टेलीविजन के लोकप्रिय क्विज़ शो कौन बनेगा करोड़पति 18 के मंच पर गुजरात के भावनगर जिले से आए एक प्रतिभागी की दास्तान ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है। गोरखी गांव निवासी गणेश बरैया ने अपनी शारीरिक चुनौतियों को मात देकर चिकित्सा के क्षेत्र में सफलता का जो मार्ग तैयार किया है, उसकी सराहना महानायक अमिताभ बच्चन ने भी की। मात्र 3 फ़ीट 4 इंच की लंबाई और लोकोमोटर डिसेबिलिटी के बावजूद गणेश ने न केवल एमबीबीएस की डिग्री पूरी की, बल्कि वर्तमान में वे अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में नन्हे मरीजों का इलाज कर रहे हैं। केबीसी 18 के सेट पर उन्होंने अपने जीवन के उन पलों को याद किया जिन्होंने उनके भविष्य की नींव रखी थी।
सर्कस के 5 लाख रुपये के प्रस्ताव को पिता ने किया था खारिज
गणेश बरैया ने शो के दौरान अपने बचपन से जुड़ा एक बेहद मार्मिक और जीवन बदलने वाला वाकया साझा किया। जब वे स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रहे थे, उस समय सर्कस चलाने वाले कुछ लोग उनके घर पहुंचे थे। गणेश की कम लंबाई को देखते हुए उन्होंने परिवार के सामने एक वित्तीय प्रस्ताव रखा। सर्कस मंडली ने उनके पिता को 5 लाख रुपये नकद देने की पेशकश की, बशर्ते वे गणेश को उनके साथ जाने दें। एक साधारण पृष्ठभूमि वाले परिवार के लिए यह रकम काफी बड़ी थी, लेकिन गणेश के पिता ने आर्थिक लाभ के स्थान पर अपने बेटे के स्वाभिमान और शिक्षा को चुना। उन्होंने उस भारी-भरकम प्रस्ताव को तुरंत ठुकरा दिया और गणेश की पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया। यही निर्णय आगे चलकर गणेश के डॉक्टर बनने के सपने की पहली सीढ़ी साबित हुआ।
12वीं में 87% अंक, NEET में 233वीं रैंक और अदालती संघर्ष
पिता के फैसले पर खरे उतरते हुए गणेश ने अपनी पढ़ाई में पूरा ध्यान लगाया। उन्होंने उच्च माध्यमिक परीक्षा यानी 12वीं कक्षा में 87 प्रतिशत अंक हासिल करके अपनी योग्यता साबित की। इसके बाद उन्होंने चिकित्सा प्रवेश परीक्षा NEET में भाग लिया और देश भर में ऑल इंडिया रैंक 233 प्राप्त करके उत्कृष्ट सफलता अर्जित की। इतनी शानदार रैंक हासिल करने के बावजूद उनके लिए मेडिकल कॉलेज में सीट पाना आसान नहीं रहा। मेडिकल अधिकारियों ने उनकी शारीरिक दिव्यांगता को आधार बनाते हुए एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिला देने से साफ इनकार कर दिया था। इस कठिन मोड़ पर उनके स्कूल के प्रिंसिपल दलपत कटारिया आगे आए। उन्होंने कानूनी प्रक्रिया में गणेश का पूरा मार्गदर्शन किया और इस भेदभावपूर्ण फैसले के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद फैसला गणेश के पक्ष में आया और उनके लिए एमबीबीएस में प्रवेश के दरवाजे खुले।
भावनगर के अस्पताल में नन्हे बच्चों की सेवा
तमाम कानूनी और सामाजिक बाधाओं को पार करते हुए गणेश बरैया ने सफलतापूर्वक अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी की और डॉक्टर की उपाधि प्राप्त की। उपाधि मिलने के उपरांत उन्होंने भावनगर स्थित अस्पताल में अपनी सेवाएं देना प्रारंभ किया। वर्तमान में वे अस्पताल के बाल रोग विभाग से जुड़े हुए हैं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल करते हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके गांव गोरखी के लिए बल्कि पूरे राज्य और देश के दिव्यांग व्यक्तियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। वे सिद्ध करते हैं कि यदि मन में दृढ़ संकल्प हो तो कोई भी शारीरिक बाधा सपनों के आड़े नहीं आ सकती।
3 लाख रुपये के सवाल पर रुका केबीसी 18 का सफर
केबीसी 18 के मंच पर गणेश ने अपनी तीक्ष्ण बुद्धि का परिचय देते हुए फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट राउंड जीता और मुख्य हॉट सीट तक का सफर तय किया। अमिताभ बच्चन के सामने बैठकर उन्होंने कई कठिन प्रश्नों का सटीक उत्तर दिया और खेल में आगे बढ़ते रहे। हालांकि, 3 लाख रुपये के पड़ाव पर उनसे एक कठिन सवाल पूछा गया। इस प्रश्न में स्क्रीन पर चार प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों की तस्वीरें प्रदर्शित की गई थीं, जिनमें लाल किला, ताजमहल, मीनाक्षी मंदिर और चारमीनार शामिल थे। प्रश्न यह था कि इनमें से कौन-सा स्मारक गुजरात राज्य के उत्तर दिशा में स्थित है। उस समय तक गणेश की सभी उपलब्ध लाइफलाइन समाप्त हो चुकी थीं। सही उत्तर तक न पहुंच पाने के कारण उन्हें खेल बीच में ही छोड़ना पड़ा, जिससे उनकी जीती हुई धनराशि घटकर 25,000 रुपये रह गई। भले ही वे बड़ी राशि न जीत पाए हों, लेकिन उनके जीवन संघर्ष और ईमानदारी ने अमिताभ बच्चन सहित देश भर के दर्शकों का दिल जीत लिया।


















