पारिवारिक हुनर और आधुनिक प्रबंधन शिक्षा का सही तालमेल किसी भी छोटे उपक्रम को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर सकता है। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर की रहने वाली नेहा संवारे ने इसी सोच के साथ अपने परिवार के पारंपरिक काम को एक बड़ा मुकाम दिया है। त्योहारों के मौसम में अक्सर रंगों और सजावटी सामग्रियों की मांग तेजी से बढ़ती है, लेकिन नेहा ने इस मौसमी जरूरत को एक संगठित और विस्तृत व्यवसाय में बदल दिया है। अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने पिता की छोटी सी दुकान और सीमित दायरे वाले काम को संभाला और आज उनके बनाए उत्पाद देश के विभिन्न हिस्सों में भेजे जा रहे हैं।
एमबीए की पढ़ाई और नौकरी के साथ संभाली जिम्मेदारी
नेहा संवारे ने व्यावसायिक प्रबंधन यानी एमबीए की डिग्री हासिल की है। शिक्षा पूरी होने के बाद वे एक नियमित नौकरी में कार्यरत हैं, लेकिन उन्होंने अपने पारिवारिक व्यवसाय से दूरी बनाने के बजाय उसे आधुनिक दिशा देने का फैसला किया। नौकरी की व्यस्तताओं के बीच समय निकालकर वे इस पूरे उद्यम का प्रबंधन देखती हैं। अपनी पढ़ाई के दौरान सीखी गई बाजार की समझ, सप्लाई चेन और मांग के विश्लेषण का इस्तेमाल उन्होंने सीधे अपने पिता के काम को व्यवस्थित करने में किया। इस दोहरी जिम्मेदारी को निभाते हुए उन्होंने यह साबित किया कि कॉर्पोरेट करियर के साथ-साथ पैतृक उद्यम को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है।
थोक बिक्री से मैन्युफैक्चरिंग तक का सफर
शुरुआती दौर में उनके पिता का काम केवल रंगोली की थोक बिक्री तक ही सीमित था। वे स्थानीय स्तर पर तैयार माल लाकर या सीमित स्तर पर बेचते थे। नेहा ने कारोबार की बागडोर संभालने के बाद इसकी पूरी कार्यप्रणाली में बदलाव किया। उन्होंने केवल दूसरों का माल बेचने के बजाय खुद रंगोली और रंगों की मैन्युफैक्चरिंग शुरू करवाई। अब उनकी देखरेख में विभिन्न किस्मों के रंगों और रंगोली का निर्माण होता है। इसके साथ ही उन्होंने केवल पारंपरिक रंगोली तक सीमित न रहकर कई अन्य प्रकार के नए प्रोडक्ट्स भी तैयार करने शुरू किए हैं, जिससे उत्पादों की विविधता बढ़ी है।
दीपावली और होली पर राष्ट्रव्यापी मांग
रंगों और रंगोली के इस काम में दीपावली और होली के दौरान मांग चरम पर पहुंच जाती है। जहां पहले यह काम केवल इंदौर और आसपास के इलाकों तक सीमित था, वहीं अब नेहा के उद्यम द्वारा तैयार किए गए रंग और रंगोली मध्य प्रदेश के हर जिले के अलावा देश के तमाम राज्यों और प्रमुख शहरों तक सप्लाई किए जा रहे हैं। नेहा का स्पष्ट मानना है कि काम चाहे कितना भी छोटा क्यों न दिखाई दे, व्यक्ति को अपनी मेहनत और सूझबूझ से उसे निरंतर विस्तार देना चाहिए। समर्पण और सही रणनीति से एक छोटा सा पारिवारिक काम भी समय के साथ बड़ा औद्योगिक रूप ले सकता है।



















