केदारनाथ धाम में दर्शन करने के बाद सोशल मीडिया और धार्मिक चर्चाओं के केंद्र में आईं अभिनेत्री सारा अली खान के पक्ष में फिल्म जगत से आवाजें उठने लगी हैं. ‘बिग बॉस 17’ में नजर आ चुकीं अभिनेत्री सोनिया बंसल ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी राय रखते हुए सारा का खुलकर समर्थन किया है. उनका स्पष्ट कहना है कि किसी भी इंसान की धार्मिक भावनाएं और पूजा-पाठ पूरी तरह उसका निजी मामला होता है, इसलिए हर व्यक्ति को अपनी इच्छा अनुसार किसी भी पवित्र स्थल पर जाकर शीश नवाने की पूरी छूट होनी चाहिए. धर्म के आधार पर किसी की मंशा पर सवाल उठाने के बजाय समाज को आपसी भाईचारे, इंसानियत और परस्पर सम्मान को तवज्जो देनी चाहिए, क्योंकि ईश्वर या भगवान की भक्ति को विवाद का रूप देना किसी भी सूरत में उचित नहीं है.
आशीर्वाद लेने को विवाद का विषय बनाना गलत
सोनिया बंसल ने सारा अली खान के इस धार्मिक दौरे का बचाव करते हुए उनके अभिनय सफर का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि सारा एक बेहतरीन अदाकारा हैं जो हमेशा अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनती आई हैं. वह इससे पहले भी कई मर्तबा केदारनाथ की यात्रा कर चुकी हैं. इस संदर्भ में यह भी याद किया जाना चाहिए कि उन्होंने अपनी चर्चित फिल्म ‘केदारनाथ’ के जरिए अभिनय जगत में कदम रखा था, जिसकी पूरी पृष्ठभूमि ही इस ऐतिहासिक धाम के इर्द-गिर्द बुनी गई थी और जिसमें आस्था, मानवीय संवेदनाओं और प्रेम का संदेश दिया गया था. मंदिर में जाकर ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करने जैसी बेहद व्यक्तिगत बात पर बवाल खड़ा करना समझ से परे है. एक इंसान के तौर पर हर किसी को मन की शांति तलाशने और प्रार्थना करने का समान अधिकार है.
पहचान की संकीर्ण बहसों से आगे निकलने की जरूरत
मौजूदा सामाजिक माहौल पर चिंता जाहिर करते हुए सोनिया ने कहा कि आज समाज में हर छोटी-बड़ी बात को मजहबी चश्मे से देखने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है. इस पर आत्ममंथन होना चाहिए कि आने वाली पीढ़ी को किस तरह के संस्कार दिए जा रहे हैं. क्या बच्चों को एक-दूसरे से प्रेम करना, सबका आदर करना सिखाया जा रहा है या फिर सबसे पहले उनके बीच धार्मिक भेद तलाशने की आदत डाली जा रही है. एक तरफ समूचा विश्व तेजी से आधुनिकता की दिशा में बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर लोग अभी भी हिंदू और मुस्लिम पहचान से जुड़ी संकीर्ण बहसों में उलझे हुए हैं. ऐसे में वक्त की मांग है कि समाज इस संकुचित नजरिए से ऊपर उठकर व्यापक सोच अपनाए.
इबादतगाहों का सम्मान और प्रार्थना की आजादी
धार्मिक स्थलों की मर्यादा और महत्ता को रेखांकित करते हुए सोनिया बंसल ने रेखांकित किया कि मंदिर, मस्जिद और चर्च जैसी तमाम जगहें इंसान को आत्मिक सुकून, भक्ति और अपनत्व का अहसास कराने के लिए बनी हैं. अगर कोई श्रद्धालु मंदिर के गर्भगृह के सामने शीश नवाता है, मस्जिद में जाकर खुदा की इबादत करता है या फिर गिरजाघर में बैठकर शांति ढूंढता है, तो इससे किसी दूसरे व्यक्ति को आपत्ति क्यों होनी चाहिए. दुनिया के हर धार्मिक स्थल का दिल से आदर होना जरूरी है और प्रत्येक नागरिक को अपने विश्वास के मुताबिक आराधना करने का पूर्ण अधिकार मिलना चाहिए, क्योंकि किसी भी मजहबी पहचान से पहले इंसानियत सबसे बड़ी पहचान है.
कलाकार की प्रतिभा की सराहना हो, विवादों में न घसीटें
किसी व्यक्ति के मन में बसी आस्था को परखने की कोशिशों को दुखद बताते हुए अभिनेत्री ने कहा कि जब कोई शख्स ईश्वर के दर पर हाथ जोड़कर खड़ा होता है, तब उसके दिल के भीतर क्या भाव उमड़ रहे हैं, इसका अंदाजा कोई दूसरा नहीं लगा सकता. सारा अली खान ने अपनी मेहनत और कला के दम पर दर्शकों का दिल जीता है और उन्हें हमेशा उनके हुनर और व्यक्तित्व के लिए सराहा जाना चाहिए, न कि किसी पवित्र तीर्थ स्थल की यात्रा करने पर विवादों के कटघरे में खड़ा किया जाए. उन्होंने समाज में नफरत के स्थान पर अधिक से अधिक प्रेम और सद्भाव फैलाने का आह्वान किया.
25 अक्टूबर की केदारनाथ यात्रा से शुरू हुआ घटनाक्रम
सारा अली खान 25 अक्टूबर को उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम पहुंची थीं. इस यात्रा के दौरान उनकी कई तस्वीरें सामने आई थीं, जिनमें वह आम श्रद्धालुओं की तरह कतार में खड़े होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करती दिखाई दी थीं. इसके बाद मंदिर परिसर के बाहर भी उन्हें पूरी श्रद्धा के साथ हाथ जोड़कर प्रार्थना करते देखा गया था. दर्शन की इन तस्वीरों के सार्वजनिक होने के बाद से ही इस यात्रा को लेकर अलग-अलग हलकों में चर्चाएं छिड़ गईं. इसी कड़ी में एक इस्लामिक धर्मगुरु द्वारा मंदिर में पूजा-अर्चना करने को लेकर उनके खिलाफ फतवा भी जारी किया गया, जिसके बाद से यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है.



















