हिंदी सिनेमा के इतिहास में साहिर लुधियानवी और लता मंगेशकर दोनों ही दिग्गज हस्तियों के रूप में जाने जाते हैं। साहिर लुधियानवी ने साल 1949 से फिल्मों में लेखन की शुरुआत की थी और फिल्म नौजवान के जरिए उन्हें बड़ी पहचान हासिल हुई थी। इस फिल्म में संगीत एसडी बर्मन का था और लता मंगेशकर द्वारा गाया गया गाना ठंडी हवाएं लहरा के आएं बेहद लोकप्रिय हुआ था। इस गाने को प्रसिद्ध बनाने में लता मंगेशकर की गायकी की बड़ी भूमिका मानी गई थी। हालांकि, सफलता के इस दौर के बीच एक ऐसा समय भी आया जब एक गीत के चंद शब्दों को बदलने की बात पर दोनों कलाकारों के रिश्ते में गहरी दरार आ गई थी और इस विवाद का खामियाजा संगीतकार को भी झेलना पड़ा था।
सरदार मलिक की रिकॉर्डिंग में शुरू हुआ विवाद
यह पूरा वाकया उस समय का है जब संगीतकार सरदार मलिक एक गीत की रिकॉर्डिंग कर रहे थे। इस गीत की रचना साहिर लुधियानवी ने की थी और इसे लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड किया जाना था। रिहर्सल के दौरान लता मंगेशकर को गीत के कुछ शब्दों के उच्चारण और प्रवाह में परेशानी महसूस हो रही थी। उन्होंने साहिर लुधियानवी से आग्रह किया कि वे उन कठिन शब्दों की जगह कुछ अन्य शब्द लिख दें ताकि गायन सहज हो सके। लेकिन अपने लेखन के प्रति बेहद संवेदनशील साहिर लुधियानवी ने अपनी रचना में किसी भी तरह का बदलाव करने से साफ तौर पर मना कर दिया।
जब दोनों दिग्गजों के बीच बहस बढ़ने लगी तो माहौल को शांत करने के लिए संगीतकार सरदार मलिक को हस्तक्षेप करना पड़ा। सरदार मलिक ने साहिर लुधियानवी को समझाते हुए कहा कि लता मंगेशकर जिस भी गाने को अपनी आवाज देती हैं वह सुपरहिट साबित होता है, इसलिए उनकी बात मान लेने में ही भलाई है। लेकिन यह सलाह साहिर लुधियानवी के स्वाभिमान को ठेस पहुंचा गई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर किसी को यह लगता है कि उनके गीत केवल लता जी की वजह से ही मशहूर होते हैं, तो लता जी आज के बाद उनके लिखे किसी भी गीत को नहीं गाएंगी। साहिर का कहना था कि उनके लिखे शब्द किसी भी आवाज के मोहताज नहीं हैं।
डेढ़ साल का अलगाव और फिल्मों पर असर
साहिर लुधियानवी के इस कड़े रुख से लता मंगेशकर बेहद नाराज हो गईं और रिकॉर्डिंग छोड़कर चली गईं। इस टकराव की वजह से दोनों कलाकारों ने लगभग एक से डेढ़ साल तक एक साथ काम करना पूरी तरह से बंद कर दिया। मीडिया विवरणों के मुताबिक यह वाकया 1957 से 1958 के दौरान का माना जाता है। इसी समयावधि में आई फिल्म प्यासा और नया दौर के गीतों की रचना साहिर ने की थी, लेकिन इनमें लता मंगेशकर ने कोई गाना नहीं गाया था। इसके बाद साल 1958 में प्रदर्शित फिल्म फिर सुबह होगी के गीतों में भी लता मंगेशकर का स्वर शामिल नहीं था। लता जी की अनुपस्थिति के बावजूद साहिर के लिखे ये सभी गाने दर्शकों के बीच जबरदस्त हिट साबित हुए।
सुलह और साधना फिल्म की अमर रचना
दोनों की राहें अलग होने के बावजूद संगीतकारों और फिल्म निर्माताओं को यह भली-भांति अहसास था कि साहिर की कलम और लता की मखमली आवाज का संगम सिनेमा के लिए अमूल्य है। आखिरकार निर्माताओं के प्रयास से दोनों के बीच मध्यस्थता हुई और मतभेद समाप्त हुए। सुलह के बाद साहिर लुधियानवी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा था कि अब वे दोनों गहरे मित्र हैं और दोनों का सिनेमा में बराबर का कद है। इस सुलह के बाद लता मंगेशकर ने 1958 की फिल्म साधना के लिए साहिर की लिखी प्रसिद्ध रचना औरत ने जनम दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाजार दिया को अपनी आवाज दी, जो भारतीय संगीत की एक अमर प्रस्तुति बन गई।



















