हिंदी सिनेमा में प्यार, फरेब और प्रतिशोध की कहानियों का एक लंबा और स्वर्णिम इतिहास रहा है। जब किसी कहानी में अटूट प्रेम के बदले धोखा और छल मिलता है, तो पर्दे पर जन्मी बदले की आग दर्शकों को बांधकर रख देती है। 1980 के दशक की ब्लॉकबस्टर क्लासिक्स से लेकर आज के डिजिटल युग के OTT प्लेटफॉर्म्स तक, भारतीय सिनेमा निर्माताओं ने रिवेंज ड्रामा को बार-बार नए अंदाज में पेश किया है। बॉक्स ऑफिस पर नए कीर्तिमान स्थापित करने वाली और दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाने वाली ऐसी ही 6 चर्चित फ़िल्मों का पूरा विवरण नीचे दिया गया है।
1. खून भरी मांग (1988)
राकेश रोशन के निर्देशन में तैयार हुई फ़िल्म खून भरी मांग बॉलीवुड में महिला-केंद्रित रिवेंज थ्रिलर फ़िल्मों के लिए एक मील का पत्थर मानी जाती है। इस कहानी के केंद्र में आरती (रेखा) है, जो एक बेहद सीधी-सादी और विशाल संपत्ति की मालकिन विधवा महिला है। संजय (कबीर बेदी) आरती के साथ झूठे प्यार का ढोंग करके उससे शादी रचाता है। उसका असल मकसद आरती की सारी दौलत हड़पना होता है, जिसके लिए वह उसे मगरमच्छों से भरी एक खौफनाक झील में धक्का दे देता है। मौत के मुंह से चमत्कारिक रूप से बचने के बाद, आरती प्लास्टिक सर्जरी का सहारा लेती है और 'ज्योति' नाम से एक ग्लैमरस मॉडल बनकर वापसी करती है। इसके बाद वह जिस तरह से संजय से चुन-चुनकर बदला लेती है, उसने दर्शकों को हैरान कर दिया था। रेखा का यह सशक्त अवतार आज भी भारतीय सिनेमा में कल्ट दर्जा रखता है।
2. बाजीगर (1993)
अब्बास-मस्तान द्वारा निर्देशित बाजीगर ने हिंदी सिनेमा में सस्पेंस ड्रामा और एंटी-हीरो के दौर की शुरुआत की थी। इस फ़िल्म में अजय शर्मा (शाहरुख खान) अपने पिता की असामयिक मृत्यु और अपने परिवार के विनाश का प्रतिशोध लेने का प्रण लेता है। वह अपने दुश्मन बिजनेसमैन मदन चोपड़ा को तबाह करने के लिए उसकी बेटियों को अपने प्रेमजाल में फंसाता है। फ़िल्म का वह दृश्य आज भी दर्शकों को सिहरा देता है, जहां अजय पहली मुलाकात में सीमा (शिल्पा शेट्टी) से प्यार का इजहार करता है और फिर उसे बहुमंजिला इमारत की छत से नीचे फेंक देता है। सोचे-समझे षड्यंत्र और खतरनाक इरादों वाले इस किरदार ने शाहरुख खान को रातोंरात हिंदी फिल्म उद्योग का सबसे बड़ा सितारा बना दिया था।
3. एक हसीना थी (2004)
श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी थ्रिलर फ़िल्म एक हसीना थी धोखे और उससे उपजे इंतकाम की एक बेहद डार्क कहानी पेश करती है। कहानी में करण (सैफ अली खान) अपनी प्रेमिका सारिका (उर्मिला मातोंडकर) को मीठी बातों में फंसाकर अपने गैर-कानूनी कारनामों में मोहरे की तरह इस्तेमाल करता है और उसे जेल भिजवा देता है। सलाखों के पीछे भयानक यातनाएं झेलने के बाद, सीधी-सादी सारिका एक बेहद कठोर और निर्दयी औरत में बदल जाती है। जेल से रिहा होने के बाद सारिका जिस ठंडे दिमाग और चालाकी से करण को चूहों से भरी एक अंधेरी गुफा में कैद करके अपना बदला पूरा करती है, वह दृश्य दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देता है।
4. काबिल (2017)
संजय गुप्ता के निर्देशन में बनी फ़िल्म काबिल में रोहन (ऋतिक रोशन) और सुप्रिया (यामी गौतम) दो दृष्टिबाधित किरदारों के रूप में सामने आते हैं, जो विवाह के बाद अपनी एक साधारण लेकिन खुशहाल दुनिया बसाते हैं। हालांकि, जब शहर के प्रभावशाली अपराधी उनकी जिंदगी को तबाह कर देते हैं और कानून व्यवस्था पूरी तरह लाचार साबित होती है, तब रोहन स्वयं इंसाफ की कमान संभालता है। आंखों की रोशनी न होने के बावजूद, रोहन अपनी तीव्र सुनने की क्षमता, आवाज बदलने की कला और सटीक टाइमिंग का उपयोग करके अपने दुश्मनों को एक-एक करके मौत के घाट उतारता है। ऋतिक रोशन का यह अभिनय उनके करियर के सबसे यादगार और सराहनीय प्रदर्शनों में गिना जाता है।
5. हसीन दिलरुबा (2021)
विनील मैथ्यू द्वारा निर्देशित फ़िल्म हसीन दिलरुबा में तापसी पन्नू, विक्रांत मैसी और हर्षवर्धन राणे ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। यह फ़िल्म अरेंज मैरिज के बाद उपजे असंतोष, विवाहेतर संबंधों और आपसी फरेब का एक उलझा हुआ ताना-बाना बुनती है। मर्डर के संगीन आरोपों, पुलिस तफ्तीश और लेखक दिनेश पंडित के पल्प फिक्शन उपन्यासों के इर्द-गिर्द घूमती यह कहानी प्यार में जुनूनी सनक और प्रतिशोध की चरम सीमाओं को दर्शाती है। OTT पर सीधे रिलीज हुई इस फ़िल्म के अप्रत्याशित ट्विस्ट और टर्न ने अंत तक दर्शकों की उत्सुकता बनाए रखी।
6. बदलापुर (2015)
श्रीराम राघवन द्वारा निर्देशित डार्क थ्रिलर बदलापुर में राघव (वरुण धवन) की सामान्य जिंदगी तब पूरी तरह बिखर जाती है, जब एक बैंक डकैती के दौरान उसकी पत्नी और मासूम बच्चे की बेरहमी से हत्या कर दी जाती है। इस भयानक आघात से राघव का दिल पत्थर बन जाता है और वह अपने परिवार की हत्या का हिसाब चुकता करने के लिए पूरे 15 सालों तक धैर्यपूर्वक इंतजार करता है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी के किरदार के प्रति वरुण धवन की तीव्र नफरत और इंतकाम की आग इस फ़िल्म को बॉलीवुड के इतिहास की सबसे आक्रामक और गंभीर रिवेंज फ़िल्मों में से एक बनाती है।



















