्देशक संजय लीला भंसाली अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’ लेकर पर्दे पर आए थे। इस फिल्म का गीत ‘नगाड़े संग ढोल बाजे’ पूरी तरह से गरबा के पारंपरिक उत्सव और प्रेम की ऊर्जा को केंद्र में रखकर रचा गया था। दृश्य में दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की जीवंत मौजूदगी ने इस पूरे नृत्य क्रम को एक अलग ही ऊंचाई दी। पारंपरिक गरबा के घेरे, तेजी से बदलते ताल और दोनों कलाकारों के तालमेल ने इस गीत को उत्सव का पर्याय बना दिया।
संगीतकार, गायक और रचनाकारों की अनूठी जुगलबंदी
इस पूरे संगीत ट्रैक को खास बनाने में कई कलाकारों का अहम योगदान रहा है। फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली ने खुद इसका संगीत तैयार किया था, जिसमें गुजराती लोक वाद्यों की थाप को भव्य स्तर पर उभारा गया। वहीं इसके अर्थपूर्ण और ऊर्जावान बोल सिद्धार्थ और गरिमा की जोड़ी ने लिखे। गायन के मोर्चे पर श्रेया घोषाल और उस्मान मीर की आवाज ने इस गीत में जान फूंक दी। उस्मान मीर की बुलंद तान और श्रेया घोषाल के सुरों ने लोक गायकी और सुगम संगीत का दुर्लभ संतुलन प्रस्तुत किया।
लाल चनिया-चोली और तेज बीट्स का सम्मोहन
स्क्रीन पर दीपिका पादुकोण का लाल रंग की चनिया-चोली वाला पारंपरिक लुक दर्शकों के दिल में उतर गया। भारी-भरकम पारंपरिक परिधान के बावजूद जिस गति, भाव-भंगिमा और संतुलन के साथ उन्होंने डांडिया के जटिल स्टेप्स किए, उसने इसे एक तकनीकी मिसाल बना दिया। ढोल और नगाड़ों की बढ़ती रफ्तार के साथ तेज होते बीट्स हर आयु वर्ग के नर्तकों को आकर्षित करते हैं। यही कारण है कि अपनी रिलीज के इतने साल बीत जाने के बाद भी हर डांडिया नाइट में इस गीत की मांग सबसे शीर्ष पर बनी रहती है।























